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हिंदी भाषा के प्रसार के लिए मार्च महीने में आयोजित होगी कार्यशालाः प्रो. चौहान

पंचकूला में बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों की कार्यशाला होगी आयोजित।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 06, 2018, 07:24 PM IST

हिंदी भाषा के प्रसार के लिए मार्च महीने में आयोजित होगी कार्यशालाः प्रो. चौहान

गुड़गांव। समूचे भारत को एकता के सूत्र में पिरोने का सामर्थ्य रखने वाली राष्ट्रभाषा हिंदी संविधान के अनुसार भारत संघ की राजभाषा है। हिंदी में गर्व के साथ व्यवहार करना और सरकारी कामकाज का निष्पादन करना सभी नागरिकों का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने यह टिप्पणी राजभाषा कार्यान्वयन की स्थिति की समीक्षा के लिए हरियाणा ग्रंथ अकादमी और सांस्कृतिक गौरव संस्थान द्वारा आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए की। बैठक की अध्यक्षता सांस्कृतिक गौरव संस्थान के परामर्शदाता डॉ महेश चंद्र गुप्त ने की।

- प्रो वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि हरियाणा सरकार ने सीएम मनोहर लाल के हस्तक्षेप के बाद सभी विभागों, निगमों और बोर्डों के प्रमुखों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने कार्यालय में रोजमर्रा का सरकारी कामकाज और पत्र व्यवहार हिंदी में किया जाना सुनिश्चित करें।
- चौहान ने कहा कि हरियाणा की वर्तमान सरकार प्रदेश में हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के सभी गौरवमयी और आधारभूत तत्वों का मान सम्मान बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- चौहान ने कहा कि राज्य सरकार के ताजा निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों का मानस निर्माण करना और आवश्यक प्रशिक्षण देना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
- हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए प्रतिबद्ध हरियाणा ग्रंथ अकादमी द्वारा मार्च माह में पंचकूला में बोर्डों और निगमों के अध्यक्षों की एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी।
- इस कार्य में सांस्कृतिक गौरव संस्थान और केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद सहित हिंदी भाषा के लिए कार्य करने वाले विभिन्न संगठनों का सक्रिय सहयोग लिया जाएगा।

हिंदी सलाहकार समिति के गठन की वकालत
- इस अवसर पर विभिन्न हिंदी सलाहकार समितियों के सदस्य डॉ महेश चंद्र गुप्त ने कहा कि हिंदी में कामकाज के संबंध मे राज्य सरकार द्वारा जारी किए गए निर्देश स्वागत योग्य हैं।
- मगर इन्हें धरातल पर उतारने के लिए सरकार और समाज दोनों की रचनात्मक और सकारात्मक ऊर्जा का सदुपयोग करना पड़ेगा।
-उन्होंने राजभाषा संबंधी सरकारी निर्देशों को लागू करने के कार्य पर निगाह रखने के लिए हिंदी सलाहकार समितियों के गठन की वकालत भी की।

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