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बिना श्रद्धा के न तो ज्ञान और न ही मिल सकती है गुरु की कृपा : खुशीनाथ

गांव करोड़ा में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 7 दिवसीय महारूद्र यज्ञ के अंतिम दिन पूर्णाहुति डाली गई। महंत बाबा खुशीनाथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 23, 2018, 02:45 AM IST

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    गांव करोड़ा में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 7 दिवसीय महारूद्र यज्ञ के अंतिम दिन पूर्णाहुति डाली गई। महंत बाबा खुशीनाथ करोड़ा ने कहा कि शिष्य के जीवन में गुरु पूर्णिमा के दिन का बड़ा महत्व है। इस दिन साधक गण अपने-अपने सदगुरू देव का पूजन करते हैं।

    भगवान वेद व्यास जी ने वेदों की रचना कर के अपने पूज्य होने का वरदान इस दिन प्राप्त किया था। गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सब इस प्रण को संकल्पित करें कि अपने अंतर्मन में छाए अज्ञान रूपी अंधेरे को दूर करने का प्रयास करें तथा जो दृष्टि, जो चेतना, जो अनुभूत करने की शक्ति हमें प्रभु ने दी है उसका सदुपयोग करें। उसके लिए 3 शर्तें है- शिष्य को जिज्ञासु होना चाहिए, व्यर्थ के तर्कों में न स्वयं उलझेें न ही गुरु को उलझाएं। दूसरा आस्थावान होना चाहिए। बिना श्रद्धा के न तो ज्ञान मिल सकता है और न ही गुरु की कृपा। तीसरा चरित्रवान बनना होगा। शुद्ध चरित्रवान व्यक्ति या शिष्य ही गुरु कृपा का मोक्ष का अधिकारी बन सकता है। इस अवसर पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकंडों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

    पूंडरी | गांव करोड़ा में गुरु पूर्णिमा पर आयोजित हवन में भाग लेते श्रद्धालु।

    किठाना में पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय अनुष्ठान संपन्न

    राजौंद | गांव किठाना में खेड़ा अनुष्ठान को लेकर चल रहे सात दिवसीय यज्ञ का समापन हो गया। समापन पर हवन यज्ञ में गांव के गणमान्य व्यक्तियों ने आहुति डाली। आचार्य देवेंद्र शास्त्री ने बताया कि यह खेड़ा अनुष्ठान 16 जुलाई से शुरू किया गया था, जो रविवार 22 जुलाई को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया। उन्होंने बताया कि यह खेड़ा अनुष्ठान दूसरे वर्ष गांव के सहयोग से किया है। इसमें ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। सात दिन तक ब्राह्मणों द्वारा पूरी श्रद्धा के साथ जप किया गया। इसके बाद गांव में भंडारे का आयोजन किया गया। इस दौरान मुकेश शास्त्री, पवन शास्त्री, सोमदत्त शास्त्री, सुभाष शास्त्री, हरिओम शास्त्री,आचार्य देवेंद्र, सुभाष शर्मा, यजमान शमशेर शर्मा,रामफल शर्मा व सुभाष शर्मा मौजूद थे।

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