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रिटायरमेंट के दिन खुलकर बोले ढ्ढ्रस् प्रदीप कासनी, ष्टरू खट्टर को दिए १० में से १ अंक

रिटायरमेंट के दिन खुलकर बोले ढ्ढ्रस् प्रदीप कासनी, ष्टरू खट्टर को दिए १० में से १ अंक

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 10:46 AM IST
रिटायर आईएएस प्रदीप कासनी। (फा रिटायर आईएएस प्रदीप कासनी। (फा

चंडीगढ़। अपने काम और तबादलों से अकसर चर्चा में रहने वाले आईएएस प्रदीप कासनी बुधवार को रिटायर हो गए। अपने 34 साल के सर्विस कॅरियर में सात मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं। वे जनता की दुख तकलीफ सुनने और कुशल प्रशासक के रूप में सबसे कमजोर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को मानते हैं। वह 10 में से खट्टर को पब्लिक कनेक्ट में मात्र 1 और कुशल प्रशासक के तौर पर सिर्फ 2 अंक देते हैं। आगे पढ़िए प्रदीप कासनी का पूरा इंटरव्यू...

- सवाल: आपने 34 साल की सर्विस में सात मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया है। किसे बेहतर मानते हैं। इन्हें दस में से कितने अंक देंगे।
- जवाब: सभी की अपनी-अपनी नीति रही है। एक जनता की सुनवाई करना और दूसरा कुशल प्रशासक। बात यदि जनता की सुनवाई करने वालों की करें तो सबसे बेहतर सीएम चौधरी देवीलाल और मास्टर हुकम सिंह रहे हैं। इन्हें दस में से 7-7 अंक मिलने चाहिए। भजन लाल और बनारसी दास गुप्ता को 5-5, भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा को 4, बंसीलाल को 3 और ओमप्रकाश चौटाला को 2 अंक दूंगा। मनोहर लाल खट्टर को सिर्फ एक अंक दूंगा। कुशल प्रशासक के रूप में सबसे ऊपर बंसीलाल हैं। इसके बाद चौधरी भजनलाल, चौधरी देवीलाल और बनारसी दास गुप्ता। चौटाला और हुड्‌डा को 3-3 और मास्टर हुकम सिंह और मनोहर लाल खट्टर को 2-2 अंक दूंगा।

- सवाल: आपके 34 साल के कार्यकाल में 71 तबादले हुए। इसकी क्या वजह मानते हैं।
- जवाब: तबादलों में कभी सरकार ने वजह नहीं बताई। मैं अपना काम करता हूं। किसी को नुकसान हो तो वह तबादला कर देता है। गुड़गांव कमिश्नर रहते हुए बावल में एसईजेड की जमीन के मामले को ही लें। वहां कलेक्टर ने रेट तय कराए। करीब सवा से दो करोड़ रुपए प्रति एकड़ किसानों के बन रहे थे, लेकिन सरकार कम पैसा देना चाह रही थी। 3700 एकड़ जमीन पर प्रोजेक्ट बड़ा था, इसलिए मुझे बतौर कमिश्नर इनवोल्व किया गया। बाद में सरकार ने पैसा नहीं दिया। प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। वजह मुझे बना दिया। कहा गया कि वह चाहते तो प्रोजेक्ट धरातल पर आ जाता। मैंने यहां गढ़ी हरसरु में जमीन का एक और मामला खोला था। 40 दिन में तबादला हो गया। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड में मुख्य प्रशासक लगाया। यहां जूनियर आईपीएस को लगा सकते थे। बोर्ड में खादी प्रोड्यूसर की परिभाषा है कि जो झोंपड़ी में बैठकर काम करता है, वह प्रोड्यूसर है। यहां साढ़े छह करोड़ रुपए का बिल मेरे सामने रख दिया। पैसे कहां व कैसे खर्च हुए, पता नहीं। मैंने बिल पर साइन नहीं किया तो तबादला कर दिया।

- सवाल: भाजपा सरकार कह रही है हमने भ्रष्टाचार कम कर दिया। क्या ऐसे हुआ है।
- जवाब: भ्रष्टाचार को जब तक समझेंगे नहीं तब तक वह खत्म नहीं होगा। अब भी एेसा हो रहा है। पहले पता होना चाहिए कि भ्रष्टाचार कहां और कैसे हो रहा है। किसी की शिकायत मिली और उसका तबादला कर दिया। ऐसे भ्रष्टाचार नहीं रुकता। नीरव मोदी पर 1000 करोड़ के घोटाले का आरोप है। वह यह राशि वापस जमा करा देगा तो क्या भ्रष्टाचार नहीं हुआ। भ्रष्टाचार तो हुआ है।

- सवाल: भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में कई आंदोलन हुए। कहां सरकार फेल रही।
- जवाब: सरकार में फैसला लेने वाला कोई एक नहीं है। कई लोग फैसले लेते हैं। एक आदमी कह रहा है कि भीड़ नहीं होनी चाहिए, दूसरा टिफिन लेकर पहुंच रहा है। एक डेरा में जा रहा है, दूसरा खिलाफ बोल रहा। जाट आंदोलन में भी ऐसे ही हुआ।

- सवाल: आप सरकारों को कैसे देखते हैं। किस सरकार को बेहतर मानते हैं।
- जवाब: चुनाव तक ही नेता पब्लिक के साथ होते हैं। सरकार बनते ही जनता से मुंह मोड़ लेते हैं। सिस्टम ही बदल जाता है। सबकुछ मंत्री, एमएलए, उद्योगपति और अफसरों तक सिमट जाता है।

- सवाल: आपको लैंड यूज बोर्ड का ओएसडी बनाया है। वेतन नहीं मिल रहा। क्यों।
- जवाब: बोर्ड 2009 में ही खत्म हो गया। ओएसडी का कोई पद ही नहीं। मुझे वेतन मिलेगा। कोर्ट में अपील की हुई है। लेकिन जब पद ही नहीं है तो मनमानी से जनता का पैसा क्यों खराब किया जा रहा है।

- सवाल: क्या आप राजनीति में आएंगे। यदि आते हैं तो किस पार्टी को ज्वाइन करेंगे।
- जवाब: आज तो इसका विचार नहीं है। लेकिन राजनीतिक समस्या राजनीति से ही निपटती है। आगे राजनीति में भी आ सकते हैं। फिलहाल तो भ्रष्टाचार के खिलाफ ही काम करना है। एक उपन्यास भी लिखूंगा। समय कम है और काम ज्यादा करने हैं।