--Advertisement--

नाना के साथ पहलवानी कर रेसलर बनी किरण, एक अॉपरेशन ने बचाया था कैरियर

कॉमनवेल्थ गेम्स में हिसार की किरण ने जीता ब्रॉन्ज मेडल।

Dainik Bhaskar

Apr 12, 2018, 04:53 PM IST
अपने कोच विष्णु के साथ किरण। अपने कोच विष्णु के साथ किरण।

हिसार। कॉमनवेल्थ गेम्स में गुरुवार का दिन भारतीय रेसलर के लिए खुशी की लहर लेकर आया। गोल्ड कोस्ट में हुए मुकाबलों में भारत ने रेसलिंग में दो गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल जीता। इन्हीं विजेताओं के बीच एक खिलाड़ी ऐसी भी है, जो 2014 में कॉमनवेल्थ गेम के ट्रॉयल घुटने की चोट की वजह से नहीं दे पाई थी। चोट गंभीर थी डॉक्टरों का कहना था कि यदि अॉपरेशन न करवाया गया तो उसका रेसलिंग कैरियर खत्म हो जाएगा लेकिन उसके पिता ने मुंबई में अॉपरेशन करवाया। इसी के कारण 2018 के कॉमनवेल्थ में ब्रॉन्ज मेडल जीत सकी। ये कहानी है कॉमनवेल्थ ब्रॉन्ज मेडलिस्ट किरण की। पढ़िए कैसे रेसलर बनी किरण...

- किरण गोदारा मूल रूप से हिसार के रावत खेड़ा गांव की रहने वाली है। 25 साल की ये खिलाड़ी बचपन में अपने नाना रामस्वरूप के यहां कालीरावण गांव में रहती थी।
- नाना पहलवान थे। वे किरण को छठी कक्षा में अपने साथ रेसलिंग करवाने लेकर जाने लगे।
- रामनिवास अपने साथ किरण की प्रैक्टिस करवाते। धीरे-धीरे किरण का इंटरेस्ट इस खेल में बनने लगा।
- इसी दौरान 2010 में रामनिवास की मौत हो गई। इसके बाद किरण अपने पिता के पास हिसार में आ गई।

नाना की मौत के बाद हिसार शुरू की रेसलिंग की प्रैक्टिस

- किरण के पिता कुलदीप हरियाणा सरकार में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं।
- नाना की मौत के बाद किरण ने हिसार आकर महाबीर स्टेडियम में कोच विष्णु के अंडर रेसलिंग की प्रैक्टिस शुरू की।

2011 में जीता पहला मेडल

- किरण ने 2011 में अॉल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर शुरुआत की।
- 2011 में ही जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर और इसी साल सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
- 2012 में अॉल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशि में ब्रॉन्ज, 2012 में जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड, इसके बाद सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
- 2013 में 16वीं महिला नेशनल रेसलिंग चैँपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता।

घुटने में लगी चोट तो कॉमनवेल्थ 2014 का ट्रायल नहीं दे पाई किरण
- इसी दौरान किरण के घुटने में चोट लगी। डॉक्टरों का कहना था कि चोट ज्यादा गंभीर थी, अॉपरेशन न करवाने पर उसका रेसलिंग करियर भी खत्म हो सकता था।
- इस बात के चलते उसके पिता कुलदीप मुंबई लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने इलाज के लिए 1 लाख 72 हजार रुपए खर्च बताया।
- पिता द्वारा रिक्वेस्ट करने पर डॉक्टरों ने 97 हजार रुपए में किरण का अॉपरेशन किया। इसके बाद वह ठीक हो पाई।

फिर की रिकवरी और अब पहुंची कॉमनवेल्थ तक
- धीरे-धीरे चोट से रिकवरी करने के बाद 2015 में किरण ने 18वीं महिला सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीता।
- 2016 में 19वीं महिला सीनियर नेशनल रेसलिंग चैँपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता।
- 2017 में 20वीं महिला नेशनल रेसलिंग चैँपियनशिप और सीनियर चैँपियनशिप में गोल्ड जीता।
- इसके बाद कॉमनवेल्थ के लिए क्वालीफाई किया और अब ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

गोल्ड कोस्ट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद किरण। गोल्ड कोस्ट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद किरण।
14 साल की उम्र में रेसलिंग करने लगी थी किरण। 14 साल की उम्र में रेसलिंग करने लगी थी किरण।
किरण के ब्रॉन्ज मेडल जीतने की खुशी मनाते हुए परिवार। किरण के ब्रॉन्ज मेडल जीतने की खुशी मनाते हुए परिवार।
भारती केसरी दंगल में मेडल जीतने के बाद किरण। भारती केसरी दंगल में मेडल जीतने के बाद किरण।
पहलवान सुशील कुमार के साथ किरण। पहलवान सुशील कुमार के साथ किरण।
X
अपने कोच विष्णु के साथ किरण।अपने कोच विष्णु के साथ किरण।
गोल्ड कोस्ट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद किरण।गोल्ड कोस्ट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद किरण।
14 साल की उम्र में रेसलिंग करने लगी थी किरण।14 साल की उम्र में रेसलिंग करने लगी थी किरण।
किरण के ब्रॉन्ज मेडल जीतने की खुशी मनाते हुए परिवार।किरण के ब्रॉन्ज मेडल जीतने की खुशी मनाते हुए परिवार।
भारती केसरी दंगल में मेडल जीतने के बाद किरण।भारती केसरी दंगल में मेडल जीतने के बाद किरण।
पहलवान सुशील कुमार के साथ किरण।पहलवान सुशील कुमार के साथ किरण।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..