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इस एक वजह से ङ्खङ्खश्व रेसलर बन गई ये लेडी, मिला करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट

इस एक वजह से ङ्खङ्खश्व रेसलर बन गई ये लेडी, मिला करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट

Danik Bhaskar | Dec 12, 2017, 01:56 PM IST
डब्लूडब्लूई के रिंग में कविता डब्लूडब्लूई के रिंग में कविता

पानीपत। दिल्ली के इंदिरा गांधी खेल स्टेडियम में डब्लूडब्लूई चैंपियनशिप का आयोजन किया गया। इस चैंपियनशिप में हरियाणा की लेडी रेसलर कविता दलाल ने कोई फाइट नहीं लड़ी। वह यहां सिर्फ अपनी टीम का उत्साह बढ़ाने आई थी। कविता अगले साल डब्लूडब्लूई के रिंग में नजर आएगी। इसके लिए कविता पूरी तैयारी कर रही है। मंगलवार को कविता ने अपनी लाइफ से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं को भी बताया कि कैसे वह वेट लिफ्टिंग छोड़कर डब्लूडब्लूई तक पहुंची। खली की एकेडमी में ट्रेनिंग के बाद ट्रायल दिया और करोड़ों का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। पढ़िए कविता की पूरी कहानी...

 

 

- कविता दलाल ने बताया कि उसने जब वेट लिफ्टिंग की शुरूआत की तो उसके परिवार ने आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत स्ट्रगल किया। कविता बताती है कि उसने वेट लिफ्टिंग में अच्छी तैयारी की परफॉर्मेंस भी बहुत अच्छी थी लेकिन उसके साथ राजनीति हुई। उसका आरोप है कि पटियाला स्पोर्ट्स सेंटर में तैयारी के दौरान वह जापान एक प्रतियोगिता में शामिल होने जा रही थी। उसी दौरान उसे एक दवाई खिला दी गई और बाद में डोप टेस्ट में फंसाकर चार साल के लिए बैन लगवा दिया गया। 
 

बैन लगा तो दुगनी ताकत से लौटी कविता

- कविता का कहना है कि बैन लगने के बाद वह दुगनी ताकत से खेल में लोटी। कड़ी मेहनत की और फिर कई प्रतियोगिताओं में मेडल जीते। लेकिन इन मेडल का कोई फायदा नहीं हुआ। उन्हें नौकरी के लिए बहुत दर-दर घूमना पड़ा। एक दफा सीएम से मिलने पहुंची। उसकी बात सुनी गई लेकिन नौकरी में उम्र आड़े आ गई। उसके मेडल देखकर भी उम्र को दरकिनार नहीं किया गया। अंत में वह बहुत परेशान हो गई। 
 

 

आखिरी में खली की नजर पड़ी तो पहुंचा दिया डब्लूडब्लूई
- इसके बाद ग्रेट खली ने उन्हें रेसलिंग के लिए न्यौता दिया। कविता ने एक साल तक जालंधर रहकर ट्रेनिंग ली। 

- इसके बाद उसने डब्लूडब्लूई में ट्रॉयल दिया। ट्रॉयल में सिलेक्ट होने के बाद उसका कॉन्ट्रेक्ट हुआ। यह कॉन्ट्रेक्ट करोड़ों में है। यह खुद कविता मानती है। हालांकि उन्होंने पूरी राशि बताने से मना कर दिया। 

- कविता ने कहा कि वेट लिफ्टिंग में पैसा न मिलने और सरकार द्वारा प्रोत्साहन न करने के बाद ही डब्लूडब्लूई में जाने का निर्णय लिया। 

- इस तरह कविता दलाल की लाइफ बदली और वेट लिफ्टिंग से रेसलिंग तक पहुंच गई।