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जींद: 1700 किसानों को नहीं मिला बीमा, इंश्योरेंस कंपनी पर 5 लाख जुर्माना

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में घालमेल, जांच में हुआ खुलासा

सुरेंद्र भारद्वाज | Last Modified - Aug 12, 2018, 07:51 AM IST

जींद: 1700 किसानों को नहीं मिला बीमा, इंश्योरेंस कंपनी पर 5 लाख जुर्माना

जींद.जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े पैमाने पर घालमेल हुआ है। इसका खुलासा सब डिवीजन लेवल पर एसडीएम की अध्यक्षता में गठित हुई कमेटी द्वारा की गई जांच में हुआ है। जुलाना व जींद तहसील के करीब 1700 ऐसे किसान हैं। जिनको पहले खरीफ और फिर रबी की फसल खराब होने के बाद भी बीमा कंपनी ने एक पैसा भी क्लेम के रूप में नहीं दिया। इस पर डीएलएमसी (डिस्ट्रिक लेवल मॉनीटरिंग कमेटी) ने इंश्योरेंस कंपनी पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही पीड़ित किसानों को बीमा राशि देने में हुए देरी पर हर पीड़ित किसानों को 5 हजार रुपए अतिरिक्त (यानि करीब 85 लाख रुपए की राशि) देने के आदेश दिए हैं।
किसानों को हुए नुकसान की बीमा राशि न मिलने के लिए डीएलएमसी ने बैंकों व इंश्योरेंस कंपनी दोनों को जिम्मेदार ठहराया है। डीएलएमसी कमेटी चेयरमैन एवं डीसी प्रीमियम काटते समय बैंक और इंश्योरेंस कंपनी कोई समस्या नहीं हुई लेकिन जब बीमा दावा देने का समय आया तो किसानों के खाते मिसमैच हो गए। इससे साफ जाहिर है कि बीमा कंपनी किसानों की फसलों के हुए नुकसान के दावों के भुगतान से बचने के लिए बहाने बना रही है।

डीएलएमसी ने उठाए कई गंभीर सवाल:

- सर्वेक्षण रिपोर्ट में या बीमा कंपनी और बैंकों के रिकॉर्ड में किसानों के नाम, गांवों या अन्य विवरणों का गलत उल्लेख किया गया है।
- रिकाॅर्ड को अपडेट रखने के लिए बैंकों के साथ-साथ बीमा कंपनी जिम्मेदार है लेकिन किसानों को दावों के भुगतान से बचने के लिए बहानेबाजी की जा रही है।
- किसानों की खाता संख्या मेल नहीं खाती, इसलिए वे किसानों के खाते में बीमा दावे को स्थानांतरित करने में असमर्थ हैं। यह कहना हास्यास्पद है क्योंकि यह पता है कि एक बैंक किसानों के खातों से बीमा प्रीमियम को बहुत आसानी से काटता और फिर उसी राशि को बीमा कंपनी को स्थानांतरित करता है।
- जिले में काफी ऐसे मामले हैं जिसमें इंश्योरेंस कंपनी ने बीमा दावा राशि का भुगतान करने की बजाय बहानेबाजी का सहारा लिया है।
- इससे प्रतीत होता है कि बीमा दावे को रोकने में कंपनी या बैंक का उद्देश्य देय बीमा दावों पर ब्याज अर्जित करना है।
जांच की तो एसडीएम के सामने पहुंच गए किसान:एसडीएम वीरेंद्र सहरावत ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को क्लेम राशि क्यों नहीं मिली इसकी जांच शुरू की तो एक-एक कर 1700 किसान पहुंच गए। जिन्होंने हुए नुकसान पर कृषि विभाग की सर्वे रिपोर्ट समेत तमाम दस्तावेज पेश कर बताया कि उन्हें इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कोई भी क्लेम राशि नहीं दी गई। जांच कमेटी के सामने कृषि, बैंक व इंश्योरेंस कंपनी अधिकारी भी पेश हुए। लेकिन पीड़ित किसानों को बीमा दावा राशि देने में क्यों देरी हुई इस पर कोई भी ठोस जवाब नहीं दे पाए।
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