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वीर मोहन सिंह के संघर्ष और बलिदान को कलमबद्ध करेगी हरियाणा ग्रंथ अकादमी

क्षत्रीय समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे हरियामा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक प्रो वीरेंद्र सिंह चौहान।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:37 PM IST

वीर मोहन सिंह के संघर्ष और बलिदान को कलमबद्ध करेगी हरियाणा ग्रंथ अकादमी

करनाल (घरौंडा)। कैथल जिले में बाबर के गुर्गों और सेनापतियों को नाकों चने चबाने के लिए मजबूर करने वाले वीर शहीद मोहन सिंह के संघर्ष और बलिदान की गाथा को हरियाणा ग्रंथ अकादमी कलमबद्ध कर प्रकाशित कराएगी। उनके अलावा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बिखरी पड़ी शौर्य गाथाओं पर भी इसी शैली में चरणबद्ध ढंग से कार्य किया जाएगा। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक प्रो वीरेंद्र सिंह चौहान ने आज यहां आयोजित वीर मोहन सिंह स्मृति दिवस समारोह के मंच से यह घोषणा की। समस्त क्षत्रिय समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं और अन्य समाजसेवियों ने शिरकत की।

- ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष प्रो चौहान ने कहा कि वीर मोहन सिंह ने विदेशी आक्रमणकारी मुगलों को हरियाणा की धरती पर खूब छकाया।
- जब छल बल से मुगलों ने उन्हें गिरफ्तार कर दिल्ली में बाबर के दरबार में पेश किया तो उन्हें फांसी की सजा सुना दी गई।
- वीर मोहन सिंह को मृत्यु और इस्लाम में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया गया। भारत की महान क्षत्रिय परंपराओं का निर्वहन करते हुए मोहन सिंह ने मौत को चुना।
- मुगलों ने बाबर की मौजूदगी में उनका शरीर आधे से अधिक जमीन में गाड़कर सिर को तीरों से छलनी कर दिया।
- सिद्धांतों से समझौता कर लेना जैसे मोहन सिंह को मंजूर नहीं था नई पीढ़ी को भी देश और धर्म के मामले में उतनी ही मजबूती और प्रखरता के साथ डटे रहने का संकल्प लेना होगा।
- पूर्व विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेत्री रेखा राणा ने इस अवसर पर कहा कि हमें अपने महान पूर्वजों के पराक्रम और बलिदान का न केवल एहसास होना चाहिए बल्कि उस पर गर्व भी होना चाहिए।
- वरिष्ठ कांग्रेस नेता वीरेंद्र सिंह राठौर ने भी इस अवसर पर शहीदों और योद्धाओं की यादगार को स्थाई बनाए जाने की वकालत की।
- इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजक सूर्यप्रताप सिंह, प्रशांत राणा, रवि राणा, मोहर सिंह राणा, सचिन राणा, मोहन सिंह राणा, मुख्य वक्ता राजबीर आर्य, वीरेंद्र राठौर, विक्रम सिंह राणा और महिपाल राणा मौजूद रहे।

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