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परंपरागत खेती के साथ-साथ मधुमक्खी-मछली पालन, पाेल्ट्री, डेयरी जैसे व्यवसाय भी अपनाएं

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय कृषि मेला (खरीफ) -2018 बुधवार को संपन्न हुआ। मेले...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:05 AM IST
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय कृषि मेला (खरीफ) -2018 बुधवार को संपन्न हुआ। मेले के दूसरे दिन भी किसानों की गहमा-गहमी बनी रही। मेले में हरियाणा के अतिरिक्त पड़ोसी राज्यों पंजाब, राजस्थान, दिल्ली से किसानों ने भाग लिया। यह पहला अवसर है जब नेपाल के किसानों ने शामिल होकर इस मेले की शोभा बढ़ाई।

समापन समारोह में विश्वविद्यालय के कृषि काॅलेज के डीन डॉ. के.एस. ग्रेवाल मुख्य अतिथि थे। उन्होंने उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपनी आय को दोगुणा करने के लिए परंपरागत खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, मछली पालन, पोल्ट्री, मशरूम उत्पादन, फल, फूल व सब्जी उत्पादन, डेयरी जैसे व्यवसायों को भी अपनाएं। इस अवसर पर उन्होंने उत्तम नस्ल के सांडों रुस्तम, राजा एवं बीरू के मालिकों को सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि रुस्तम के मालिक को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सम्मानित कर चुके हैं। उन्होंने मेले में स्टॉल लगाने वाले 6 प्रगतिशील किसानों जिनमें पवन मधु फार्म, एकता हनी फार्म, सुप्रीम पिक्कल, राम कुमार खरब, अजय कुमार व सतीश कुमार को सम्मानित किया।

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विवि. द्वारा आयोजित कृिष मेले में सम्मानित किसान।

दोनों दिन करीब 44 हजार किसानों ने दर्ज कराई उपस्थिति

मेले के संयोजक एवं विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एस. हुड्डा के अनुसार मेले के दोनों दिन करीब 44 हजार किसानों की उपस्थिति दर्ज की गई। उन्होंने करीब 21 लाख 60 हजार रुपए के खरीफ फसलों व सब्जियों की उन्नत व सिफारिशशुदा किस्मों के प्रमाणित बीज एवं बायोफर्टिलाइजर तथा करीब 19 हज़ार रूपए के फल वाले पौधे खरीदे। इस प्रदर्शनी में 220 से अधिक स्टॉल लगाए गए थे।

2022 तक किसानों की आय दोगुना करना मेले का उद्देश्य

मेला अधिकारी एवं संयुक्त निदेशक विस्तार डॉ. कृष्ण यादव ने बताया कि यह मेला वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। खेती के कार्यों में कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने तथा कृषि संयंत्रों के समुचित उपयोग के लिए मेले में कृषि-औद्योगिक प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें भारी संख्या में कृषि मशीनें व यन्त्र बनाने वाली कंपनियों ने हिस्सा लिया।