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रामायण भारतीय संस्कृति व सामाजिक समरसता का महान ग्रंथ :रल्हाण

पूंडरी | महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के शिक्षा विभाग एवं महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ के संयुक्त तत्वावधान में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:40 AM IST

रामायण भारतीय संस्कृति व सामाजिक समरसता का महान ग्रंथ :रल्हाण
पूंडरी | महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के शिक्षा विभाग एवं महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ के संयुक्त तत्वावधान में रामकाव्य द्वारा शिक्षा, संस्कृति, भारतीयता एवं विज्ञान का वैश्विक प्रसार, वाल्मीकि रामायण के संदर्भ में विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें डीएवी कॉलेज पूंडरी के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रो. एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र के पूर्व कुलसचिव डॉ. कृष्ण चंद रल्हाण ने व्याख्यान प्रस्तुत किया। भारतीय भाषाओं तथा विदेशी भाषाओं में जो रामायण लिखी गई है, उसका मूल आधार वाल्मीकि रामायण है। अध्यक्षता कर रही विश्वविद्यालय के कुलपति की धर्मप|ी प्रो. वंदना पूनिया ने डॉ. रल्हाण को शॉल भेंट की।

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