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श्रीमद भागवद ज्ञान वैराग्य को जागृत करने की कथा है :विदुषी ऋतंभरा

अनाज मंडी पूंडरी में चल रही श्रीमद भागवद कथा में कथा ब्यास विदुषी योग ऋतंभरा ने कहा कि भागवत भगवान की बागमयी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 27, 2018, 03:35 AM IST

श्रीमद भागवद ज्ञान वैराग्य को जागृत करने की कथा है :विदुषी ऋतंभरा
अनाज मंडी पूंडरी में चल रही श्रीमद भागवद कथा में कथा ब्यास विदुषी योग ऋतंभरा ने कहा कि भागवत भगवान की बागमयी मूर्ति है, स्वयं श्रीकृष्ण व गोविंद स्वरूप है। गोविंद से जो मनुष्य जुड़ना चाहे तो केवल मात्र भाव, श्रद्धा व प्रेम से उनकी भक्ति करें तो उसके हृदय में गोविंद का वास हो जाता है। मन और हृदय को शुद्ध भाव से गोविंद में लगाने से भक्ति की प्राप्ति होती है। मन को स्थिर करने के लिए 8 योग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि अपनाने चाहिए। सच्चे गुरु से ज्ञान प्राप्त कर इन नियमों को जीवन में धारण करना चाहिए। भक्ति भगवान का एक ओंकार स्वरूप है। भागवत जीव दर्शन का ग्रंथ है। भागवत की भक्ति का आदर्श कृष्ण गोपियां है। इस मौके पर डा. मदन रोहिला, सुरेश गोयल, सतीश हजवाणा, भूषण सिंगला, मुकेश, रामकुमार नैन, ओमप्रकाश, रोबिन, सुभाष गोयल, सन्नी अशोक गर्ग व अशोक कुमार मौजूद रहे।

अनाज मंडी पूंडरी में चल रही श्रीमद भागवद कथा

पूंडरी | कथा में प्रवचन सुनते हुए श्रद्धालु ।

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