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ट्रांजिट रेल के लिए NHAI और NCRTC तलाशेंगी संभावनाएं

(रेपिड रेल प्रोजेक्ट)की परिकल्पना पर आधारित दिल्ली-सोनीपत-पानीपत रेल कॉरीडोर को जमीनी स्तर पर लाने केलिएकार्य शुरू हो गय

बृजेश तिवारी | Last Modified - Nov 07, 2017, 04:49 AM IST

ट्रांजिट रेल के लिए NHAI और NCRTC तलाशेंगी संभावनाएं
सोनीपत.नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (रेपिड रेल प्रोजेक्ट) की परिकल्पना पर आधारित दिल्ली-सोनीपत-पानीपत रेल कॉरीडोर को जमीनी स्तर पर लाने के लिए कार्य शुरू हो गया है। लंबे समय से एनएचएआई द्वारा अनुमति नहीं मिलने के कारण प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में था। कुछ दिन पूर्व ही एनएचएआई के चेयरमैन ने एनएच-1 पर कॉरीडोर को हरी झंडी दे दी।

इसके बाद संयुक्त रूप से एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें कारपोरेशन और एनएच के इंजीनियर संभावनाओं को तलाश रहे हैं। इसमें सबसे मेजर कार्य जहां पर ब्रिज और अंडरपास है, उन स्थानों से रेल को कैसे गुजारा जाए, इसके लिए कार्य किया जा रहा है। 111 किलोमीटर के इस कॉरीडोर में मुख्य रूप से 12 स्टेशन बनाया जाना प्रस्तावित है। ट्रेन की स्पीड 160 किलोमीटर प्रतिघंटा है, लेकिन औसत स्पीड 100 किमी रहेगी।
मेट्रो रेल से तीन गुना तेज होगी
ट्रांजिट रेल की डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रतिघंटा है। ऑपरेशन की गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा है जबकि औसत स्पीड रुकने और चलने पर 100 किमी प्रति घंटा है। वहीं दिल्ली मेट्रो की डिजाइन स्पीड 90 किमी प्रति घंटा है। आपरेशन स्पीड 80 किमी है जबकि औसत स्पीड 32 किमी प्रतिघंटा है। ट्रांजिट रेल 100 किलोमीटर का सफर एक घंटे में तय करेगी जबकि मेट्रो को 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में तीन घंटे का समय लगता है।

परियोजना का उद्देश्य कम समय में लोगों को बेहतर सुविधा देना
परियोजना का उद्देश्य एनसीआर में तेजी से बढ़ रहे प्रदूषण पर रोक लगाना है। एनएच-1 से हर दिन आठ घंटे में करीब 16 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। इससे भारी प्रदूषण होता है। समय भी अधिक जाया होता है। इस वजह से परेशानी का सामना करना पड़ता है।
दिल्ली में अंडरग्राउंड, बाहर ऊपर से दौड़ेगी ट्रेन
दिल्ली में आईएसबीटी से यह सुरंग में दौड़ेगी। दो किलोमीटर के टनल के बाद यह जमीन के ऊपर आ जाएगी। जिसके बाद पानीपत तक 109 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन जमीन के ऊपर तय करेगी।
69 मिनट में तय होगी दूरी
ट्रांजिट रेल की औसत स्पीड 100 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। दिल्ली से पानीपत की दूरी 111 किलोमीटर है। जिसे तय करने के लिए इस रेल को 69 मिनट का समय लगेगा। अभी कार और वाहनों से यह समय करीब अढ़ाई से तीन घंटे लगता है। करीब डेढ़ घंटा पहले पहुंचा जा सकेगा, जबकि दिल्ली से सोनीपत महज 32 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।
हर 6 मिनट में मिलेगी ट्रेन
अधिकारियों के मुताबिक कुल 12 स्टेशन अभी तक डिजाइन किए गए हैं। लेकिन इस डीपीआर में सुधार होगा। इसके बाद स्टेशनों की संख्या घट बढ़ सकती है। हर 10 किलोमीटर पर स्टेशन बनाया जा सकता है। ट्रेनों की हर छह मिनट में फ्रिक्वेंसी रखी जाएगी। एक घंटे में करीब 10 ट्रेनों का आवागमन होगा।
सर्विस रोड पर बनाए जाएंगे पिलर
एनएचएआई से मिली परमिशन के बाद एनएच-1 के सर्विस रोड पर तीन से चार मीटर मोटा पिलर खड़ा जाएगा। जिसके ऊपर मेट्रो की तर्ज पर स्लैब के माध्यम से ट्रैक बिछाया जाएगा। आवश्कतानुसार जमीन से ऊपर ही प्लेटफार्म और अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी। एनसीआरटीसी का प्रयास है कि परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की भूमिका से नहीं गुजरना पड़े। जिसके लिए समन्वय कमेटी संयुक्त रूप से सर्वे कर रिपोर्ट सौंपेगी।
इंजीनियर की संयुक्त कमेटी सर्वे रिपोर्ट सौंपेगी : शर्मा
नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया से एनएच-1 पर कंस्ट्रक्शन की परमिशन मिलने के बाद ज्वाइंट तौर पर कमेटी बनाई गई है। जिसमें मुख्य रूप से ब्रिज और अंडरब्रिज से ट्रेन को कैसे निकाला जाए, इस दिशा में अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिसके बाद रिवाइज डीपीआर तैयार कर सौंपी दी जाएगी। -सुधीर शर्मा, सीपीआरओ एनसीआरटीसी नई दिल्ली।
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