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शरारती तत्वों ने खंडित की राव तुलाराम की प्रतिमा, यादव समाज में रोष

शरारती तत्वों ने खंडित की राव तुलाराम की प्रतिमा, यादव समाज में रोष

Dainik Bhaskar

Jan 28, 2018, 07:10 PM IST
झज्जर में राव तुला राम की प्रत झज्जर में राव तुला राम की प्रत

झज्जर। झज्जर जिले के पाटौदा गांव में राव तुलाराम की प्रतिमा को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा खंडित किया गया है। इसको लेकर राव तुलाराम समाज के लोगों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिमा को 8 जगहों से खंडित किया गया है। लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि प्रतिमा को खंडित करने वालों को दो दिन में पकड़े नहीं तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे। इन 8 जगह से किया प्रतिमा को खंडित...

- प्रतिमा में घोड़े की तलवार, घोड़े की पूंछ, घोड़े की लगाम, घोड़े के कान, राव तुलाराम के जूते, घोड़े के पैर को तोड़ा गया है।

- यादव समाज के लोगों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रतिमा को खंडित करने वालों को दो दिन में पकड़े नहीं तो वे सड़कों पर उतर कर विरोध करेंगे।

- लोगों का कहना है कि यह घिनौनी हरकत रात को बस जलाने की कोशिश करने वालों ने ही की होगी। उनका कहना है कि जिसने भी ये हरकत की है सामने आकर पंचायत से मांफी मांग लें।

- प्रतिमा स्थापित करने को लेकर पहले ही आपत्ति उठाई गई थी। गांव में यादव समाज के लोगों द्वारा पंचायत की जा रही है।

अंग्रेजों से एक महीना युद्ध किया था रेवाड़ी के राजा राव तुलाराम ने

- हरियाणा का रेवाड़ी जिला, जिसे अहीरवाल का लन्दन कहा जाता है, इस लन्दन के राव राजा तुलाराम थे। राव तुलाराम ने देश के लिए लड़े गए 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान दिया था, जिसको लेकर हरियाणा के लोग 23 सितम्बर का दिन शहीदी दिवस के रूप में मनाते हैं।

- उनका जन्म 9 दिसम्बर 1825 को रेवाड़ी के रामपुरा में हुआ था और उनकी दो बड़ी बहनें थी। राव तुलाराम को तुला सिंह भी कहा जाता था। राव तुलाराम की शिक्षा तब शुरू हुई जब वो पांच साल के थे। साथ-साथ ही उन्हें शस्त्र चलाने और घुड़सवारी की शिक्षा भी दी जा रही थी।

- राव तुलराम जब 14 साल के थे, तब उनके पिता राव पूर्ण सिंह की निमोनिया बीमारी से मृत्यु हो गई और 14 दिनों बाद उन्हें राव पूर्ण सिंह की रियासत का राजा चुना गया तब से ही तुलाराम राव राजा तुलाराम बने। पैतृक गांव रामपुरा उनकी रियासत हुआ करती थी और उनकी रियासत में पूरा दक्षिण हरियाणा कनीना, बावल, फरुखनगर, गुड़गांव, फरीदाबाद, होडल और फिरोजपुर झिरका तक फैला हुआ था।

- राव तुलाराम अंग्रेजों के शासन से काफी परेशान थे और उनके दिल में आक्रोश की भट्टी सुलग रही थी। जब पहली बार 1857 में बंगाल से क्रांति की आग लगी तो वो हरियाणा तक फैल गई और दिल्ली से सट्टा अहीरवाल के क्षेत्र में ये विद्रोह और भयानक रूप से भड़क गया।

- राव तुलाराम को तहस-नहस करने के लिए 2 अक्टूबर 1857 को ब्रिगेडियर जनरल शोबर्स एक भारी सेना तोपखाने सहित लेकर रेवाड़ी की ओर बढ़े और 5 अक्टूबर 1857 को पटौदी में उनकी झड़प राव तुलाराम की एक सैनिक टुकड़ी से हुई। अंग्रेज राव तुला राम की सैनिक तैयारी को देखकर दंग रह गए। यह विदेशी लश्कर एक माह तक राव तुलाराम को घेरे में लेने की कोशिश करता रहा।

- दूसरी ओर अंग्रेजों ने दस नवम्बर 1857 को एक बड़ी सेना जबरदस्त तोपखाने के साथ कर्नल जैराल्ड की कमान में राव तुलाराम के खिलाफ रवाना की। 16 नवम्बर 1857 को जैसे ही अंग्रेजी सेना नसीबपुर के मैदान के पास पहुंची राव तुलाराम की सेना उन पर टूट पड़ी। इस आक्रमण में अंग्रेजी सेना के कमाण्डर जैराल्ड सहित अनेक अफसर मारे गए।

- नसीबपुर मे हुए युद्ध में घायल राजा राव तुलाराम राजस्थान चले गए जहां इलाज के बाद वह सहायता लेने के लिए अफगानिस्तान गए, फिर कई शहरों से होते हुए वे काबुल पहुंचे। वहां फैली बीमारी से ग्रस्त हो गए और आजाद कराने की तड़प लिए 23 सितम्बर 1863 को काबुल में स्वर्ग सिधार गए।

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