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बी-टेक व एमबीए कर पाई 5 हजार की नौकरी, करोड़ों को सिखा गए पैसा कमाना

Balraj Singh | Last Modified - Nov 05, 2017, 02:41 PM IST

महेश वर्मा का जन्म 14 दिसंबर 1986 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। इनके पिता चैंपियन टेलर के नाम से दुकान चलाते थे।
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    चैम्पकैश के एमडी महेश वर्मा का सपना पूरे भारत को डिजिटल बनाना आैर बिना पैसे रोतगार देना था।

    करनाल। सौ साल जीना जरूरी नहीं। भले ही थोड़ा जियो, मगर इसी थोड़े में ऐसा कुछ कर जाओ कि दुनिया आपको बरसों तक याद रखे। इसी कहावत को सच साबित करने वाले देश की जानी-मानी एमएलएम कंपनी चैम्पकैश के मालिक महेश वर्मा अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा आगे बढ़ने की सीख देती रहेंगी। महज 31 साल की उम्र में करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बना चुके महेश वर्मा की दो दिन पहले ही डेंगू से मौत हो गई। वह पिछले 40 दिन से दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे। dainikbhaskar.com उनकी जिंदगी के बारे में बता रहा है कि किस तरह वह इतने बड़े मुकाम पर पहुंच गए थे। टेलर पिता और हाउसवाइफ मां के लाडले ने की बी-टैक और एमबीए, फिर करनी पड़ी 5 हजार की नौकरी...

    - महेश वर्मा का जन्म 14 दिसंबर 1986 को हरियाणा के करनाल में हुआ था। इनके पिता केबी वर्मा चैंपियन टेलर के नाम से दुकान चलाते थे तो मां लीला देवी हाउसवाइफ रही हैं। दो बहनों में बड़ी रेखा नोयडा की एक कंपनी में इंजीनियर हैं तो छोटी ममता ऑस्ट्रेलिया में डॉक्टर हैं।

    - महेश को बचपन से ही कंप्यूटर से बेहद लगाव था। तरह-तरह के सॉफ्वेयर सीखने का शौक था। इनकी शुरुआती शिक्षा आरएस पब्लिक स्कूल और प्रताप पब्लिक स्कूल से थी तो बाद में दून वैली कॉलेज से आईटी में बी-टैक और एमबीए की।
    - इसके बाद महेश नौकरी की तलाश में निकले तो नोयडा की एक कंपनी में 5 हजार रुपए की नौकरी मिली। इससे महेश संतुष्ट नहीं थे। आखिर कुछ बड़ा करने की चाहत में नौकरी छोड़ दी और फिर घर बैठकर ही सॉफ्टवेयर डिजाइन करना शुरू कर दिया।

    ये भी रही महेश की खास उपलब्धियां
    - इसी बीच उनकी आकांक्षा से शादी हो गई तो फिर 2011 में वेबसाइन टेक्नोलॉजी नामक एडवर्टाजिंग कंपनी शुरू की। इस कंपनी के लिए काम करते हुए बड़े-बड़े लोग से ताल्लुक बन गए।
    - एक दिन महेश को आइडिया आया और उन्होंने एक ऐप्प बनाने की ठान ली। उन्होंने अपने पिता के प्रोफेशन चैंपियन टेलर से आइडिया ले महेश ने 1 मई 2015 को चैंपियन नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड नाम से सॉफ्टवेयर लॉन्च किया। अब इसी को चैम्पकैश के नाम से जाना जाता है।
    - करनाल के सेक्टर-14 के रहने वाले महेश वर्मा की कंपनी में 2017 तक करीब 1.75 करोड़ लोग जुड़े और अच्छी इनकम हासिल करने लगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया मुहिम से जुड़कर वह देश के पहले ऐसे व्यक्ति बन गए, जिन्होंने भारतीयों को फ्री में एमएलएम करना सिखाया।
    - साथ ही इसी कंपनी द्वारा बनाई गई चैम्पकैश-डिजिटल इंडिया एेप्प को अकेले गूगल प्ले स्टोर से 10 लाख बार डाउनलोड किया जा चुका है।

