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मानेसर जमीन घोटालाः कोर्ट से पूर्व CM हुड्डा को राहत, 5-5 लाख के मुचलकों पर मिली जमानत

31 मई को होगी अगली सुनवाई।

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 01, 2018, 03:00 PM IST

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    19 अप्रैल की सुनवाई के दौरान कैंटर में भरकर लाई गई थी चार्टशीट की कॉपी।

    पंचकूला। हरियाणा के चर्चित मानेसर लैंड स्कैम मामले में मंगलवार को पंचकूला स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद मौजूद रहे। दूसरे आरोपियों की तरह जमानत मिल गई। कोर्ट ने 5-5 लाख के दो निजी मुचलकों पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जमानत दे दी। उनके अलावा तीन और आरोपियों को कोर्ट ने जमानत दी है। जमानत मिलने के बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। यह मामला राजनीतिक भावना से दर्ज करवाया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 मई को होगी। पिछली सुनवाई में मिल गई थी दूसरे आरोपियों को जमानत...

    - 19 अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई पर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा की ओर से कोर्ट में मेडिकल भेजा गया था, जिसमें बताया गया था कि वो दिल्ली के एक अस्पताल में एडमिट हैं, जिसके चलते वो कोर्ट नहीं आ सकते। लिहाजा मेडिकल ग्राउंड पर कोर्ट ने हुड्‌डा को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी थी।
    - सीबीआई कोर्ट में हुड्‌डा के पूर्व प्रधान सचिव एमएल तायल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पूर्व चीफ एडमिनिस्ट्रेटर एसएस ढिल्लों, संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य पूर्व आईएएस अफसर छतर सिंह कोर्ट में अपने वकीलों के साथ पेश हुए। इसके चलते कोर्ट की ओर से इन्हें पेश होने के साथ जमानत दी गई, लेकिन सीबीआई ने इस जमानत का विरोध किया था।

    15 सितंबर 2015 को दर्ज हुई थी एफआईआर
    - स्कैम में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी (हुड्डा सरकार में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के डायरेक्टर), डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लान हेडक्वार्टर, राजौकरी के डायरेक्टर, 23 लैंड एक्वायर करने वाली कंपनियों और बिल्डर्स के भी नाम इसमें शामिल हैं।
    - सीबीआई की ओर से इनको भी आईपीसी की धारा 471, 420, 120बी के तहत आरोपी बनाया है। सीबीआई ने 15 सितंबर 2015 को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद जांच शुरू की गई।

    यह है भ्रष्टाचार का पूरा मामला
    - 27 अगस्त 2004 को मानेसर और पास के तीन गांवों की 1315 एकड़ भूमि पर अधिग्रहण से संबंधित सेक्शन-4 लागू किया गया। सरकार ने 12.5 लाख की दर से मुआवजा तय किया। सेक्शन लागू होते ही किसान डर गए और बिल्डर सक्रिय हो गए।
    - 25 अगस्त 2005 को 688 एकड़ जमीन पर सेक्शन 6 लागू होते ही औसतन 40 लाख रुपए की दर से बिल्डरों ने जमीन खरीदनी शुरू कर दी।
    - बिल्डरों को पता था कि सरकार अधिसूचना वापस लेगी। सरकार के 24 अगस्त 2007 को भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना रद्द करने से कुछ ही दिन पहले प्रॉपर्टी की कीमत 80 लाख रुपए प्रति एकड़ से अधिक हो गई।
    - अधिसूचना रद्द होते ही जमीन की कीमत 1.2 करोड़ प्रति एकड़ को पार कर गई। इस दौरान 22 कंपनियों ने 444 एकड़ जमीन खरीद ली।
    - अकेले आदित्य बिल्डवेल (एबीडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर) ने 248 एकड़ जमीन खरीदी। सेक्शन 4 से 6 के दौरान 60 रजिस्ट्रियां हुईं। सेक्शन 6 लागू होने के बाद 4 रजिस्ट्री हुईं।
    - अधिग्रहण रद्द होते ही 50 रजिस्ट्रियां हो गईं। इस तरह की कुल 114 रजिस्ट्रियां गलत ठहराई गईं। सरकार ने अधिसूचना की अवधि में एक दर्जन से अधिक कंपनियों को ग्रुप हाउसिंग स्कीम के तहत लाइसेंस दिया।

    शीर्ष कोर्ट ने कहा था- सरकार ने गलत किया
    - सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च को कहा था कि सरकार ने शक्ति का दुरुपयोग किया। इसलिए बिल्डरों की खरीदी हुई जमीन सरकार को सौंपी जाएगी।
    - जमीन हरियाणा सरकार के हुडा और एचएसआईआईडीसी के अधीन रहेगी। बिल्डरों को दिए गए चेंज ऑफ लैंड यूज के लाइसेंस भी हुडा और एचएसआईआईडीसी के अधीन रहेंगे।

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    पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा। (फाइल)
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