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केंद्र का मिशन अंत्योदय सर्वे : सोनीपत का बड़वासनी देश के 41617 गांवों में छठे नंबर पर, नार्थ भारत में सबसे आगे

यह है सोनीपत जिले का बड़वासनी गांव। जिला मुख्याल से 5 किमी. दूर।

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 07:40 AM IST

साेनीपत. यह है सोनीपत जिले का बड़वासनी गांव। जिला मुख्याल से 5 किमी. दूर। कल तक एक अंजान से गांव ने आज अचानक देश में एक अलग पहचान बना ली है। अपने सामाजिक, आर्थिक विकास, मूलभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य, स्वरोजगार और सफाई के बल पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से करवाए गए ‘मिशन अंत्योदय बेसलाइन सर्वे’ में देशभर में छठा स्थान हासिल किया है, जबकि उत्तर भारत मेें यह पहले स्थान पर है।


देश 41,617 गांवों में हासिल इस स्थान से न सिर्फ राज्य का सिर ऊंचार हुआ है बल्कि अन्य गांवों को विकास की राह पर चलने की सीख दी है। इस सर्वे में तेलंगाना का गांव पहले नंबर पर रहा है जबकि पंजाब के 5 गांवों को आठवीं रैंक मिली है। टॉप टेन रैंकिग पाने वाले गांवों में आंध्रप्रदेश के 33 गांव, तामिलनाडु से 23 गांव, केरला से 6, महाराष्ट्र के 5, तेलंगाना के 4, पंजाब के 5, कर्नाटक के 5, मध्यप्रदेश, बिहार अाैर हरियाणा का एक-एक गांव शामिल हुआ है। उत्तर भारत में बडवासनी गांव ने 86 अंक पाकर छठी रैंकिंग और पंजाब के नवांशहर के उस्मानपुर को सातवीं, जाडला व काहमा गांव काे अाठवीं अाैर फिरोजपुर जिले के मानासिंहवाला व गुरदासपुर के नारनवाली गांव को दसवीं रैंकिंग मिली है।

कुल आबादी - 5860
पुरुष संख्या - 3150
महिला संख्या- 2710
कुल मकान - 1650

कुल क्षेत्र- 965 हेक्टेयर
खेती क्षेत्र - 733 हेक्टेयर
बिना नहरी सिंचाई क्षेत्र- 232 हेक्टेयर
कुल नहरी सिंचाई क्षेत्र - 733

बड़े फैसले सामाजिक स्तर पर ही लिए जाते हैं

शहर से 5 किमी. दूर बसे गांव बड़वासनी को अपने जिले को छोड़कर अन्य राज्यों व शहरों में शायद कम ही लोग जानते होंगे। लेकिन एक सर्वे ने गांव की पहचान राष्ट्रीय स्तर की बना दी है। गांव एक छोटे कस्बे का रूप लिए हुए है। गांव के अड्डे पर सड़क के दोनों ओर 40 से अधिक दुकानें हैं, जिससे गांव में लाेगाें काे जरूरत का सामान मिल जाता है। अपना सिलाई केंद्र चलाने वाली महिला बिंदिया कहती हैं कि गांव की 150 से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर या खुद के स्तर पर स्वरोजगार कर रही हैं। ब्यूटी पार्लर, सिलाई, जनरल स्टाेर से लेकर दरी बनाने एवं अन्य कार्य महिलाएं कर रही हैं। वहीं, गांव के सरपंच प्रवीन कुमार बताते हैं कि गांव में 36 बिरादरी में आपसी मेलजोल है। बड़े फैसले सामाजिक स्तर पर होते हैं। इससे सरकारी योजनाएं तो बेहतर लागू होती ही हैं, गांव के विकास में भी बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीण सत्येंद्र कुमार ने बताया कि 800 साल पहले गांव बसा था। राजस्थान से दाे भाई अाए थे। एक ने चिटाना बसाया और बडे़ भाई से बड़वासनी। सरपंच के अनुसार गांव में 85 प्रतिशत से अधिक परिवाराें में काेई न कोई सरकारी नाैकरी पर है।a

गांव में शहर की तरह सुविधाएं : डीसी
बड़वासनी गांव शहर के पास लगता है। अधिकारियों के दौरे भी यहां होते रहते हैं। गांव में 12वीं तक सरकारी स्कूल, जलघर, स्वास्थ्य केंद्र, पशु अस्पताल, अांगनबाड़ी केंद्र हैं। अाॅनलाइन प्रक्रिया से जुडने के लिए अटल सेवा केंद्र, प्रधान मंत्री कौशल विकास केंद्र, बैंक भी है। देश में छठी रैंकिंग आने से जिले का नाम रोशन हुआ है।
- के मकरंद पांडुरंग, डीसी, साेनीपत