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कमाई के लिए वन विभाग काट रहा 56% हरे पेड़, 4 साल पहले लगाए पौधों में 20 फीसदी भी नहीं बचे

मनोज कुमार | Last Modified - Nov 27, 2017, 04:32 AM IST

हरियाणा में पराली जलाने से बढ़े प्रदूषण को लेकर मुख्यमंत्री स्तर तक बैठकें हो रही हैं।
कमाई के लिए वन विभाग काट रहा 56% हरे पेड़,  4 साल पहले लगाए पौधों में 20 फीसदी भी नहीं बचे

पानीपत.हरियाणा में पराली जलाने से बढ़े प्रदूषण को लेकर मुख्यमंत्री स्तर तक बैठकें हो रही हैं। हरियाणा सरकार भी प्रदूषण रोकने के लिए कई कदम उठाने का दावा कर रही है लेकिन इसके लिए सबसे अहम पेड़ों की तरफ न सरकार का ध्यान है और न ही वन विभाग का। विभाग अपनी कमाई के लिए लगातार पेड़ों की कटाई कर रहा है तो नए लगाए जाने वाले पौधे पेड़ बनने से पहले दम तोड़ रहे हैं। बात यदि पिछले पांच साल की करें तो 3,42,976 घन मीटर पेड़ों की कटाई की गई है। इनमें 1,91,250 घन मीटर पेड़ हरे थे।

यह कुल पेड़ों का 56 फीसदी है। जबकि 1,51,726 घन मीटर पेड़ सूखे थे। अवैध कटाई भी काफी हो रही है। जिसमें महकमे के कुछ कर्मचारी भी शामिल होते हैं। कहीं कागजों में ही पौधे लगे दिखाए गए हैं तो कहीं इस तरह पौधे लगा दिए कि वह पेड़ नहीं बन सकते। कहीं लगाए गए पौधों को पानी नहीं मिल रहा तो यमुनानगर जैसे इलाकों में पौधे जलभराव से नष्ट हो रहे हैं। यह खुलासा विभाग की ही इंटर्नल इन्क्वॉयरी में हुआ है।


रिपोर्ट के अनुसार हर साल नए पौधे लगाने पर 150 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होता है बावजूद इसके पौधे पेड़ नहीं बन पा रहे। जैसे-जैसे समय गुजरता है, पौधे नष्ट होते जा रहे हैं। वन विभाग की ओर से 2013-14 से 2016 चार साल में लगे पौधों की मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार कई जगह ऐसी हैं, जहां 2013-2014 में लगे पौधों में औसत 2 से 20 फीसदी पौधे ही जीिवत हालत में मिले हैं। हाल यह है कि 2016-2017 में लगाए गए पौधों में भी कई साइटों पर 10 से 76 पौधे मृत पाए गए है। राष्ट्रीय वन नीति-1988 के तहत देश में कम से 33 फीसदी क्षेत्र में वन एवं वृक्षावरण होना चाहिए। हरियाणा सरकार ने 2006 में अपनी अलग वन नीति तैयार की और वन एवं वृक्षावरण क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 20 फीसदी का लक्ष्य रखा। लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ। 3.95 फीसदी एरिया में ही वन है। पेड़ों से कवर एरिया सिर्फ 6.65 फीसदी तक पहुंचा है। जबकि वन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र में 2487 वन कमेटियां भी बनाई हुई है।

अवैध कटाई के 38 हजार केस, 73 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई

प्रदेश में पेड़ों की अवैध कटाई भी कम नहीं है। पांच साल के आंकड़ों पर गौर करें तो विभाग ने अवैध रूप से पेड़ कटाई के 38, 570 केस दर्ज किए। यानी यह तो ऑन रिकॉर्ड है। ऐसे मामलों की कोई गिनती नहीं है जो चोरी-छिपे किए जा रहे हैं। विभाग ने साल भर में 73 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की, जिनमें 15 वन दरोगा और 32 वन रक्षक हैं, जिनकी सीधी जिम्मेदारी ही पेड़ों की सुरक्षा करना है।

जिन पौधों को लगाने के वक्त महोत्सव मनाया, उनमें भी एक साल में 88 हजार नष्ट

वन विभाग की ओर से 2015-16 में हर जिले में महोत्सव मनाकर 3,86,759 पौधे लगाए, लेकिन जब कुछ समय बाद इनका निरीक्षण किया गया तो वहां 2,99,173 पौधे ही खड़े मिले। यानी करीब 88 हजार पौधे नष्ट हो चुके थे। इन पौधों को लगाते वक्त मंत्री से लेकर गांव के सरपंच तक ने कार्यक्रम में शिरकत की, लेकिन बाद में पौधों की तरफ ध्यान नहीं दिया।

सीधी बात

Q वन विभाग जो पौधे लगा रहा है, समय बीतने के साथ वह नष्ट हो रहे हैं।
A मेरे सामने ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है।
Q विभाग की रिपोर्ट में ही यह सामने आया है। आप क्या करेंगे?
A मैंने अधिकारियों से पहले भी कहा है कि ज्यादा पौधे लगाने की बजाए इतने पौधे लगाएं कि उनकी देखभाल हो सके।
Q तो क्या ऐसे ही चलता रहेगा।
A नहीं। ऐसा बिल्कुल नहीं चलेगा। प्रयास होगा कि पौधों के पालन-पोषण पर ज्यादा पैसा खर्च हो। मैं जल्द ही सीएम के साथ अधिकारियों की मीटिंग कराउंगा। आगे से बेहतर रिजल्ट देखने को मिलेंगे।

वन मंत्री का गृह जिला गुड़गांव पौधे बचाने में सबसे पीछे

वन मंत्री राव नरबीर सिंह का गृह जिला गुड़गांव लगाए गए पौधों को बचाने में सबसे पीछे हैं। 2017-18 की निरीक्षण रिपोर्ट में यहां पिछले चार-पांच सालों में लगाए गए पौधों में मात्र 40 फीसदी ही जीवित मिले हैं। यहां निरीक्षण अधिकारियों ने 1,01,235 पौधों का निरीक्षण किया, इनमें 40,003 पौधे ही खड़े मिले। इसी प्रकार 2016-17 में निरीक्षण में यहां 49 फीसदी पौधे जीवित मिले थे, लेकिन यह भी अन्य जिलों के मुकाबले सबसे कम था।

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Web Title: kmaaee ke liye vn vibhaaga kat raha 56% hare peड़, 4 saal pehle lgaaae paudhon mein 20 fisdi bhi nahi bche
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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