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श्री मद् भागवत कथा समाप्ति पर भजनों पर झूमे श्रद्धालु

पूंडरी | अनाज मंडी पूंडरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का धूमधाम से समापन हो गया। समापन अवसर पर हवन-यज्ञ में यजमानों...

Dainik Bhaskar

Jul 29, 2018, 02:55 AM IST
पूंडरी | अनाज मंडी पूंडरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का धूमधाम से समापन हो गया। समापन अवसर पर हवन-यज्ञ में यजमानों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुति अर्पित की। इसके पश्चात एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। कथा ब्यास विदुषी योग ऋतंभरा जी ने श्रीमद् भागवत कथा की अमृतवर्षा करते हुए बताया कि मनुष्य भगवान की कृपा प्राप्त करके ही इस दुख रूपी माया से पार हो सकता है, किंतु भगवत्कृपा कोई आकस्मिक घटना नहीं है। जो-जो जीव भगवान के शरणापन्न हुए उन पर भगवान की कृपा हुई और भगवान ने अपना सब कुछ देकर उन जीवों को मालामाल कर दिया, यानी वो महापुरुष बन गए- तुलसी, सूर, मीरा, कबीर। उन्होंने शरणागति शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि कुछ न करना ही शरणागति है, लेकिन यह कुछ न करना कोई भी जीव कर नहीं सकता, क्योंकि वेद के सिद्धांत के अनुसार कोई भी जीव एक क्षण को भी अकर्मा नहीं रह सकता। उन्होंने याद दिलाते कहा कि कर्म 2 प्रकार के होते हैं। एक मानसिक कर्म तथा दूसरा मानसिक व शारीरिक कर्म। भले ही हम शरीर से कोई कर्म न करें, लेकिन मन एक क्षण को भी चुप नहीं रह सकता। कहा कि इस मानव शरीर में जीव अपना चरम लक्ष्य परमानंद की प्राप्ति कर सकता है। कथा समाप्ति पर ऋतंभरा जी ने श्रद्धालुओं को अपने भावपूर्ण भजनों से नाचने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर सुरेश गोयल, सतीश हजवाणा, डा. मदन रोहिला, भूषण सिंगला, मुकेश, रामकुमार नैन, ओमप्रकाश, रोबिन, सुभाष गोयल, सन्नी अशोक गर्ग व अशोक कुमार भी मौजूद थे।

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