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नासा ने माना संस्कृत भाषा ही विज्ञान का आधार: डॉ. दत्त

Pehowa News - हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला की ओर से डीएवी कॉलेज में एक दिवसीय संस्कृत संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें कई...

Dainik Bhaskar

Feb 04, 2018, 03:30 AM IST
नासा ने माना संस्कृत भाषा ही विज्ञान का आधार: डॉ. दत्त
हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला की ओर से डीएवी कॉलेज में एक दिवसीय संस्कृत संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें कई प्रदेशों के विश्वविद्यालयों से भाषा विद्वानों व बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लेकर भाषा के प्रति अपने विचारों को साझा किया। संस्कृतस्य प्रचार प्रसारे आर्य समाजस्य योगदानम् विषय पर आधारित संगोष्ठी की शुरूआत अकादमी के निदेशक डॉ. सोमेश्वर दत्त व प्रिंसिपल डॉ. कामदेव झा ने की। डॉ. सोमेश्वर दत्त ने कहा कि संस्कृत संस्कारों की जननी भाषा है। इसकी किसी से प्रतिस्पर्धा नहीं है। क्योंकि अन्य कोई भाषा न तो संस्कृत का मुकाबला कर सकती और न ही इसका हनन कर सकती है। उन्होंने कहा कि 1947 के बाद संस्कृत में 90 महाकाव्य लिखे जा चुके हैं। जबकि 1901 से लेकर अब तक 3500 से अधिक संस्कृत की रचनाएं लाइब्रेरी में उपलब्ध हैं। अकेले डॉ. अभिराज मिश्र ने ही भाषा में 250 से अधिक ग्रंथों की रचना की है। इंग्लैंड के कॉलेजों में छात्र संस्कृत में मंत्रोच्चारण कर रहे हैं और अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी इस विषय को विज्ञान का आधार मानकर इसे महत्व दिया है। एनसीआरटी की पुस्तकों के मुताबिक संस्कृत ने पूरे विश्व को ज्ञान दिया है। मंच का संचालक प्रो. अजय मोहन ने बखूबी किया।

ज्योतिष का आधार संस्कृत : प्रिंसिपल झा ने कहा कि संस्कृत आंकड़ों पर आधारित एक सफल विद्या है। विज्ञान से बढ़कर ज्योतिष का आधार संस्कृत ही है, लेकिन ज्योतिष के क्षेत्र में फर्जी विद्वानों ने जानकारी के अभाव में केवल अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए इस भाषा की विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगाने का काम किया है।

पूर्व आईएएस अधिकारी रोशन लाल ने कहा कि भाषा पर पकड़ न होने के बावजूद भारतीय संस्कृति से जुड़ा प्रत्येक भारतीय इससे पैदा हुए संस्कारों का विद्वान है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के विस्तार के लिए सरकार को संस्कृत पढ़ने वालों के लिए रोजगार की गारंटी को सुनिश्चित करते हुए उसके लिए सीटें आरक्षित करनी चाहिए। ऐसे नीतिगत निर्णय लेने के लिए अकादमी सरकार से बातचीत कर सकती है। इस मौके पर डॉ. एमसी शर्मा, प्रो. वेद प्रकाश उपाध्याय, प्रो. राजेश्वर मिश्र, डॉ. ललित कुमार गौड़, प्रो. भीम सिंह, डॉ. सीडीएस कौशल, समाजसेवी बीडी थापर, हरीश आर्य, प्रो. सुमन सिरोही, प्रो. अजय मोहन, डॉ. मेजर सिंह, डॉ. सुरेंद्र शर्मा, प्रो. गुरिंद्र मक्कड़, प्रो. मंजू गुप्ता, प्रो. मनोज कुमार व मांगे राम कौशिक मौजूद रहे।

पिहोवा | डीएवी कॉलेज में हुई राष्ट्रीय संस्कृत संगोष्ठी में हिस्सा लेते बुद्धिजीवी।

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