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फल्गु तीर्थ पर दो महीने बाद लगेगा मेला, प्रशासन की तैयारियां अधूरी

फरल के फल्गु तीर्थ पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले का दो महीने का समय बचा है। मेले की तैयारियों व व्यवस्था को लेकर...

Danik Bhaskar | Jul 25, 2018, 03:55 AM IST
फरल के फल्गु तीर्थ पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले का दो महीने का समय बचा है। मेले की तैयारियों व व्यवस्था को लेकर प्रशासन व सरकार कुंभकर्णी नींद सोया है। ग्रामीणों के बार-बार अवगत करवाने के बाद भी प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा। तीर्थ में जमा पानी बदबू मार रहा वहीं उसमें मच्छर भी पनप रहे। घाट जगह-जगह से टूटे हैं। तीर्थ के अंदर भी कांग्रेस घास फैली है। प्राचीन बूढ़े बड़ के पेड़ के साथ की दीवार तीर्थ की तरफ गिरकर गहरा गड्ढा बन चुका। यहां रखा बिजली का ट्रांसफार्मर हादसे को न्योता दे रहा है।

तीर्थ को जोड़ने वाली सड़कें टूटी

राजकुमार, शीशपाल, रणदीप राणा, विनोद कुमार, काकाराम, नरेंद्र कुमार, प्रदीप सिंह, कुलदीप सिंह, विक्रमजीत सिंह व राजा राम ने बताया कि हर मेले से लगभग 4 या 5 महीने पहले प्रशासन की तरफ से तैयारियां शुरू कर दी जाती थी लेकिन इस बार अधिकारियों द्वारा तीर्थ का दौरा तक भी नहीं किया जा रहा है। डीसी कैथल ने महीना पहले एक बार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दौरा किया था उसके बाद कोई देखने नहीं आया। तीर्थ को जोड़ने वाली गांव की सभी गलियां व सड़कें टूटी-फूटी हैं। जिनका कार्य पहले ही किया जाना चाहिए था। पीने के पानी के लिए पाइप लाइन लगानी चाहिए। घाटों की मरम्मत, तीर्थ का गंदा पानी निकालकर साफ पानी डाला जाना चाहिए, तीर्थ पर सफाई व्यवस्था करवानी चाहिए। अधूरा पड़ा विस्तारक तीर्थ का कार्य पूरा किया जाना चाहिए। तीर्थ पर सड़क के साथ-साथ बनी लगभग 100 फुट की सेफ्टी दीवार एक तरफ झुकी है किसी भी समय गिर सकती है।

देश व विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं मेल में देखने

अश्वनी मास के श्राद्ध पक्ष में लगने वाले मेले के दौरान देश के कोने-कोन व विदेशों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार मेले में 12 से 15 लाख श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में प्रशासन व सरकार की तरफ से पूर्व तैयारियां कुछ भी नहीं की जा रही है। समय बहुत कम रह गया है। 24 अक्टूबर से 8 नवंबर तक लगने वाले मेले में आधी-अधूरी तैयारियों के साथ श्रद्धालुओं को बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

पूंडरी |तीर्थ में मौजूद गंदा पानी।

तीर्थ का पौराणिक इतिहास

फल्गु तीर्थ का प्राचीन इतिहास है। तीर्थ का वर्णन महाभारत के वन पर्व, वामन पुराण, मत्स्य पुराण व नाद पुराण में भी आता है। इन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस तीर्थ में सोमवार की अमावस्या के दिन स्नान एवं दर्पण करने से मनुष्य अग्निष्टोम व अतिरात्र यज्ञों के करने से कहीं अधिक श्रेष्ठतर फल को प्राप्त करता है। अग्रि पुराण में फल्गु नामक एक तीर्थ का वर्णन है। इसके जल एवं भूमि मानव को लक्ष्मी व कामधेनु का फल देने वाले हैं। मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु इस योग के प्राप्त होने पर पितरों के नियमित श्राद्ध करते हैं। इसके बाद ये मेला 10 वर्ष बाद 18 सितंबर 2028 में आयेगा।