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तृतीय भक्ति विष्णु स्मरण : इंसान को किसी भी परिस्थिति में भगवान को नहीं भूलना चाहिए : कृष्ण

दानामल धर्मशाला पूंडरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सैकडों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और कथा का श्रवण...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 01, 2018, 03:30 AM IST

तृतीय भक्ति विष्णु स्मरण : इंसान को किसी भी परिस्थिति में भगवान को नहीं भूलना चाहिए : कृष्ण
दानामल धर्मशाला पूंडरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सैकडों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और कथा का श्रवण किया। सद्भावना दूत भागवताचार्य डॉ. रमनीक कृष्ण जी महाराज ने नवधा भक्ति की पावनी कथा श्रवण कराते हुए बताया की भक्ति के नव स्वरूप है। इसमे प्रथम भक्ति है श्रवणं के जीवन में हमेें अधिक से अधिक भगवान की कथा सुननी चाहिए, दूसरी भक्ति है। कीर्तन के कथा श्रवण के पश्चात भगवन्नाम संकीर्तन करना चाहिए। तृतीय भक्ति है विष्णु स्मरणं जीवन की किसी भी परिस्थिति में हमें भगवान को नहीं भूलना चाहिए।

चौथी भक्ति पादसेवनम के भगवान के चरणों के सिवा जगत में कोई और आश्रय हमें नहीं ढूंढना चाहिए। पंचम भक्ति है अर्चना के अर्चना करो तो केवल भगवान के चरणों की षष्टम भक्ति है। कथा आयोजक अशोक अग्रवाल ने बताया कि आज कथा में बड़े हर्ष के साथ वामन भगवान का प्राकट्य दिवस मनाया गया।

प्रवचन करते भागवताचार्य डाॅ. रमनीक कृष्ण जी महाराज।

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