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दहेज संबंधी घोषणा की सूचना लेना नाराज पत्नी का हक : राज्य सूचना आयोग

राज्य सूचना आयोग ने एक मामले में यह फैसला देते हुए कहा है कि पत्नी तृतीय पक्ष नहीं बल्कि आवश्यक पक्षकार होनी चाहती।

Danik Bhaskar | Nov 18, 2017, 04:53 AM IST

चंडीगढ़/पानीपत। शादी के समय दहेज न लेने संबंधी सरकारी कर्मचारी की ओर से विभाग में जमा कराए गए घोषणा-पत्र की आरटीआई में सूचना लेना नाराज पत्नी का संवैधानिक हक है। तृतीय पक्ष मानकर उसे इस तरह की सूचना दिए जाने से मना नहीं किया जा सकता। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने एक मामले में यह फैसला देते हुए कहा है कि पत्नी तृतीय पक्ष नहीं बल्कि आवश्यक पक्षकार होनी चाहिए। क्योंकि ऐसी सूचना उसके जीवन से जुड़ी होती हैं।


आयोग ने कहा कि वैधानिक रूप से तलाक होने तक किसी भी कर्मचारी के मामले में पत्नी को इस तरह की सूचनाएं लेने से नहीं रोका जा सकता। दरअसल नियमानुसार सरकारी कर्मचारियों को अपने विभाग में एक घोषणा-पत्र जमा कराना होता है। जिसमें उसके द्वारा शादी में दहेज न लेने का उल्लेख होता है।


ऐसे ही एक मामले में पारिवारिक विवाद होने पर विवाहित ने आबकारी एवं कराधान विभाग से पति की ओर से जमा कराए गए दहेज संबंधी घोषणा पत्र की आरटीआई में जानकारी मांगी थी। विभाग ने पत्नी को तृतीय पक्ष बताते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था। आयोग ने आबकारी एवं कराधान समेत सभी विभागों के सूचना अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे हरियाणा सिविल सेवाएं (हरियाणा कर्मचारी कंडक्ट) नियम-2016 की धारा 18 (2) के प्रावधानों का पालन ठीक तरह से करें।


राज्य सूचना आयोग ने मुख्य सचिव को सिफारिश भेजकर आग्रह किया है कि वे डेढ़ महीने में इस संबंध में सभी कार्यालयों को नए सिरे से दिशा-निर्देश जारी करें। इनमें स्पष्ट हो कि नए भर्ती हो रहे सभी कर्मचारियों से इस तरह का घोषणा-पत्र आवश्यक रूप से लिया जाना चाहिए कि वे विवाह के समय दहेज बिल्कुल नहीं लेंगे। अगर किसी मामले में इसका उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।