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सही प्लानिंग व समय पर बिलिंग से पहली बार डी प्लान का पूरा बजट खर्च

प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद इस वर्ष पहली बार जिले के अधिकारियों ने डी प्लान के तहत आए बजट को पूरा खर्च कर...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:35 AM IST
प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद इस वर्ष पहली बार जिले के अधिकारियों ने डी प्लान के तहत आए बजट को पूरा खर्च कर दिया। पिछले वर्षों से हर बार डी प्लान के तहत आने वाला पैसा लैप्स हो जाता था। इस बार एडीसी राजीव मेहता ने खुद इसकी जिम्मेदारी संभाली और अधिकारियों के साथ मीटिंग करते रहे। कार्यों की सही प्लानिंग की गई और उसके बाद तय समय में विकास कार्य करवाए गए। इस सब के चलते वित्त वर्ष 2017-18 में जिले के अधिकारियों को अपना सारा बजट खर्च करने में कामयाबी मिली है। इस बार 290 कार्य पंचायती राज एक्सईएन के माध्यम से, 114 विकास कार्य नगर निगम पानीपत से और 12 कार्य समालखा पालिका के माध्यम से करवाए गए।

टीम वर्क से मिली कामयाबी, प्लानिंग को लेकर लगातार की गईं बैठकें

एडीसी राजीव मेहता और जिला प्लानिंग अधिकारी जोगेंद्र लठवाल।

17.20 करोड़ रुपए में करवाए 416 विकास कार्य

वित्त वर्ष 2017-18 के लिए डी प्लान योजना में जिले को कुल 17.22 करोड़ रुपए का बजट मिला था। जिसमें से 17.20 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए हैं। इन सभी के बिल भी ट्रेजरी के माध्यम से पास हो चुके हैं। इस बार आई इस राशि से इस वित्त वर्ष में कुल 416 विकास कार्य करवाए गए हैं।

जिला प्लानिंग ऑफिसर जोगेंद्र लठवाल ने बताया कि बजट पूरा खर्च करने में टीम वर्क के चलते ही कामयाबी मिली है। एडीसी राजीव मेहता ने जो प्लानिंग बनाई और लगातार बैठकें की गईं, उससे कार्यों की सूची जल्द फाइनल होती रही। हमारी टीम में खुद उन्होंने और उनके असिस्टेंट प्लानिंग ऑफिसर जय सिंह ने भी तय कार्यों को शुरू करवाने में कोई देरी नहीं होने दी। जैसे ही कार्य पूरे होकर आए तो हमने उनकी जांच करके बिल जल्द से जल्द ट्रेजरी में भिजवा कर उन्हें पास करवाया। हमें सरकार ने जिम्मेदारी दी है कि हम बजट को सही समय और सही जगह खर्च करें। लेकिन जब यह खर्च नहीं होता था तो उसका जिले को काफी नुकसान होता था। अब जिले को नए वित्त वर्ष में बड़ा बजट मिलने की उम्मीद है।

पिछले वर्ष करीब 12 करोड़ रुपए लैप्स हुए थे

सही प्लानिंग से कार्य करवाने का फायदा यह हुआ कि इस बार डी प्लान का पूरा बजट खर्च हो गया। नहीं तो हर बार इसका पैसा लैप्स होता था। पिछले वर्ष भी करीब 12 करोड़ रुपए लैप्स हो गए थे। जो पैसे लैप्स हो जाते हैं वो सरकार के खाते में वापस चले जाते हैं। सरकार उन्हीं को अगले साल के लिए दोबारा भेज देती है।

अन्य वर्षों की तुलना में ये रहा अंतर

डी प्लान के बजट से कार्य करवाने के लिए इसके चेयरमैन और जिले के सभी विधायकों की बैठक होना जरूरी होती है। जिसमें इसकी कमेटी के सदस्य भी होते हैं। इसी बैठक में विकास कार्यों को तय किया जाता है। हर बार इन मीटिंगों में देरी होती रही और बैठक होती भी तो उनमें कार्य फाइनल नहीं हो पाते थे। इस बार लगातार बैठकें करवाई गईं और उनमें विकास कार्य फाइनल करवाए। काम फाइनल करने से पहले ही एडीसी खुद उसकी फिजिब्लिटी जांचते थे। कार्यों का समय तय किया गया और इस बार काम पूरा होते ही तुरंत बिल भेजे गए। पहले यह व्यवस्था नहीं थी और बिल आने में ही कई महीनों का समय लगता था।