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भारत संतों की भूमि, तीर्थ के लिए यहां से बेहतर और कोई देश नहीं : धर्मपाल

मन भी पानी जैसा ही है। जिस तरह पानी फर्श पर गिर जाए, तो कहीं भी चला जाता है। उसी तरह मन भी चंचल है। कभी भी कहीं भी चला...

Danik Bhaskar | May 18, 2018, 03:30 AM IST
मन भी पानी जैसा ही है। जिस तरह पानी फर्श पर गिर जाए, तो कहीं भी चला जाता है। उसी तरह मन भी चंचल है। कभी भी कहीं भी चला जाता है। मन को हमेशा सत्संग और भजन-सिमरन के साथ जोड़े रखना है। जैसे पानी को फ्रिज में रखने से ठंडा रहता है और आईस बॉक्स रखने से सिमट कर बर्फ में परिवर्तित हो जाता है।

वैसे ही मन फ्रिज रूपी सत्संग में ठंडा और शांत रहता है और भजन-सिमरन करने से सब सिमट कर एक होकर परमात्मा में लीन हो जाता है। जैसे बर्फ को बाहर धूप में रखा जाए तो वह पिघल कर इधर-उधर हो कर बिखर जाता है। वैसे ही हम लोग भी माया रूपी धूप में सत्संग से दूर होकर बिखर जायेंगे। ये बातें मेन बाजार स्थित धर्म ज्ञान सत्संग मंदिर में समिति द्वारा पुरुषोत्तम महायज्ञ व एवं पुरुषोत्तम मास कथा के दूसरे दिन आचार्य धर्मपाल महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि भारत संतों की भूमि है। आप विदेश चले जाएं आपको एक भी तीर्थ स्थान नहीं मिलेगा। तीर्थ स्थानों के लिए भारत से अच्छा देश कोई नहीं हो सकता। हमेशा अपने देश की भलाई के बारे में सोचना चाहिए। देश में रहने वाले हर व्यक्ति को ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे देश का नाम हो। एेसे कार्य कतई नहीं करने चाहिए जिससे देश पर कलंक लगे। मन में संकल्प होना चाहिए। तो हर कार्य को पूरा करने में भगवान भी साथ देते हैं। जब हम कोई अच्छा काम करते हैं। इस दौरान विनीत गर्ग, ओम प्रकाश नागपाल, प्रमोद गुप्ता, सुमन गोयल, कृष्णा शर्मा व प्रमोद शर्मा मौजूद रहे।