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डेपुटेशन डाॅक्टरों के भरोसे चल रही पूंडरी सीएचसी

पूंडरी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काफी समय से तीन डेपुटेशन पर लगाए डाॅक्टरों के भरोसे चल रहा है। इनमें से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 03, 2018, 03:06 AM IST

डेपुटेशन डाॅक्टरों के भरोसे चल रही पूंडरी सीएचसी
पूंडरी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काफी समय से तीन डेपुटेशन पर लगाए डाॅक्टरों के भरोसे चल रहा है। इनमें से रोजाना एक व दो डाॅक्टर किसी न किसी कारण अवकाश पर रहते हैं। ऐसे में रोज होने वाली औसतन 300 मरीजों को ओपीडी में पूरा इलाज नहीं मिल पा रहा है। हालांकि डाॅक्टरों की कमी को देखते हुए मरीजों की संख्या भी पहले से कम हो रही है। पहले जहां रोज लगभग 400 ओपीडी आती थी अब लगभग 300 तक रह गई है। सीएचसी में डाॅक्टर व संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को कैथल, करनाल व कुरुक्षेत्र के धक्के खाने पड़ते हैं। कहने को तो मुख्यमंत्री द्वारा इसे 50 बेडों का अस्पताल घोषित किया गया था, लेकिन बाद में इसे 30 बेडों का ही रखा गया, कमरे-बेड तो हैं डाॅक्टर और दवाइयों का अभाव है।

अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आई रोशनी देवी, बिमला, अंकुश, रतिराम, सुशील व रामरति ने बताया कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है। पूंडरी-फतेहपुर के अतिरिक्त आधा दर्जन गांवों के लगभग 1 लाख की आबादी इस अस्पताल पर आधारित है। जिसमें एक कार्यकारी डाॅक्टर विकास भटनागर जिसकी नियुक्ति मूंदड़ी पीएचसी की है उसे अतिरिक्त पूंडरी अस्पताल का कार्यभार सौंपा है। जो पूंडरी व मूंदड़ी के मरीजों की ओपीडी करता है। डेपुटेशन पर तैनात डाॅक्टर भटनागर का कहना है कि उनकी कोशिश होती है कि मरीजों को कोई समस्या न आए। सीरियस मरीज को कैथल रेफर किया जाता है।

पूंडरी के स्वास्थ्य केंद्र को 1 अप्रैल 2010 को सीएचसी बनाने के लिए मंजूरी दी गई थी। जिसके निर्माण के लिए 23 मार्च 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा शिलान्यास किया गया। वर्ष 14 अगस्त 2014 को 3 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से बिल्डिंग तैयार हुई। कांग्रेस की सरकार ने भवन का शुभारंभ किया। इसके बाद 31 मई 2015 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा पूंडरी रैली के दौरान इसे 50 बेड़ों को अस्पताल बनाने की घोषणा की गई। लेकिन इस अस्पताल का आलम यह है कि इसमें मरीज तो है, लेकिन डाक्टर व अन्य स्टाफ नहीं। मरीजों की मांग है की कि इसे या तो पीएचसी ही बना दे या फिर सीएचसी वाली सुविधाएं दी जाए।

दर्जनों गांवों के मरीज आते है इलाज के लिए : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पूंडरी, फतेहपुर, जांबा, खेड़ी-सिकंदर, ढुलयाणी, मोहना, टयोंठा, काकौत, हाबड़ी, बदनारा, हजवाणा, रमाणा-रमाणी, सांच, सिरसल व मूंदड़ी की लगभग 1 लाख आबादी के से मरीज इस अस्पताल में इलाज के लिए आते है। अस्पताल में आने वाले मरीज डाक्टरों के अभाव में अधिकतर तो घंटों इंतजार में खड़े रहते है, कुछ वापिस चले जाते है। इसके अतिरिक्त अस्पताल के अधीन आने वाली पीएचसी पाई व मूंदड़ी में भी यही हाल है। अस्पताल में आसपास के दुकानदार व अन्य लोग अपनी गाडिय़ों की पार्किंग करते है। इस बारे में चिकित्सा अधिकारी डा. विकास भटनागर ने बताया कि वे कई वर्षों से कई बार प्रशासनिक अधिकारियों एसपी, एसएचओ और डीसी को भी लिखित में अवगत करवा चुके है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पूंडरी | डॉक्टर कम होने से मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

डाॅक्टर समेत ये पद खाली

पद नाम पद खाली

एमओ 6 4

क्लर्क 2 1

चतुर्थ श्रेणी 8 4

रेडियोग्राफर 1 1

डेंटल 1 1

डेंटल मैकनिक 1 1

सरकारी अस्पताल में इस समय एसएमओ का पद खाली पड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त के पद खाली पड़े हुए है। जबकि इस समय अस्पताल में ड्राइवर, डाटा ऑपरेटर, स्टेनों व सहायक के पदों को स्वीकृत ही नहीं किया गया है। डाक्टर व नर्सों के अभाव में कमरों में रखे बैड खाली पड़े हुए है। अस्पताल नोर्मज के अनुसार अस्पताल में एक्स-रे मशीन होनी चाहिए, जो नहीं है।

जिला में डाक्टरों के स्वीकृत पदों पर करीब 60 प्रतिशत कमी है। ऐसे में जैसे तैसे कर मरीजों को इलाज देने के लिए काम चलाया जा रहा है। डाक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए सरकार को डिमांड भेजी हुई है। जैसे ही नए डाक्टर आएंगे उन्हें खाली पदों पर तैनात किया जाएगा। पूंडरी में मरीजों को परेशानी न हो इसलिए दो-तीन डाक्टरों को डेपुट किया गया है। डा. एसके नैन, सिविल सर्जन, कैथल।

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