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शहरों में एक वर्ष में 18600 बेसहारा पशु गोशालाओं में भेजे, ग्रामीणों ने 9 हजार से ज्यादा फिर छोड़

Bhaskar news | Last Modified - Nov 06, 2017, 06:37 AM IST

हरियाणा में शहरी क्षेत्र की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है।
शहरों में एक वर्ष में 18600 बेसहारा पशु गोशालाओं में भेजे, ग्रामीणों ने 9 हजार से ज्यादा फिर छोड़
पानीपत।हरियाणा में शहरी क्षेत्र की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है। नगर निगम और निकायों के औपचारिक और अनौपचारिक तमाम प्रयास के बाद भी सड़काें पर बेसहारा पशु घूम रहे हैं। जो आए दिन हादसों के कारण तो बन रहे हैं। निगम और निकायों के रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश भर के विभिन्न शहरों से पिछले एक साल में 18600 बेसहारा पशु पकड़े गए। उन्हें गांव तथा शहरों की गोशालाओं और नंदीशालाओं में छोड़ा गया। लेकिन शहर के डेरी संचालक और ग्रामीण फिर नए गोवंशों और दूध न देने वाली गायों को शहरों की ओर छोड़ दे रहे हैं। हालात यह है कि जितने पशु अभी पकड़े गए हैं लगभग उसके आधे यानी 9 हजार के आसपास शहर की सड़कों पर घूम रहे हैं। जबकि सरकार हरियाणा को आवारा पशु मुक्त राज्य घोषित करने की तैयारी कर रही है।

