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मोबाइल जीवन का हिस्सा है जीवन नहीं : पं. राधे राधे

मनुष्य भोगों को नहीं भोगता अपितु भोग ही मनुष्य को भोग लेता है। कलयुगी जीवन में मनुष्य बहुत आलसी और लालची हो गया है।...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:40 AM IST
मनुष्य भोगों को नहीं भोगता अपितु भोग ही मनुष्य को भोग लेता है। कलयुगी जीवन में मनुष्य बहुत आलसी और लालची हो गया है। मनुष्य अपने जीवन में मोबाइल, लैपटॉप व कंप्यूटर को जिंदगी मान बैठा है। ये वस्तुएं हमारी जिंदगी नहीं बल्कि जीवन का एक हिस्सा हैं। यह बातें कुटानी रोड स्थित श्री अवध धाम मंदिर में श्रीमद्‌भागवत कथा महापुराण दूसरे दिन कथा व्यास पं राधे-राधे ने कही। आचरण ही मनुष्य की व्यक्तित्व की संपूर्ण परिभाषा को दर्शाता है। परिवार के साथ खुशी बांटना सीखें। इस अवसर पर शशि भाटिया, लीला कृष्ण भाटिया, ओम प्रकाश, रमेश चोपड़ा, राधे श्याम माटा, नीटू मिगलानी, राजेंद्र सेन गर्ग, नितिन सिंगला, डाॅ. रमेश चुघ, मोहनालाल, विनोद, नवीन वधवा, विरेंदर गुप्ता व अनिल शर्मा मौजूद रहे।

प्रवचन करते पं. राधे-राधे।