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भेरियां कॉलेज के हिस्से की जमीन पर बनाया स्टेडियम

गांव भेरियां में पंचायत द्वारा दान में दी जमीन पर बने राजकीय कॉलेज व स्टेडियम की जगह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 02:45 AM IST

भेरियां कॉलेज के हिस्से की जमीन पर बनाया स्टेडियम
गांव भेरियां में पंचायत द्वारा दान में दी जमीन पर बने राजकीय कॉलेज व स्टेडियम की जगह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिस जगह पर स्टेडियम का निर्माण किया गया है उसे कॉलेज ने अपना बताते हुए डीसी को पत्र भेजा है। इसमें उनकी जगह या फिर बना बनाया स्टेडियम कॉलेज को दिलाने की मांग की गई है। कॉलेज प्रशासन का दावा है कि आनन-फानन में बिना निशानदेही किए उनकी जगह पर पर स्टेडियम का निर्माण कर दिया गया। अब कॉलेज के पास प्ले ग्राउंड के लिए कोई जगह नहीं बची। जिसमें छात्रों की स्पोर्ट्स एक्टिविटीज को पूरा करवाया जा सके। दोनों विभागों की तनातनी के बीच स्टेडियम के मैदान में घास उगी है। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बलविंद्र सिंह घोतरा ने बताया कि जुलाई 2013 में कांग्रेस सरकार के समय इस कॉलेज को शुरू किया गया था। उस समय भेरियां गांव की पंचायत ने बिशना मल राजा देवी चेरिटेबल ट्रस्ट से दान में दी गई 14 एकड़ एक कनाल 15 मरले जमीन को वापस लेकर इस पर महिला कॉलेज बनाने व स्टेडियम के लिए सरकार को दिया था। इसी भूमि पर आठ एकड़ एक मरले में कॉलेज का निर्माण किया जाना था और बाकी जगह स्टेडियम की थी, लेकिन स्टेडियम की जगह में गहरे गड्ढे होने के कारण उस समय स्टेडियम को कॉलेज की जगह में खिसका कर वहां निर्माण कर दिया गया। इससे कॉलेज की एक एकड़ से अधिक जगह स्टेडियम की तरफ चली गई।

पौना एकड़ हाइवे में चली गई जमीन: इसके बाद नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अंबाला हिसार हाइवे नंबर 65 को चौड़ा करने का काम शुरू कर दिया। जिसमें कॉलेज के हिस्से से छह कनाल एक मरला जगह सड़क में अधिग्रहण कर ली गई। इस तरह कॉलेज की जगह दोनों तरफ से कम होती चली गई। अब पिछले साल प्रदेश सरकार ने साइंस ब्लॉक शुरू करने के लिए आठ करोड़ रुपए की लागत से नए भवन के निर्माण कार्य को मंजूरी दी है। जुलाई माह में यह काम शुरू होने का अनुमान है। साइंस ब्लॉक बनने से कॉलेज में जगह और घट जाएगी। ऐसे में कॉलेज के पास प्ले ग्राउंड के लिए बिल्कुल जगह नहीं बचा। जिससे छात्रों को खेल गतिविधियों में बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

रुक सकती है यूजीसी व नेक से मिलने वाली ग्रांट: कॉलेज के अनुसार यूजीसी और नेक से स्पोर्ट्स कोटे के तहत जो ग्रांट कॉलेजों में आती है। उसके लिए प्रावधान है कि कॉलेज के पास अपना प्ले ग्राउंड होना चाहिए, लेकिन कॉलेज की जगह स्टेडियम में दबी होने के कारण कॉलेज के पास अपना प्ले ग्राउंड नहीं है। इसलिए ग्रांट रुकने का डर भी कॉलेज को सता रहा है। कॉलेज प्रशासन ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि या तो स्टेडियम से उनकी जगह खाली करवाकर उन्हें दी जाए या फिर स्टेडियम के रखरखाव का जिम्मा स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से लेकर कॉलेज को दिया जाए। इसके पीछे कॉलेज ने तर्क दिया है कि उनके पास एनएसएस के वालंटियर्स की टीम है जो मैदान की साफ सफाई और हरियाली कायम रखने में अपना योगदान देगी। जब भी स्पोर्ट्स विभाग को स्टेडियम की जरूरत होगी कॉलेज उनके साथ स्टेडियम शेयर करने को तैयार है फिलहाल दोनों पक्षों की तनातनी के बीच स्टेडियम में हरी घास में कबाड़ पसरा हुआ है।

प्रिंसिपल बोले, हम शेयर करने को तैयार: प्रिंसिपल डॉ. बलविंद्र सिंह घोतरा के मुताबिक कॉलेज ने डीसी को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया है। यदि स्टेडियम के रखरखाव का जिम्मा कॉलेज को मिलता है तो वे स्पोर्ट्स विभाग के साथ शेयर करने को तैयार हैं। जब भी खेल विभाग को जरूरत होगी उन्हें स्टेडियम उपलब्ध कराया जाएगा।

विवाद

प्रिंसिपल बोले-हमारी जगह में स्टेडियम बनने से खत्म हो गया कॉलेज का प्ले ग्राउंड, डीसी को लिखा पत्र

पिहोवा| गांव भेरियां में बना खेल स्टेडियम जिसकी भूमि पर कॉलेज जता रहा है अपना दावा।

खेल विभाग की शेयर करने को तैयार

जिला खेल अधिकारी यशवीर का कहना है कि खेल विभाग ने कभी कॉलेज के छात्रों को यहां प्रैक्टिस करने से नहीं रोका। स्टेडियम में कोई भी खेल सकता है। हम सभी के साथ स्टेडियम शेयर करने को तैयार हैं। अब निर्माण को ढहाना संभव नहीं है। इसलिए दोनों विभागों को आपस में तालमेल बनाकर चलना होगा। जब भी कॉलेज को स्टेडियम की जरूरत होगी उन्हें मना नहीं किया जाएगा।

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