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आखिरी बार बेटी ने मांगा था पानी, रोते हुए पिता ने बताई दर्द भरी कहानी

आखिरी बार बेटी ने मांगा था पानी, रोते हुए पिता ने बताई दर्द भरी कहानी

Manoj Kaushik | Last Modified - Nov 21, 2017, 05:31 PM IST

पानीपत/नई दिल्ली। अपनी बच्ची की मौत के दो महीने बाद भी उसकी मां और पिता उसे याद करके सिहर उठते हैं। आंखों में आंसू आ जाते हैं और गला भर आता है। खुद ही एक दूसरे को संभालते हैं। ये हालत उस माता-पिता की है जिसकी बच्ची की फोर्टिस अस्पताल में डेंगू से जूझते हुए मौत हुई और अस्पताल ने इलाज की एवज में 16 लाख रुपए वसूल लिए। पिता की आखिरी बार जब बच्ची से बात हुई तो उसने पानी मांगा था लेकिन डॉक्टरों की मनाही की वजह से वह पानी नहीं पिला सके थे। इसके बाद बच्ची कभी नहीं बोली। पिता उस दर्द भरी कहानी को बताते हुए रो उठते हैं।क्या था पूरा मामला?

- दिल्ली के द्वारका में रहने वाले जयंत सिंह की सात साल की बेटी आद्या को 27 अगस्त से तेज बुखार था। दूसरे ही दिन उसे रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां दो दिन भर्ती रहने के बाद उन्होंने गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में रेफर कर दिया। जयंत ने 31 अगस्त को बच्ची को गुड़गांव के अस्पताल में भर्ती करवाया। 14 सितंबर को परिवार ने उसे फोर्टिस से ले जाने का फैसला किया, लेकिन उसी दिन बच्ची की मौत हो गई।

मामला कैसे सामने आया?

- बच्ची के पिता जयंत सिंह के एक दोस्त ने @DopeFloat नाम के हैंडल से 17 नवंबर को हॉस्पिटल के बिल की कॉपी के साथ ट्विटर पर पूरी घटना शेयर की।
- उन्होंने इसमें लिखा, ''मेरे साथी की 7 साल की बेटी डेंगू के इलाज के लिए 15 दिन तक फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती रही। हॉस्पिटल ने इसके लिए उन्हें 16 लाख का बिल दिया। इसमें 2700 दस्ताने और 660 सिरिंज का बिल भी शामिल था। आखिर में बच्ची की मौत हो गई।''
- 4 दिन के भीतर ही इस पोस्ट को 9000 से ज्यादा यूजर्स ने रिट्वीट किया। इसके बाद हेल्थ मिनिस्टर जेपी नड्डा ने हॉस्पिटल से रिपोर्ट मांगी।

फोर्टिस अस्पताल ने क्या सफाई दी?
- फोर्टिस अस्पताल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, ''बच्ची के इलाज में सभी स्टैंटर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल और गाइडलाइंस का ध्यान रखा गया था। बच्ची को डेंगू की गंभीर हालत में हॉस्पिटल लाया गया था। बाद में उसे डेंगू शॉक सिंड्रोम हो गया और प्लेटलेट्स गिरते चले गए। उसके बाद उसे IV फ्लूड्स और सपोर्टिंग ट्रीटमेंट पर रखा गया। उसे 48 घंटे तक वेंटिलेटर सपोर्टर पर भी रखना पड़ा।''
- अस्पताल ने कहा, ''परिवार को बच्ची की खराब हालत के बारे में हर दिन लगातार बताया गया था। 14 सितंबर को परिवार ने बच्ची को लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइज के तहत अस्पताल से ले जाने का फैसला किया। उसी दिन बच्ची की मौत हो गई।''

सरकार जांच करे ताकि किसी के साथ ऐसा ना हो: पिता
- बच्ची के पिता जयंत सिंह ने कहा, ''15 दिन इलाज के बदले हमें 16 लाख का बिल चुकाने को कहा गया। मैं चाहता हूं कि जो चार्ज नियमों के हिसाब से सही हैं, वही लिए जाएं। इस मामले में सरकार से जांच और कार्रवाई की अपील करता हूं ताकि कोई और मेरी तरह परेशान ना हो।''

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Web Title: aakhiri baar beti ne maangaa thaa paani, rote hue pitaa ne btaaee dardbhari ye kahani
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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