पानीपत

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कोसली विधायक बोले- रजिस्ट्री में 3 लाख तक ली जा रही रिश्वत, तहसीलदार सस्पेंड

नरबीर सिंह ने तहसीलदार को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए साथ ही सीएम विजिलेंस की जांच की सिफारिश कर द

Dainik Bhaskar

Dec 23, 2017, 07:39 AM IST
minister narbeer suspend tehsildar in greevance meeting

रेवाड़ी. रेवाड़ी में कष्ट निवारण समिति की बैठक में तहसील में रजिस्ट्री के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में समिति प्रभारी एवं राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री राव नरबीर सिंह ने तहसीलदार को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए साथ ही सीएम विजिलेंस की जांच की सिफारिश कर दी। यह अभी तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।


शुक्रवार को रेवाड़ी के बाल भवन में कष्ट निवारण समिति की बैठ चल रही थी। इसमें लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर शिकायतें सुन रहे थे। एक युवक ने कहा कि रेवाड़ी तहसील में रजिस्ट्री के नाम पर खुलेआम रिश्वत मांगी जा रही है। काम के लिए महीनों तक चक्कर कटाए जा रहे हैं। भाजपा व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक ने युवक की पैरवी करते हुए कहा कि वे खुद डीसी को कई ऐसी रजिस्ट्रियां भेज चुके हैं, जो कि फर्जी तरीके से की गई हैं। कोसली विधायक विक्रम यादव भी तहसीलदार के खिलाफ आए और कहा कि दो से तीन लाख रुपए की रिश्वत ली जा रही थी। इसके बाद राव नरबीर ने तुरंत तहसीलदार को सस्पेंड करने के आदेश दिए। कहा कि सीएम विजलेंस से मामले की जांच कराई जाएगी। इस पर तहसीलदार विकास मलिक ने कहा कि उसे निलंबित कर दिया तो उसका परिवार परेशानी झेलेगा, मैं पहले भी सस्पेंड हो चुका हूं।
कार्यों में हेर-फेर की शिकायत पर ग्राम सचिव और सरंपच सस्पेंड, एसडीएम करेंगी जांच
सोनीपत | जिला परिवाद एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में एक शिकायत पर मंत्री कृष्णलाल पंवार ने भावड़ की सरपंच और ग्राम सचिव को सस्पेंड करने का आदेश दिया। इसमें कागजों में अधिक लाइटें दिखाने और वास्तव में कम खरीदने सहित सबमर्सिबल लगवाने में हेरफेर करने समेत कई गंभीर आरोप थे। अधिकारियों ने जब रिपोर्ट पेश की तो मंत्री ने तत्काल ही कार्रवाई की।

इधर, करप्शन के आरोप में फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन के सी गोयल सस्पेंड, पंकज जैन को चार्ज

हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन केसी गोयल को भ्रष्टाचार के आरोपों में सस्पेंड कर दिया गया है। इस पद का कार्यभार अब काउंसिल के वाइस चेयरमैन पंकज जैन को सौंपा गया है। स्वास्थ्य विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी अमित झा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि गोयल के खिलाफ भ्रष्टाचार, दस्तावेजों में हेराफेरी कर वित्तीय फायदा उठाने का मामला दर्ज हुआ है। क्योंकि इस मामले की अभी जांच चल रही है। इस जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उन्हें तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाता है। फार्मेसी काउंसिल सूत्रों के मुताबिक गोयल को चेयरमैन बने अभी 3 साल ही हुए हैं जबकि इस पद का कार्यकाल 5 साल रहता है। काउंसिल में वे तीसरे ऐसे चेयरमैन है जिन पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का मामला दर्ज हुआ है। उल्लेखनीय है कि राज्य फार्मेसी कौंसिल प्रदेश भर के 25 हजार से ज्यादा फार्मासिस्ट और फार्मेसी कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करती है। इसके करीब 14000 मतदाता निदेशक मंडल का चुनाव करते हैं।

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