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‘इंसान इतना आगे बढ़ गया, इंसानियत पीछे छूटने लगी’

एसडी पीजी कॉलेज में संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार द्वारा हिंदी के प्रसिद्ध रचनाकार जगदीश चंद्र माथुर पर शनिवार को...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 03:20 AM IST
‘इंसान इतना आगे बढ़ गया, इंसानियत पीछे छूटने लगी’
एसडी पीजी कॉलेज में संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार द्वारा हिंदी के प्रसिद्ध रचनाकार जगदीश चंद्र माथुर पर शनिवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय विमर्श एवं गोष्ठी के आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि समीर माथुर पूर्व आईएएस एवं वर्तमान में सूचना आयुक्त, डीसी सुमेधा कटारिया, देवेन्द्र राज अंकुर निदेशक नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा दिल्ली, अमरिंदर कौर, प्रबंध निदेशक वन विकास निगम हरियाणा सरकार, रवि तनेजा प्रख्यात रंगकर्मी, प्रताप सहगल पूर्व एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दिल्ली, द्वारका प्रसाद संपादक अनभय सांचा, हरिवंश राय कहानीकार और प्रेम तिवारी रहे।

विचार गोष्ठी

एसडी पीजी कॉलेज में हिंदी के रचनाकार जगदीश चंद्र माथुर पर एक दिवसीय राष्ट्रीय विमर्श

पानीपत. राष्ट्रीय विमर्श में अपने विचार रखते नाटककार देवेन्द्र राज अंकुर।

वर्तमान में बुरे लोगों का हौसला बढ़ रहा : डीसी

डीसी सुमेधा कटारिया ने कहा कि पानीपत के कलाकार यहां के बुनकर हैं। उनसे भी साहित्य को गति ही मिली है। वर्तमान में बुरे लोगों का हौसला बढ़ रहा है, जबकि मजबूत और सकारात्मक सोच वाले लोग सोये हुए हैं। अमरिंदर कौर ने कहा कि साहित्यकारों के होने से पर्यावरण बचाने का काम आसान हो जाता है। देवेन्द्र राज ने कहा कि अपने विचारों और मूल्यों में जगदीश माथुर ग्रामीण और नगरीय, लोक और शास्त्रीय संस्कारों एवं परंपराओं के समन्वय के पक्षधर थे। प्रताप सहगल ने कहा कि युवा नशे से दूर रहकर देश की सेवा करनी चाहिए।

पानीपत. एसडी पीजी कॉलेज में कार्यक्रम में नाटक की प्रस्तुति देते कलाकार।

शिक्षा बचाओ आंदोलन की भी आवश्यकता

प्रसिद्ध रचनाकार जगदीशचंद्र माथुर के पुत्र समीर माथुर ने कहा कि मेरे पिता जगदीश चन्द्र खाली समय में प्रसिद्ध लेखकों और कवियों के साथ साहित्यिक विचार-विमर्श करना पसंद करते थे। द्वारका प्रसाद ने कहा कि जिस इंसान का साहित्य, कला और संगीत से लगाव नहीं है वह पशु सामान है। प्रेम तिवारी ने कहा कि आज शिक्षा बचाओ आंदोलन की भी आवश्यकता है। इंसान इतना आगे बढ़ गया कि इंसानियत पीछे छूटने लगी है। इस मौके पर प्रिंसिपल डॉ. अनुपम अरोड़ा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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