राज्य में बेसहारा पशुओं की समस्या इस कदर बढ़ती जा रही है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को मदद के लिए पड़ोसी राज्यों को चिट्‌ठी तक लिखनी पड़ गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है और उनसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की तरह ही आवारा पशुओं की समस्या से निजात के लिए मदद मांगी है।
सरकार का मानना है कि पड़ोसी राज्यों के सीमवर्ती जिलों से बेसहारा पशु हरियाणा में प्रवेश कर जाते हैं। इसके लिए कहीं न कहीं उन इलाकों के लोग ही जिम्मेदार हैं, जिन पर वहां की सरकार और प्रशासन ही नियंत्रण लगा सकता है। इसी तरह हरियाणा में भी पड़ोसी जिले एक दूसरे के क्षेत्रों में बेसहारा पशु छोड़ रहे हैं। इन सब के बावजूद सरकार अगले एक दो माह में प्रदेश को बेसहारा पशु मुक्त राज्य घोषित करने की तैयारी कर रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि बेसहारा पशुओं की समस्या को लेकर हाल ही में थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (तीसरे पक्ष से सत्यापन) कराया है। आवारा पशुओं की 95 फीसदी समस्या शहरों से खत्म हो चुकी है। अब केवल 5 प्रतिशत पशु ही शहर की सड़कोंं पर नजर आते हैं। इनमें सोनीपत और भिवानी में सर्वाधिक 400 से 500 पशु सड़कों पर हैं। जबकि 7-8 अन्य जिले ऐसे हैं, जहां 50 से 100 तक पशु सड़कों पर हैं। इससे पहले राज्य में करीब 1.50 लाख गाय-भैंस ऐसे थे, जो सड़कों पर घूमते थे। इनमें से ज्यादातर को नंदीशाला और गौशालाओं में पहुंचाया है। जबकि हकीकत यह है कि अभी भी 9 हजार से ज्यादा बेसहारा पशु सड़कों पर घूम रहे।
सभी पशुओं की नहीं होती टैगिंग
प्रदेश भर में पकड़े जा रहे बेसहारा गोवंश और गोशालाओं में रखे गए सभी गोवंश की आज तक टैगिंग नहीं कराई गई है। निगम, पालिका कर्मचारी सड़क से गोवंश पकड़कर गोशालाओं में छोड़ते हैं, रात में गोशाला संचालक दोबारा उनमें से कुछ को सड़कों पर छोड़ देते हैं। ऐसे में हालात जस के तस ही बने रहते हैं।
गांवों से शहरों में छोड़े जा रहे पशु
गांव में जब तक गायें दूध देती रहती हैं, तब तक ग्रामीण उन्हें चारा आदि देते हैं। जब वह दूध देना बंद कर देती हैं तो उन्हें शहरों की ओर छोड़ दिया जाता है। इनके साथ इनके बछड़े भी होते हैं। यही नहीं पड़ोसी जिलों से भी गोवंश एक दूसरे जिले मेें छोड़े जाते हैं। प्रशासन और हरियाणा गोसेवा आयोग के अध्यक्ष की भी यह दलील दे चुके हैं। पर इसके लिए कोई स्थाई समाधान नहीं किया है।
पशु छोड़ने वालों पर कार्रवाई नहीं
शहर और गांव से कोई भी बेसहारा पशु छोड़ता है तो उस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। यदि किसी की दूध देने वाली गाय पकड़ ली जाती है तो उसके पालक छुड़वाने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाते हैं। ऐसे में निगम उन्हें कार्रवाई की चेतावनी देकर छोड़ देता रहा है। वहीं, एक बार गोवंश पकड़कर गोशालाओं या गांवों की ओर छोड़ने के बाद उनकी कोई मॉनीटरिंग नहीं की जाती है।
प्रदेश में पशुओं के मेले हो रहे बंद
रोहतक, जींद, हिसार, झज्जर आदि जिलों में गोवंशों की बिक्री के लिए मेला लगा करता था। यहां से हरियाणा अथवा अन्य राज्यों के किसान उम्दा किस्म के बैल खेती के लिए खरीदकर ले जाया करते थे। इसके अलावा भी कुछ अन्य लोग गोवंशों को खरीदते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह मेले बंद हो गए हैँ। हरियाणा से गोवंश की बिक्री लगभग बंद सी हो गई है।
दलील: अभियान चलाने वालों की
रोहतक के डीटीपी नगर निगम के अनुसार गोवंश लिफ्टिंग का अभियान समय समय पर चलाया जाता रहा है। पकड़े गए गोवंश गोशालाओं को सुपुर्द किए जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिन बाद दोबारा से गोवंश सड़़क पर होते हैं। इसमें टैगिंग वाले भी गोवंश रहते हैं। ग्रामीण इलाकों से भी गोवंश का शहर की ओर छोड़ा जाना इसका बड़ा कारण है।
जरूरत: हर गांव में बने गऊग्राम
एक्सपर्ट व्यू: आवारा पशुओं के स्थाई समाधान के लिए सरकार को गायों के कृत्रिम गर्भाधान के लिए एनडीआरआई में बनाए गए बछड़ियों (मादा) का ही बीज (सीमन) उपलब्ध कराना होगा। हर गांव में ग्रऊग्राम बनाया जाए, जिनका नियंत्रण पंचायतों के अधीन रखा जाए। गोरचरान की भूमि से गाेधन के लिए चारे की व्यवस्था की जाए।
-बीएस हुड्‌डा, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग। (निजी राय)
3 जिलों में ही 3850 बेसहारा पशु सड़कों पर
नारनौल: रिकॉर्ड में घूम रहे 3200 आवारा पशु, प्रशासन पकड़ पाया सिर्फ 50 | प्रशासन के रिकॉर्ड में जिले में 3200 पशु आवारा घूम रहे हैं। एक साल में तमाम सख्ती के बाद अभी सिर्फ 50 पशु पकड़े गए हैं। इन्हें नारनौल की गोपाल गोशाला में रखा गया है। अकसर देखा जा रहा है कि जो गायें दूध देना बंद करने पर इन्हें लोग सडकों पर छोड देते हैं। यहां साल में 3 मेले भी लगते हैं।
रोहतक: स्ट्रे कैटल फ्री घोषित, पर 1200 से ज्यादा पशु अभी भी सड़कों पर | नगर निगम के रिकॉर्ड के अनुसार एक साल पहले करीब 3.5 हजार बेसहारा गोवंश रोहतक में थे। इन्हें पकड़कर गोशालाओं और नंदीशालाओं में भेजा गया। डीसी ने जिले को स्ट्रे कैटल फ्री घोषित कर दिया। पर अभी 1200 से ज्यादा बेसहारा पशु सड़कों पर हैं। शहर में 11 गोशालाएं हैं, इनमें एक भी सरकारी नहीं है।
जींद: 500 पशु अभी सड़कों पर | पिछले दिनों जिले में करीब पांच हजार गाय और गाेवंश को पकड़ कर नंदीशालाओं में पहुंचाया गया है। इसमें से 3500 गाेवंश शहर के बीच में जयंती देवी मंदिर के सामने बनी अस्थाई नंदीशाला में छोड़े गए । जबकि 1500 को बीड़बड़ा वन के समीप नंदीशाला में। अभी भी जींद शहर में 500 से ज्यादा बेसहारा पशु सड़कों पर घूम रहे हैं।
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Web Title: shharon mein ek vrs mein 18600 beshaaraa pshu gaoshaalaaon mein bheje, garaaminon ne 9 hazaar se jyada fir chhoड़
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