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दुखों बगैर भगवान की प्राप्ति असंभव : डाॅ. रमनीक

जगत सद्भावना संस्थान के सानिध्य में दानामल धर्मशाला पूंडरी में आयोजित श्रीमद्भगवत कथा के पांचवें दिन सद्भावना...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 03, 2018, 03:06 AM IST

दुखों बगैर भगवान की प्राप्ति असंभव : डाॅ. रमनीक
जगत सद्भावना संस्थान के सानिध्य में दानामल धर्मशाला पूंडरी में आयोजित श्रीमद्भगवत कथा के पांचवें दिन सद्भावना दूत भगवताचार्य डॉ रमनीक कृष्ण जी महाराज ने श्री कृष्ण जी के जन्म चरित्र का प्रसंग सुनाया। जिसमें उन्होंने बताया कि भगवान का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था। जन्म के समय भगवान की माया से कंस के सभी पहरेदार सो जाते हैं और कारागार के सभी दरवाजों के ताले व वासुदेव जी की हाथों की बेड़ियां स्वयं खुल जाती हैं। आकाशवाणी होती है कि वासुदेव इसे गोकुल में नंदबाबा के यहां छोड़ आओ और वहां से लड़की के रूप में योगमाया ने जन्म लिया है उसे ले आओ।

बासुदेव जी तुरंत श्री कृष्ण को उठाकर गोकुल की तरफ चल पड़ते हैं। आंधी-तूफान के साथ जब यमुना को पार करने लगते हैं तो यमुना माई भगवान के चरण स्पर्श करने के लिए ऊपर की तरफ बढ़ने लगती है, तब भगवान अपना पांव नीचे लटका लेते हैं और यमुना माई चरण लेते ही उतर जाती है। गोकुल में भगवान को छोड़ लड़की को लेकर जैसे ही वासुदेव जी आते हैं दरवाजे बंद हो जाते हैं और पहरेेदार खड़े हो जाते, कंस को सूचना दी जाती है, जैसे ही कंस उसे मारने की कोशिश करता है तो योग माया उनके हाथों से छूट आकाश मार्ग की तरफ चली जाती है और आकाशवाणी होती है कि उसे मारने वाला गोकुल में जन्म ले चुका है। गोकुल में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। मौके पर डाॅ. राजेश व अशोक कुमार ने काफी योगदान दिया।

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