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आद्या के पिता आज दर्ज करवाएंगे स्नढ्ढक्र, फोर्टिस ने कहा मानवता के नाते अॉफर किए थे पैसे

आद्या के पिता आज दर्ज करवाएंगे स्नढ्ढक्र, फोर्टिस ने कहा मानवता के नाते अॉफर किए थे पैसे

Manoj Kaushik | Last Modified - Dec 08, 2017, 10:27 AM IST

पानीपत/गुड़गांव। फोर्टिस अस्पताल में डेंगू के कारण 7 साल की बच्ची की मौत के बाद 16 लाख रुपये वसूल करने के मामले में बच्ची के पिता ने अस्पताल पर 25 लाख रुपये लेकर मामला रफा दफा करने के आरोप लगाए हैं। पिता का आरोप है कि अस्पताल के सीनियर मैनेजमेंट के सदस्य ने उसके पास फोन कर 25 लाख रुपये और उनके द्वारा ईलाज में दिए गए 10 लाख कैश देने की बात कही थी। वहीं फोर्टिस अस्पताल ने एक लेटर जारी करते हुए कहा है कि उन्होंने ये पैसे मानवता के नाते अॉफर किए थे। इस पूरे मामले के बाद अब बच्ची आद्या के पिता जयंत सिंह शुक्रवार को अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने जा रहे हैं। वहीं हरियाणा सरकार भी एफआईआर दर्ज करवाने की तैयारी कर रही है।

- जयंत सिंह ने फोन पर बात करते हुए बताया कि बीती 24 नवंबर को उसके फोन पर फोर्टिस के सीनियर मैनेजमेंट के एक सदस्य की कॉल आई थी।
- उन्होंने कहा था कि वे 25 लाख रुपये और उनके द्वारा दिए गए 10 लाख रुपये कैश वापिस देने को तैयार हैं लेकिन उनको एक एग्रीमेंट साइन करना होगा कि वे इस मामले को लेकर कोर्ट नहीं जाएंगे।
- वहीं यह बात मीडिया के सामने आने पर फोर्टिस अस्पताल ने एक लेटर जारी कर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा है कि फोर्टिस ने जयंत सिंह को इलाज का कोई भी पैसा वापिस देने की बात नहीं की थी।
- उन्होंने आद्या के पिता की फाइनेंसियल कंडिशन को देखते हुए मानवता के कारण ये पैसे अॉफर किए थे।

हरियाणा सरकार भी कर रही एफआईआर की तैयारी
- हरियाणा डीजी हेल्थ द्वारा गठित कमेटी की जांच रिपोर्ट में अस्पताल को दोषी पाया गया था। इसकी पुष्टि हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने की थी।
- स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द करने और अस्पताल पर एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही थी।
- वहीं सरकार ने फोर्टिस अस्पताल को सरकारी पैनल से हटाने के निर्देश दिए हैं।

कफन के भी वसूल लिए थे 700 रुपये
- जयंत सिंह का आरोप है कि जब तक वे पैसा देते रहे, अस्पताल का व्यवहार बहुत अच्छा रहा, लेकिन जैसे ही उन्होंने बेटी को ले जाने के लिए कहा तो उनका व्यवहार बदल गया। अस्पताल ने बच्ची के तन पर पहने कपड़ों तक के 900 रुपए वसूल लिए। यही नहीं, अस्पताल ने कफन के भी 700 रुपए लिए।

एम्बुलेंस देने से भी किया इनकार
- बच्ची के पिता जयंत सिंह ने बताया कि आखिरी में अस्पताल ने एम्बुलेंस तक देने से मना कर दिया। यहां तक कि उन्होंने ये भी कहा कि हम डेथ सर्टिफिकेट भी नहीं देंगे।
- अस्पताल द्वारा दिए गए बिल में 15 दिन के अंदर 2700 ग्लव्स का इस्तेमाल दिखाया गया।
- यही नहीं, 500 सीरिंज का भी इस्तेमाल किया। रूम रेंट के चार्ज एक लाख 74000 रुपए था।

इस तरह बनाए थे 15 लाख 79 हजार रुपए
- एडमिशन चार्ज - 1250 रुपए, ब्लड बैंक - 61315 रुपए, डायग्नोस्टिक - 29190 रुपए, डॉक्टर चार्ज - 53900 रुपए, दवाइयां - 396732 रुपए, इक्विपमेंट चार्ज - 71000 रुपए, इन्वेस्टिगेशन - 217594 रुपए, मेडिकल/सर्टिकल प्रोसीजर - 285797 रुपए, मेडिकल कनज्यूमेबल - 273394 रुपए, मिसलेनियस - 15150 रुपए, रूम रेंट - 174000 रुपए।

ये है पूरा मामला
- दिल्ली के द्वारका में रहने वाले जयंत सिंह की सात साल की बेटी आद्या को 27 अगस्त से तेज बुखार था। दूसरे ही दिन उसे रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां दो दिन भर्ती रहने के बाद उन्होंने गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में रेफर कर दिया।
- डॉक्टरों ने बच्ची को अगले दस दिन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा। 14 सितंबर को बच्ची की मौत हो गई।

मामला कैसे सामने आया?
- दरअसल, बच्ची के पिता जयंत सिंह के एक दोस्त ने @DopeFloat नाम के हैंडल से 17 नवंबर को हॉस्पिटल के बिल की कॉपी के साथ ट्विटर पर पूरी घटना शेयर की।
- उन्होंने इसमें लिखा, ''मेरे साथी की 7 साल की बेटी डेंगू के इलाज के लिए 15 दिन तक फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती रही। हॉस्पिटल ने इसके लिए उन्हें 16 लाख का बिल दिया। इसमें 2700 दस्ताने और 660 सीरिंज भी शामिल थीं। आखिर में बच्ची की मौत हो गई।''
- 4 दिन के भीतर ही इस पोस्ट को 9000 से ज्यादा यूजर्स ने रिट्वीट किया। इसके बाद हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा ने हॉस्पिटल से रिपोर्ट मांगी।

फोर्टिस अस्पताल ने ये दी थी सफाई
- फोर्टिस अस्पताल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ''बच्ची के इलाज में सभी स्टैंटर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल और गाइडलाइन्स का ध्यान रखा गया था। बच्ची को डेंगू की गंभीर हालत में हॉस्पिटल लाया गया था। बाद में उसे डेंगू शॉक सिंड्रोम हो गया और प्लेटलेट्स गिरते चले गए। उसके बाद उसे IV फ्लूड्स और सपोर्टिंग ट्रीटमेंट पर रखा गया। उसे 48 घंटे तक वेंटिलेटर सपोर्टर पर भी रखना पड़ा।''
- अस्पताल ने कहा, ''परिवार को बच्ची की खराब हालत के बारे में हर दिन लगातार बताया गया था। 14 सितंबर को परिवार ने बच्ची को लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस के तहत अस्पताल से ले जाने का फैसला किया। उसी दिन बच्ची की मौत हो गई।''

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