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कोचिंग के लिए थे पैसे, दोस्तों से नोट्स लेकर घर पर पढ़े पहली बार में UPSC पास

यह संघर्ष भरी कहानी हरियाणा के सिरसा जिले के रिसालिया खेड़ा गांव के एक आईपीएस चंद्रमोहन की है।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 10:33 PM IST

पानीपत। यह संघर्ष भरी कहानी हरियाणा के सिरसा जिले के रिसालिया खेड़ा गांव के एक आईपीएस चंद्रमोहन की है। जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में परिवार को संभाला। मां के पास इतने रुपए नहीं थे कि वे कोचिंग कर सकें। इसलिए दोस्तों से नोट्स लेकर घर पर पढ़ाई की। पहले जेईईई पास की, फिर बिना कोचिंग तीन बार यूपीएससी पास कर आईएएस और आईपीएस की सूची में नाम दर्ज कराया। बचपन से ही खाकी का शौक था, इसलिए चंद्रमोहन ने आईपीएस की नौकरी को चुना। अब पानीपत में एएसपी के पद पर ट्रेनिंग ले रहे हैं। 10 वीं की पढ़ाई के दौरान हुई पिता की मौत...

बकौल चंद्रमोहन, जब मैं 10 वीं कक्षा में पढ़ता था, तब पिता भगवानदास की मौत हो गई। घर का गुजारा भी मुश्किल हो गया। बड़ा भाई कुमार गौरव भी कॉलेज में पढ़ रहा था। हालात ऐसे बन गए कि हम दोनों भाइयों को पढ़ाई छोड़ने की नौबत आ गई, लेकिन मां दया रानी ने हम दोनों भाइयों को हिम्मत बंधाई और पढ़ाई जारी रखने को कहा।
- पिता की पेंशन से मां ने हम दोनों भाइयों को पढ़ाया और घर का खर्चा भी चलाया। 12वीं कक्षा तक मैं सिरसा में पढ़ा। घर पर पढ़ाई करके जेईईई पास की। दिल्ली आईआईटी कॉलेज मिला।

- 2013 में बीटेक पूरी की। यूपीएससी देने के लिए कम से कम 21 साल होना जरूरी है।

2013 में मैं 21 साल का ही हुआ था। परीक्षा दी तो भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) आयकर में चयन हुआ।

- 8 माह बाद नौकरी छोड़कर घर पर फिर से तैयारी की। 22 साल की उम्र में आईपीएस बन गए। रिजल्ट आने से पहले एक बार और यूपीएससी की परीक्षा दी।

- 2015 में आईपीएस की ट्रेनिंग में जाने से पहले रिजल्ट आया। जिसमें वे आईएएस बन गए लेकिन उन्होंने पुलिस विभाग में ही रहना तय किया।

युवाओं के लिए संदेश- नशे से दूर रहें, समाज को आगे बढ़ाएं
चंद्रमोहन को बचपन से ही खेलों से लगाव रहा है। ट्रेनिंग के दौरान रेसिंग में 16 किलोमीटर, 1600 मीटर में गोल्ड जीता। हॉर्स राइडिंग, एथलेटिक्स, स्कवैश के अच्छे खिलाड़ी रहे हैं।
आज भी चंद्रमोहन दो घंटे अपनी फिटनेस पर देते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा युवाओं को संदेश है कि नशे से दूर रहें।
ये हमारे समाज को खोखला कर रहा है। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाएं और एक बेहतर समाज निर्माण में सहयोग करें।