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आज से लागू होगा ई-वे बिल, फरवरी में शुरू करने पर वेबसाइट हुई थी हैंग

एक फरवरी को लागू हुई ई-वे बिल की व्यवस्था कुछ ही घंटों में बंद हो गई थी। लेकिन गुड्स एवं सर्विसेस टैक्स विभाग का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:20 AM IST

आज से लागू होगा ई-वे बिल, फरवरी में शुरू करने पर वेबसाइट हुई थी हैंग
एक फरवरी को लागू हुई ई-वे बिल की व्यवस्था कुछ ही घंटों में बंद हो गई थी। लेकिन गुड्स एवं सर्विसेस टैक्स विभाग का दावा है कि अब दिक्कतों को दूर कर दिया है। जिसके बाद एक अप्रैल से फिर से ई-वे बिल को लागू किया जा रहा है। इस बार मुख्य बात यह है कि हरियाणा से दूसरे राज्य में माल ले जाने और दूसरे राज्यों से हरियाणा में माल आने पर ही ई-वे बिल लागू होगा। राज्य के अंदर माल की आवाजाही में ई-वे बिल को बाद में लागू किया जाएगा। पिछली बार विभाग से सबसे बड़ी गलती यही हुई थी कि इंटरस्टेट और इंट्रास्टेट दोनों के लिए ही इसे एक साथ लागू कर दिया गया था। व्यापारियों के अनुसार उनकी ई-वे बिल को लेकर चली आ रही दिक्कतें अभी भी दूर नहीं हुई हैं, लेकिन विभाग का कहना है कि पहले के मुकाबले व्यापारियों में ई-वे बिल की स्वीकार्यता बढ़ी है।

इस बार केवल इंटर स्टेट की गई शुरुआत

राज्य में माल लाने और ले जाने में ई-वे बिल को बाद में लागू किया जाएगा

टैक्स कार्यालय या चेक पोस्ट पर रुकने की नहीं रहेगी जरूरत

अब करदाताओं और ट्रांसपोर्टरों को किसी भी टैक्स कार्यालय या चेक पोस्ट पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि ई-वे बिल इलेक्ट्रॉनिक रूप से तैयार किया जा सकता है। इसमें खुद से पैसे कट जाएंगे। बड़े उपयोगकर्ता ई-वे बिल की नई प्रणाली को पोर्टल पर मोबाइल एप, एसएमएस और ऑफलाइन टूल के जरिए उपयोग कर सकते हैं। अभी स्थिति यह थी कि कारोबारी अपने माले की कनसाइनमेंट राज्य के भीतर या राज्य से बाहर भेजता है, तो कई बार केंद्रीय व राज्य सरकारों के अधीनस्थ सेल्स टैक्स, एक्साइज टैक्स इत्यादि विभाग के अफसर व निरीक्षक रोक लेते थे। अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि अब अगर अफसर ने माल लदे वाहन को आधे घंटे से ज्यादा रोका तो उसे जवाब देना होगा। अफसर को ऑनलाइन डिटेनशन आॅर्डर देकर बताना होगा कि उसने संबंधी कनसाइनमेंट (माल से लदा वाहन) क्यों रोका, उसके बाद उसने क्या दस्तावेज चेक किए, कब तक अपनी तफ्तीश जारी रखी, उस तफ्तीश का नतीजा क्या निकला, कोई अनियमितता सामने आई तो क्या उसने क्या कार्रवाई की? इस सिस्टम से कनसाइनमेंट की सारी मूवमेंट जीएसटीएन पोर्टल की निगरानी में रहेगी।

व्यापारियों की ये दिक्कत

व्यापारियों का कहना है कि 24 घंटे में सौ किलोमीटर की दूरी तय करने की बाध्यता है। ई-वे जनरेट करने के सभी साधनों की जानकारी नहीं है। कई व्यापारी कंप्यूटर और इंटरनेट से परिचित नहीं हैं। ट्रांसपोर्टेशन वाहन बदलने के साथ ही ई-वे बिल को अपडेट करना। ट्रक खराब होने या कहीं फंस जाने पर भी ई-वे बिल को अपडेट करना। ई-वे बिल के लिए माल की कीमत महज 50 हजार रुपए ही रखा जाना बड़ी समस्याएं हैं।

परेशानियों के समाधान के लिए व्यापारियों के साथ करेंगे बैठक

डीईटीसी वीके बेनीवाल का कहना है कि व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों से मीटिंग करेंगे और उन्हें ई-वे बिल का उपयोग करने के बारे में फिर से जानकारी देंगे। इसके साथ ही अगर किसी व्यापारी या ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल संबंधी समस्या है तो विभाग में आकर अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है। इस बार कुछ बदलाव किए गए हैं फिर भी व्यापारियों की परेशानियों के समाधान के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

ये बातें हैं जरूरी

अब राज्य में बाहर से माल मंगाना व भेजना ऑनलाइन ई-वे बिल से ही संभव हो पाएगा।

इसमें आपूर्तिकर्ता व प्राप्तकर्ता व्यापारी के साथ ट्रांसपोर्टरों को ई-वे बिल जनरेटर करना होगा।

ऑनलाइन ही सामान का कोड, जीएसटीएन नंबर, वाहन नंबर आदि जानकारी देनी होगी।

टैक्स चोरी रोकने के लिए राज्य कर विभाग के अधिकारी चेक पोस्टों पर बिल और माल की चेकिंग करेंगे।

यदि कोई व्यापारी व ट्रांसपोर्टर बिना ई वे बिल के माल ट्रांसपोर्ट करता है तो उसके खिलाफ भारी जुर्माने का प्रावधान है।

कनसाइनमेंट के लिए 100 किमी तक ई-वे बिल की वैधता एक दिन, 300 किमी के लिए तीन दिन, 500 किमी के लिए पांच दिन, 1000 किमी के लिए दस दिन और 1000 किमी से अधिक के लिए 15 दिन तक रहेगी।

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