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भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तपस्या के बिना भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती: ऋतंभरा

अनाज मंडी पूंडरी में चल रही श्री मद भागवत कथा में कथा ब्यास ऋतंभरा ने कथा में सुदामा का श्री कृष्ण जी से मिलन,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 28, 2018, 03:15 AM IST

भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तपस्या के बिना भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती: ऋतंभरा
अनाज मंडी पूंडरी में चल रही श्री मद भागवत कथा में कथा ब्यास ऋतंभरा ने कथा में सुदामा का श्री कृष्ण जी से मिलन, पांडुरक कृष्ण वासुदेव का वध प्रसंग सुनाया। सुदामा चरित्र में उन्होंने बताया कि भगवान भक्त की भावना के भूखे होते हैं और भक्त के पुकारने पर तुरंत दौड़े चले आते हैं। ब्राह्मण सुदामा गरीब जरूर थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। भगवान की भक्ति के अलावा उन्हें किसी भी भौतिक सुख का मोह नहीं था। जितना भी उनके पास होता तो वे उसमें ही सब्र और संतोष रखते हुए हर समय भगवान श्री कृष्ण के भजन में लीन रहते थे। एक समय जब उनकी पत्‍‌नी की जिद पर सुदामा जी भगवान श्री कृष्ण को द्वारिकापुरी में मिलने के लिए जाते हैं तो उनके पास ले जाने के लिए कुछ नहीं था। तब प|ी द्वारा आसपास के पड़ोस से पांच मुठ्ठी चावल लाकर देती है। सुदामा जी उन्हें साथ लेकर चले जाते हैं। द्वारिका पुरी में जाने के बाद जब श्री कृष्ण जी के द्वारपाल उन्हें अंदर जाने से रोक देते हैं और उनके कहने पर कि वे श्री कृष्ण जी के बचपन के सखा है, तो द्वारपाल श्री कृष्ण जी को सुदामा के आने का संदेश देते हैं। सुदामा का नाम सुनते ही श्री कृष्ण जी नंगे पांव उन्हें मिलने के लिए दौड़ पड़ते हैं। सुदामा जी को गले से लगाकर उन्हें अपने सिंहासन पर बिठाते हैं और अपने हाथों से उनके पांव धोते हैं। उनकी पोटली में बंधे चावलों को लेकर जब श्री कृष्ण जी खाते हैं तो एक मुठ्ठी एक लोक का राज और दूसरी मुठ्ठी में दूसरे लोक का राज दे देते है। ऐसी भक्ति और दोस्ती थी श्री कृष्ण और सुदामा की। भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तपस्या के बिना भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती है। मुख्य यजमान के रूप में मुकेश मंगल ने परिवार सहित भाग लिया। इस मौके पर डाॅ. मदन रोहिला, सुरेश गोयल, ओमप्रकाश, रोबिन, सुभाष गोयल, सन्नी अशोक गर्ग, अशोक कुमार, सतीश हजवाणा, भूषण सिंगला, मुकेश व रामकुमार नैन भी मौजूद रहे।

पूंडरी | अनाज मंडी में कथा प्रवचन करते हुए विदुषी ऋतंभरा।

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