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त्याग से ही भगवान की प्राप्ति संभव है : डॉ. रमनीक कृष्ण

श्रीमद भागवत कथा भक्ति व ज्ञान देने के साथ-साथ मोक्ष दायिनी है। ठाकुरद्वारा सेठ दानामल धर्मशाला में आयोजित...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 31, 2018, 03:01 AM IST

त्याग से ही भगवान की प्राप्ति संभव है : डॉ. रमनीक कृष्ण
श्रीमद भागवत कथा भक्ति व ज्ञान देने के साथ-साथ मोक्ष दायिनी है। ठाकुरद्वारा सेठ दानामल धर्मशाला में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के प्रथम दिन कथा व्यास डॉ. रमनीक कृष्ण जी महाराज ने प्रवचन करते यह बात कही। श्रीमद भागवत शुकदेव ने कलियुगी जीवों के उद्धार के लिए श्रवण करवाई थी। इसके सात दिनों तक श्रवण करने मात्र से ही मोक्ष पद को प्राप्त किया जा सकता है। रसिकों के लिए यह परम धन है और समस्त जन का यह जीवन धन है।

श्रीमद भागवत पुराण का प्रकाश आज संपूर्ण जगत में है। विद्वानों के लिए यह एक शोध का विषय है। भगवान को मानने वालों के लिए साक्षात भगवान का ही वागमयी स्वरूप है। त्याग के बगैर भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती है। माता कुंती के चरित्र का वर्णन सुनाते हुए कहा कि मां कुंती ने अपने जीवन में कभी कोई सुख प्राप्त नहीं किया। जन्म हुआ तो माता-पिता छोड़कर चले गए। युवा अवस्था में लोकलाज का भय उत्पन्न हो गया। अविवाहित को ही सूर्य देव से कर्ण के रूप में पुत्र प्राप्त हो गया। इसका त्याग करना पड़ा। विवाह हुआ तो पीलिया रोगी पांडव के साथ। परिणाम स्वरूप उन्होंने गृहस्थ का कोई सुख नहीं मिला। संतान हुई तो पांचों पांडवों का अपने जीवन का बहुत हिस्सा वन में भटकना पड़ा। भगवान ने उतरा के गर्व की रक्षा की और कुंती माता को दर्शन दिए। कुंती ने भगवान को प्रणाम किया तो भगवान ने उन्हें कुछ मांगने के लिए कहा। कुंती अगर सांसारिक व्यक्ति के समान होती तो न जाने क्या-क्या मांगती, परंतु उन्होंने भगवान से कहा कि हे प्रभु मेरी झोली में अपने जीवन के समस्त दुख डाल दो। यहीं मेरा सबसे बड़ा फल होगा। भगवान को भी बुआ की इच्छा को सहमति के रूप में स्वीकार किया अत: त्याग से ही भगवान की प्राप्ति होती है। मौके पर मुख्य रूप से अशोक गुप्ता ने सहयोग किया।

पूंडरी | सेठ दानामल धर्मशाला में कथा प्रवचन करते डॉ. रमनीक कृष्ण महाराज।

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