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रिंग ही नहीं किचन में भी हाथ आजमा लेते हैं ये ङ्खङ्खश्व रेसलर, पत्नी से ली थी ट्रेनिंग

रिंग ही नहीं किचन में भी हाथ आजमा लेते हैं ये ङ्खङ्खश्व रेसलर, पत्नी से ली थी ट्रेनिंग

Danik Bhaskar | Dec 14, 2017, 12:42 PM IST
ये हैं डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर ये हैं डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर

पानीपत। आपने पहलवानों को अक्सर रिंग में जोर-अाजमाइश करते देखा होगा। ऐसा भी हो सकता है कि कभी-कभार कोई पहलवान बादाम घोटते भी नजर आ जाए, लेकिन अगर डब्ल्यूडब्ल्यूई का जेंट रेसलर किचन में रोटियां पकाते शायद कभी नहीं देखा होगा। खैर कोई बात नहीं। हम आपको बताते हैं डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर सतेंदर डागर की पाक-कला के बारे में। वह न सिर्फ अच्छी सब्जी-रोटी, बल्कि मीठा-नमकीन लगभग हर चीज बना लेते हैं। देसी घी का चीला है सबसे ज्यादा पसंद...

- बताते चलें कि डब्ल्यूडब्ल्यूई तक का सफर तय कर चुके सतेंदर डागर एकदम शाकहारी हैं। उन्होंने नॉनवेज को आज तक छुआ भी नहीं है।

- रेसलर सतेंदर डागर की हाइट 6 फीट 4 इंच है। सतेंदर का बाइसेप्स 19 इंच का है और उसकी छाती 47 इंच की है। वह घंटों तक अभ्यास करते हैं। जिम के अंदर मैं सभी प्रकार की एक्सरसाइज भी करते हैं।
- इसके लिए उन्हें काफी एनर्जी की जरूरत पड़ती है और ज्यादा एनर्जी के लिए स्वाभाविक सी बात है कि डाइट भी अच्छी-खासी होनी चाहिए।
- सतेंदर शुद्ध शाकाहारी हैं। हर रोज 5 लीटर दूध पीते हैं। इसके साथ-साथ 20 रोटियां खा जाते हैं। शाकाहारी होने की वजह से विदेश में काफी परेशानी हुई। बाद में अपनी पत्नी से खाना बनाना सीखा। अब शायद ही कोई चीज होगी, जो सतेंदर नहीं बनाकर खा सकते।

- हालांकि इस बारे में उन्होंने dainikbhaskar.com को बताया कि जब वह किचन में घुसते हैं तो देसी घी का चीला ही उनकी पहली पसंद होती है। बाकी सब्जी-रोटी समेत हर तरह का मीठा-नमकीन लजीज खाना बना लेते हैं।

ऐसे रहा सतेंदर का डब्ल्यूडब्ल्यूई तक का सफर

- दरअसल सोनीपत के गांव बाघडू खुर्द से अमेरिका तक पहुंचे सतेंदर ने 7 साल की उम्र में पहलवानी शुरू की थी। उन्होंने खुद का अखाड़ा बनाया और वहां प्रैक्टिस शुरू की। आज उनके इस अखाड़े में पूरे गांव के युवा पहलवानी सीखते हैं। उन्होंने इसे गांव को समर्पित कर रखा है।
- पहलवानी करते-करते सतेंदर चंडीगढ़ पहुंचे और वहां प्रैक्टिस शुरू की। चंडीगढ़ में वर्ष 2016 में डब्लूडब्लूई की टीम ट्रायल लेने आई हुई थी। सतेंदर के दोस्त ने उन्हें बताया तो वे भी वहां पहुंच गए।

- सतेंदर बताते हैं कि ट्रायल के दौरान स्पीड, पावर, स्ट्रैंथ और स्टेमिना की वजह से उनका सिलेक्शन हुआ। इसके बाद उन्हें अगले ट्रायल के लिए दुबई बुलाया गया। यहां पूरे वर्ल्ड से काफी रेसलर आए हुए थे।
- वहां फिर से ट्रायल होने के 10 दिन के बाद सलेक्शन की मेल आई। इसके बाद सतेंदर ने अमेरिका में रहकर ट्रेनिंग ली। इसी दौरान शाकाहारी होने की वजह से उन्हें खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।