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चीन में पहली बार होगा भारतीय चावल का निर्यात, एक्सपोर्टर्स व किसानों को होगा फायदा

बासमती व गैर बासमती दोनों किस्मों के चावल का होगा निर्यात

रोहताश शर्मा | Last Modified - Aug 12, 2018, 08:02 AM IST

चीन में पहली बार होगा भारतीय चावल का निर्यात, एक्सपोर्टर्स व किसानों को होगा फायदा

करनाल.चावल निर्यातक व किसानों के लिए चीन से अच्छी खबर आई है। चीन में पहली बार भारतीय चावल का निर्यात होगा। दोनों किस्मों के चावल का जल्द निर्यात हो सकता है। चीन सरकार ने 19 भारतीय चावल कंपनियों को क्लीयरेंस भी दे दी है। भारत से यूरोप व अरब के देशों में चावल का निर्यात कई सालों से हो रहा है। प्रति वर्ष औसतन 40 लाख टन बासमती चावल और 85 लाख टन गैर बासमती का निर्यात होता है। यूरोप के देशों में बासमती चावल का ज्यादा निर्यात होता है। पीआर व 1121 किस्म का चावल अरब के देशों की पहली पसंद है, लेकिन इस बार चीन के मिलर्स एवं व्यापारी भारत से बासमती, गैर बासमती और यहां तक की टूटे चावल का आयात करने के इच्छुक हैं।

100 टन चावल ट्रायल के लिए भेजा जा रहा:भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए यह अच्छी खबर है। 19 भारतीय कंपनी एवं राइस एक्सपोर्टर्स की चीन से बातचीत चल रही है। चीन सरकार ने इसके लिए क्लीयरेंस भी दे दी है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान विजय सेतिया ने बताया कि चीन से बातचीत चल रही है। शुरुआत में 100 टन चावल ट्रायल के लिए भेजा जा रहा है। वहां के लोग चिपकने वाले चावल को खाना पसंद करते हैं। स्टिक के साथ चावल खाते हैं। भारतीय चावल चम्मच से खाया जाता है। भारतीय चावल चीनी लोगों को पसंद आया तो उसके बाद ही निर्यात का रास्ता खुलेगा।

चावल उद्योग को होगा फायदा:ईरान व दुबई के कुछ व्यापारी पिछले कई सालों से भारतीय एक्सपोर्टर्स से चावल खरीद रहे थे। सालों से लेनदेन अच्छा चल रहा था, लेकिन ईरान व दुबई के कुछ व्यापारियों ने भारत के राइस एक्सपोर्टर्स के साथ धोखाधड़ी कर उनका अरबों रुपए रोक लिए। जिस कारण हरियाणा के कई एक्सपोर्टर्स दिवालिया हो गए। करनाल, कैथल व गुड़गांव की पांच फर्में दिवालिया हो चुकी हैं। इस कारण चावल उद्योग की कमर टूट गई। ज्यादा चावल का निर्यात होने से एक्सपोर्टर्स व किसानों को मुनाफा मिलेगा।

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