    डेंगू से हार गए जिंदगी की जंग
    - परिजनों के मुताबिक महेश वर्मा 40 दिन से डेंगू से पीड़ित थे। कुछ दिन करनाल के अमृतधारा अस्पताल में भर्ती रहने के बाद महेश को गुड़गांव के मेदान्ता हस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद वह दिल्ली के मैक्स हस्पताल में शिफ्ट कर दिए गए थे, जहां उन्होंने बुधवार रात दम तोड़ दिया।
    - गुरुवार दोपहर बाद उनकी डेड बॉडी करनाल लाई गई और फिर शाम को अर्जुन गेट स्थित शिवपुरी में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनकी अंतिम यात्रा में शहर ही नहीं, दूर-दराज के इलाके से भी सैकड़ों लोग शामिल हुए, वहीं चैम्पकैश परिवार से जुड़े लाखों परिवारों ने भी अफसोस जताया है।

    महेेश वर्मा के चैम्पकैश के बारे में कुछ खास बातें
    - चैम्पकैश असल में यह एक एंड्रायड मोबाइल ऐप्पलिकेशन है, जिसे इंस्टॉल करने के बाद आपको एक चैलेंज पूरा करना होता है और इसके एवज में कम्पनी इस ऐप्पलिकेशन के माध्यम से आपको कमीशन देती है।
    - एक बार चैलेंज पूरा करने के बाद आप इसके एक्टिव मेम्बर हो जाते हैं और उसके बाद आप दूसरे लोगों को भी व्हाट्सऐप्प, ई-मेल या किसी और जरिये से भी उन्हें रेफर करके चैलेंज पूरा करने को कह सकते हैं।
    - जब वो आपके द्वारा रेफर होने के बाद चैलेंज को पूरा करते हैं तो उन्हें जो कमिशन मिलता है, उसमें से भी आपको कुछ शेयर मिलता है और जब वो लोग जिन्हें अपने रेफर किया है आगे किसी को रेफर करते हैं तो भी आपको आगे वाले तमाम मेम्बर की कमाई में से कुछ हिस्सा मिलता है। यह आगे वाले 7 मेंबर्स तक होता है।
    - अगर हम मानकर चले कि एक आदमी के ज्वाॅयनिंग करवाने पर अगर आपको 40 रुपए कमीशन मिलता है तो आगे जुड़ने वाले मेंबर्स के लिए आपको किस तरह से पैसे जो है वो मिलेंगे। अगर आप मेहनत के साथ काम करते है तो आप कुछ ही महीनों में करोड़पति भी बन सकते हैं, लेकिन ये जरूरी है कि आपने अपनी मेहनत करने में कोई कमी नहीं रखी।

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    14 दिसंबर 1986 को करनाल में हुआ था महेश का जन्म।
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    बचपन से ही कंप्यूटर से लगाव था और फिर आईटी में बी-टैक व एमबीए कर ली।
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    लगभग डेढ़ साल में महेश ने करोड़ों लोगों को पैसा कमाना सिखा दिया।
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    फैमिली के साथ महेश वर्मा। फाइल से
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    चैम्पकैश के दूसरे सेमिनार के दौरान स्टाफ के साथ चिल करते हुए महेश। फाइल से
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    सेमिनार में फैमिली के साथ महेश वर्मा। फाइल से
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    अंतिम संस्कार में शामिल परिजन।
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    पिछले 40 दिन से डेंगू से पीड़ित थे महेश। दिल्ली के एक अस्पताल में ली आखिरी सांस।
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    एक परिचित महेश की यादें दिखाते हुए।
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    कामयाबी के शिखर पर पहुंचे महेश वर्मा की फाइल फोटो।
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    चैम्पकैश से संबंधित डाटा।
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