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फोर्टिस अस्पताल गुड़गांव के ब्लड बैंक और आईपीडी फार्मेसी का लाइसेंस सस्पेंड

Manoj Kumar | Last Modified - Dec 30, 2017, 07:09 PM IST

7 साल की बच्ची के डेंगू के इलाज के लिए फोर्टिस ने वसूले थे 15 लाख रुपये।
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    गुड़गांव का फोर्टिस अस्पताल। (फाइल)

    चंडीगढ़। हरियाणा फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल के ब्लड बैंक और आईपीडी फार्मेसी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। अस्पताल में सितंबर में में सात साल की डेंगू पीड़िता बच्ची आद्या के इलाज को लेकर अस्पताल प्रशासन ने उसके परिजनों को 15 लाख रुपए से ज्यादा बिल थमा दिया था। बाद में बच्ची की मौत भी हो गई थी।32 खामियां पाई गई जांच में...

    - मामला सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने वहां जांच कराई तो वहां 32 खामियां सामने आईं। इनमें मुख्य ब्लड यूनिट के नाको की ओर से तय रेट से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे थे।

    - जिसके बाद कारण बताओ नोटिस दिया गया, जवाब असंतोषजनक मिलने पर एडमिनिस्ट्रेशन ने यह कार्रवाई की है।

    - यह लाइसेंस तब तक सस्पेंड रहेगा तब तक अस्पताल प्रशासन खामियों को दूर करने के बाद अवगत कराने के बाद एडमिनिस्ट्रेशन खुद यह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि वहां सब ठीक है।


    यह है मुख्य खामियां
    - अस्पताल प्रशासन ने अंडरटेकिंग दी थी कि नाको द्वारा तयशुदा रेट के अनुसार ही होल ह्यूमन ब्लड तथा ब्लड कंपोनेंट्स की कीमत ली जाएगी, लेकिन मरीजों से ज्यादा रेट ली जा रही थी।
    - रेट का कोई बोर्ड ब्लड बैंक में डिस्पले नहीं किया था। ब्लड बैंक के मुख्य दरवाजे पर पर्दा नहीं मिला। जांच में सभी दरवाजे खुले मिली।
    - फ्रैश फ्रोजन प्लाजमा जो नहीं बेचे जा सकते वह रिलायंस प्राइवेट लिमिटेड को फ्रैकशजनाईजेशन के लिए बिना किसी पूर्व अनुमति के बेच रहा था।
    - जिनके नाम दवा देने के लिए बताए गए थे, वह जांच के समय वहां नहीं मिले।
    - आईपीडी फार्मेसी और ब्लड बैंक में नर्सिंग स्टाफ काम कर रहा था, जो ऑथोराइज नहीं है।

    ये बोले स्टेट ड्रग कंट्रोलर

    - हरियाणा के स्टेट ड्रग कंट्रोलर नरेंद्र आहुजा का कहना है कि दोनों लाइसेंस सस्पेंड कर दिए गए हैं। यह तब तक जारी रहेगा जब तक के अस्पताल प्रशासन जांच में मिली खामियों को ठीक नहीं करता है। अस्पताल इसकी जानकारी देगा और इसके बाद जांच की जाएगी। जांच में खामियों दूर करने की रिपोर्ट मिलने पर ही लाइसेंस बहाल किए जाएंगे।


    यह है मामला
    - दिल्ली के द्वारका की रहने वाली सात की आद्या को 27 अगस्त को बुखार हुआ। इसके बाद 31 अगस्त को उसे गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसे 15 दिन रखा गया। बच्ची की 14 सितंबर को मौत हो गई।

    - अस्पताल प्रशासन ने उसके परिजनों को 15 लाख रुपए से ज्यादा का बिल थमा दिया। बाद में यह मामला सामने आया तो हरियाणा सरकार ने इसकी जांच कराई। जांच के बाद अस्पताल प्रशासन के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई।

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    7 साल की बच्ची आद्या, जिसके इलाज के लिए फोर्टिस ने वसूल किए थे 15 लाख रुपये। (फाइल)
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    हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज।
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    आद्या के पिता जयंत सिंह और उनकी पत्नी दीप्ति व दोनों बेटियां। (फाइल)
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Web Title: Fortis Hospital Blood Bank And IPD Pharmacy Licence Suspended By Haryana Government
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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