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५ माह की जुड़वां बेटियों ने दी शहीद को अंतिम विदाई, नक्सली हमले का हुए थे शिकार

५ माह की जुड़वां बेटियों ने दी शहीद को अंतिम विदाई, नक्सली हमले का हुए थे शिकार

Dainik Bhaskar

Mar 10, 2018, 10:29 AM IST
शहीद के अंतिम दर्शन करते हुए उ शहीद के अंतिम दर्शन करते हुए उ

भिवानी (चांग)। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला में नक्सली हमले के दौरान शहीद हुए सहायक कमांडेंट गजेंद्र सिंह का उनके पैतृक गांव खरक कलां में शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सीमा सुरक्षा बल के डीआईजी केएस गुंजयाल ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। शहीद गजेंद्र सिंह वर्तमान में छत्तीसगढ़ के कांकेर जिला में सीमा सुरक्षा बल की 134वीं बटालियन में तैनात थे। सात मार्च को सर्च आपरेशन के दौरान हुए नक्सली हमले में गोली लगने के कारण वीरगति को प्राप्त हुए। अंतिम दर्शन करने उमड़ी भीड़...

- कलानौर कस्बे से पार्थिव शरीर को गांव लाया गया तो ना केवल खरक बल्कि आस पास के कई गांवों के हजारों लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
- पत्नी मोनिका ने जब शहीद पति के अंतिम दर्शन किए तो वह बेहोश हो गई। वहीं, मां ओमपति, बड़े भाई पवन व दोनों बहनों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
- गजेंद्र की पांच मांह की जुड़वां बेटियां भी वहां मौजूद थी। दोनों को परिवार वालों ने उसके पिता के अंतिम दर्शन करवाए और राजकीय सम्मान के साथ संस्कार किया गया।

सरकार ने की 50 लाख और 1 परिजन को नौकरी की घोषणा
- विधायक बिशम्भर वाल्मीकि ने कहा कि शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपए व एक परिजन को योग्यता अनुसार सरकारी नौकरी तथा गांव में बनने वाले सामुदायिक केंद्र का नाम शहीद गजेंद्र सिंह के नाम पर होगा।
- इसके अतिरिक्त संस्कार स्थल पर दस लाख रुपए की लागत से शहीदी पार्क व स्मारक का निर्माण करवाया जाएगा।

1998 में हुए थे सेना में भर्ती
- गजेंद्र सिंह का जन्म खरक कला गांव में मोती लाल व ओमपति के घर 31 अक्टूबर 1976 को हुआ था।
- गांव के राजकीय विद्यालय से दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की तथा भिवानी के वैश्य कॉलेज से स्नातक की डिग्री पूरी करने के कुछ समय पश्चात ही दो नवंबर 1998 को गजेंद्र सिंह बीएसएफ में एएसआई के पद पर भर्ती हुए थे।
- इसके बाद 2003 में गजेंद्र सिंह का विवाह गुडियानी निवासी मोनिका के साथ हुआ। कुछ माह पहले ही उनके घर जुड़वां बेटियों का जन्म हुआ था।
- घर में चार भाई-बहनों के बीच सबसे छोटा होने की वजह से गजेंद्र सिंह सबके चहेते थे। गजेंद्र सिंह अपने पीछे दो बड़ी बहने, एक भाई, माता व पत्नी सहित दो बेटियां छोड़ गए हैं।

सीआरपीएफ में सूबेदार थे गजेंद्र के पिता
- शहीद के पिता दिवंगत मोती भी सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हुए थे। गजेंद्र ने अपने पिता से प्रेरणा लेते हुए भारतीय फौजी में भर्ती होकर देश की सेवा करने का जुनून बचपन से ही था।

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