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ङ्खङ्खश्व रेसलर को फर्स्ट लेडी अवार्ड से नवाजेंगे राष्ट्रपति, जानें इनके बारे में एटूजेड

ङ्खङ्खश्व रेसलर को फर्स्ट लेडी अवार्ड से नवाजेंगे राष्ट्रपति, जानें इनके बारे में एटूजेड

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 06:25 PM IST
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जींद। बीते दिनों अमेरिका के फ्लोरिडा में डब्ल्यूडब्ल्यूई चैंपियनशिप का हिस्सा रही जींद जिले के गांव मालवी की रेसलर कविता दलाल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 20 जनवरी को फर्स्ट लेडीज अवॉर्ड से सम्मानित करेंगे। प्रोग्राम महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के अशोका होटल में आयोजित किया जाएगा। कविता दलाल के भाई संजय दलाल ने बताया कि रविवार को उनकी बहन को इस प्रोग्राम का निमंत्रण मिला है। इससे पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।

DainikBhaskar.com बता रहा है उस एक छोटी-सी बात के बारे में, जिसकी वजह कविता को डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर बना दिया। कविता दलाल ने जब वेट लिफ्टिंग की शुरुआत की तो उनके परिवार ने आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत स्ट्रगल किया।

शादी के बाद ऐसे पहुंची रिंग तक...

- कविता दलाल शादी से पहले खेलों से जुड़ी रही, लेकिन 2009 में कविता की यूपी के बड़ौत में रहने वाले गौरव से शादी हो गई।
- पति व फैमिली मेंबर की सोच पुरुष प्रधान होने के कारण कविता खेलों से दूर हो गई। कविता का कहना है कि उसके पति भी नहीं चाहते थे कि वह खेले।
- इससे वह कुछ दिन डिप्रेशन में भी रही। इसके बाद उसने खुद इस डिप्रेशन से निकलने की सोची और धीरे-धीरे अपने पति व परिवार के सदस्यों को मनाया। तब वह रेसलिंग में आ सकी।

एसएसबी में कॉन्स्टेबल की नौकरी छोड़ चुकी है कविता
- जींद के मालवी गांव की रहने वाली कविता जुलाना के सीनियर सेकंडरी स्कूल से 12 तक पढ़ी हैं। इसके बाद 2004 उन्होंने लखनऊ में अपनी रेसलिंग की ट्रेनिंग शुरू की। ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने पढ़ाई भी जारी रखी और साल 2005 में बीए की पढ़ाई पूरी कर ली।
- पढ़ाई और ट्रेनिंग के बाद 2008 में कविता ने बतौर कॉन्स्टेबल एसएसबी में नौकरी ज्वाइन की। नौकरी लगने के बाद साल 2009 में उसकी शादी हो गई। गौरव भी एसएसबी में कॉन्स्टेबल हैं और वॉलीबॉल के खिलाड़ी हैं।

पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी है कविता
- कविता की 60 साल की मां ज्ञानमती देवी कहती हैं कि उसकी बेटी बचपन से ही तगड़ी थी। जब वह महज पांच साल की थी तब वह हर रोज एक बार में आधा किलो दूध पी जाती थी। उसे हलवा, चूरमा, पूड़े खाने का बड़ा शौक था।
- पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी कविता सबसे ताकतवर है। अब भी वह खाने में देसी घी, दूध और दही ही ज्यादा खाती है।

राजनीति का भी शिकार हुई कविता
- कविता बताती हैं कि उन्होंने वेट लिफ्टिंग में अच्छी तैयारी की, उनकी परफॉर्मेंस भी बहुत अच्छी थी, लेकिन उनके साथ राजनीति हुई।
- आरोप है कि पटियाला स्पोर्ट्स सेंटर में तैयारी के दौरान वह जापान में आयोजित एक प्रतियोगिता में शामिल होने जा रही थी। उसी दौरान उन्हें एक दवाई खिला दी गई और बाद में डोप टेस्ट में फंसाकर चार साल के लिए बैन लगवा दिया गया।

बैन लगा तो दोगुनी ताकत से लौटी कविता
- कविता का कहना है कि बैन लगने के बाद वह दोगुनी ताकत से खेल में लौटी। कड़ी मेहनत की और फिर कई प्रतियोगिताओं में मेडल जीते, लेकिन इन मेडल का कोई फायदा नहीं हुआ।
- उन्हें नौकरी के लिए बहुत दर-दर घूमना पड़ा। एक दफा सीएम से मिलने पहुंची। उनकी बात सुनी गई, लेकिन नौकरी में उम्र आड़े आ गई। उनके मेडल देखकर भी उम्र को दरकिनार नहीं किया गया। अंत में वह बहुत परेशान हो गई।

खली की नजर पड़ी तो पहुंचा दिया डब्ल्यूडब्ल्यूई

- इसके बाद ग्रेट खली ने उन्हें रेसलिंग के लिए न्योता दिया। कविता ने एक साल तक जालंधर में रहकर ट्रेनिंग ली।
- जालंधर स्थित खली की एकेडमी में नेशनल रेसलर बुलबुल को ठेठ ग्रामीण सूट पहनकर चित कर दिया और रातोंरात फेमस हो गई।
- इसके बाद उसने डब्ल्यूडब्ल्यूई में ट्रायल दिया। ट्रायल में सिलेक्ट होने के बाद उसका कॉन्ट्रैक्ट हुआ। यह कॉन्ट्रैक्ट करोड़ों में है। यह खुद कविता मानती हैं। हालांकि, उन्होंने पूरी राशि बताने से मना कर दिया।
- कविता ने कहा कि वेट लिफ्टिंग में पैसा न मिलने और सरकार द्वारा प्रोत्साहन न करने के बाद ही डब्ल्यूडब्ल्यूई में जाने का निर्णय लिया।
- इस तरह कविता दलाल की लाइफ बदली और वेट लिफ्टिंग से रेसलिंग तक पहुंच गई। कविता रोजाना 8 घंटे मेहनत करती है।

इसलिए लड़ती हैं सूट पहनकर

- सूट पहनकर फाइट करने के पीछे कविता अपना मकसद बताती हैं, वह समाज में लड़कियों को यह संदेश देना चाहती हैं कि लड़कियां जरूरी नहीं ऐसे रेसलिंग काॅस्टयूम डालकर ही फाइट कर सकती हैं। गांव-देहात की लड़कियां भी सूट पहनकर फाइट कर सकती हैं।

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