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साथी ने दलिए से जला दिया, आंखें बंद हो गईं, तब भी टीचर ने मुझे ही पीटा, बिना दवा घर छोड़ा

बच्चे के पिता साहिबा ने कहा कि ऐसे टीचर को पहली बार देखा जो बच्चे का दर्द नहीं समझ पाया।

Danik Bhaskar | May 02, 2018, 05:20 PM IST

पानीपत. यहां के सैनीपुरा के सरकारी स्कूल में मिड डे मील से जले बच्चे ने बताया कि ऐसी हालत उसके साथी ने की है। उसके मुताबिक, घटना के बाद टीचर उसके पास आए और पूछा कि किसने ऐसा किया, आंखों से दिखना बंद हो गया था और दर्द के चलते मैं बता नहीं पाया कि किसने ऐसा किया। इसके बाद टीचर ने उलटा मुझे पिटना शुरू कर दिया। वे इलाज के बजाए हाथ पकड़ कर मुझे घर ले गए।

- पांच साल के मानव ने जैसा पिता को बताया
बच्चे और पिता के शब्दों में मुख्य खबर

"मैं रेलवे लाइन के पास स्कूल में दोस्तों के साथ खेल रहा था। स्कूल में दलिया बन रहा था। खाना बंटने का सभी इंतजार भी कर रहे थे। तभी हमें शांत करा कर दलिया दिलाना शुरू कर दिया गया। हम बारी के इंतजार में ही खुश थे, इसी दौरान कई बच्चे दौड़ते हुए पास से निकले, उन्हीं में से न जाने किस साथी ने मेरे मुंह पर गर्म दलिया फंेक दिया। मैं चिल्ला उठा। आंखों से दिखना बंद हो गया। तभी टीचर पास आए और पूछा किसने फेंका, मैं नहीं बता पाया। इस पर उन्होंने मुझे ही पीटना शुरू कर दिया। हाथ पकड़ कर घर ले गए। मैं रास्ते भर दर्द से रोता रहा। घर पहुंचा तो मां भी मुझे देख कर रोने लगी।"
- जैसा की पीड़ित छात्र मानव ने दैनिक भास्कर को बताया।


मिड-डे मील खिलाते समय शिक्षकों का साथ होना जरूरी
मिड-डे मील के लिए तय किए गए नियमों के अनुसार जब बच्चे को दोपहर के समय भोजन दिया जाता है तो बच्चों के साथ शिक्षकों का होना जरूरी है। स्कूल में ही पढ़ने वाली बड़ी बहन ने बताया कि जिस समय उन्हें खाना दिया जा रहा था, उस समय उनके साथ कोई शिक्षक नहीं थे।

स्कूल के पास ही झुग्गी में रहता है बच्चे का परिवार
वार्ड-22 की सैनीपुरा कॉलोनी में जींद रेलवे लाइन के पास स्थित राजकीय प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाला जो बच्चा जल गया, उसके पिता साहिबा कूड़ा बीनने का काम करते हैं। पास में ही झुग्गी में पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं। बच्चा जब घर पहुंचा तो उनके पास एक भी रुपया नहीं कि वे उसे अस्पताल पहुंचा सकें।

आज स्कूल में जाकर रिपोर्ट ली जाएगी : बीईओ
पानीपत के बीईओ सतपाल सिंह ने बताया कि स्कूल में अगर बच्चे के साथ किसी प्रकार की घटना घटित होती है तो सबसे पहले संबंधित स्कूल इंचार्ज को मामले की सूचना बीईओ कार्यालय में देनी होती है, लेकिन सैनीपुरा स्कूल के इंचार्ज ने घटना की सूचना नहीं दी देकर बड़ी लापरवाही की है। आज स्कूल में जाकर स्टाफ से मामले की रिपोर्ट ली जाएगी।


बच्चे के पिता साहिबा ने कहा कि ऐसे टीचर को पहली बार देखा जो बच्चे का दर्द नहीं समझ पाया। पहले रोते बच्चे को अस्पताल ले जाना चाहिए था। पर वो तो हमें 500 रुपए देकर चले गए। मैं गरीब आदमी हूं। बड़े अस्पताल में इलाज भी नहीं करवा सकता।

वीडियो इनपुट: सन्नी