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रेलवे का दावा: रेवाड़ी-दिल्ली के बीच रेल लाइन विद्युतीकरण कार्य दिसंबर में हो जाएगा पूरा

3 वर्ष पहले
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नए वर्ष से दिल्ली-अलवर रेलमार्ग पर शुरू होगी इलेक्ट्रिक ट्रेन।

नए वर्ष से दिल्ली-अलवर रेलमार्ग पर शुरू होगी इलेक्ट्रिक ट्रेन।

अलवर से दिल्ली कैंट तक कार्य हो चुका है पूरा, पालम स्टेशन पर बचे हुए कार्य को दिया जा रहा है अंतिम रूप

समय बचने के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी होगा काम, डीजल से होने वाले प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति

भास्कर न्यूज | रेवाड़ी

रेवाड़ी-दिल्ली रेल लाइन के विद्युतीकरण का कार्य दिसंबर माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। सुरक्षा निरीक्षण के बाद जनवरी में ईएमयू (इलेक्ट्राेनिक मल्टीपल यूनिट) ट्रेन का संचालन शुरू हो जाएगा। यह दावा उत्तर रेलवे की ओर से किया जा रहा है। हालांकि काम पूरा होने की समय सीमा अप्रैल 2018 थी, लेकिन तकनीकी कारणों के चलते काम में देरी हो रही है।

रेलवे प्रवक्ता की माने तो कार्य तेजी से किया जा रहा है। रेवाड़ी से दिल्ली कैंट के बीच कार्य पूरा किया जा चुका है। कैंट से पालम स्टेशन के बीच कुछ काम बचा हुआ है, उसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा। जैसे ही काम पूरा होगा, सुरक्षा आयुक्त के निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिलते ही संचालन शुरू हो जाएगा।

रेवाड़ी जंक्शन एक श्रेणी के रेलवे स्टेशन में आता है। यहां से हर रोज 60 हजार से ज्यादा यात्री आवाजाही करते हैं। इनमें से दिल्ली- रेवाड़ी के बीच डेली पैसेंजर की संख्या बहुत ज्यादा रहती है। जानकारों की माने तो अब रेवाड़ी से दिल्ली पहुंचने में रेलमार्ग से करीब 3 घंटे का समय लगता है। लेकिन नई व्यवस्था से यात्रियों का करीब घंटा समय बच सकेगा। बड़ी बात यह है कि रेलवे के बजट का करीब 19 फीसदी फ्यूल पर खर्च हो जाता है। ऐसे में बिजली से रेल संचालन शुरू होने से रेलवे की जहां आर्थिक हालत ठीक होगी, वहीं प्रदूषण कम होने पर्यावरण संरक्षण भी किया जा सकेगा।

12 अगस्त 20107 को किया था शिलान्यास : विद्युतीकरण परियेाजना की आधारशिला 12 अगस्त 2017 को गुड़गांव में रखी गई थी। 8 माह के अंदर अप्रैल 2018 में काम पूरा किया जाना था, लेकिन नहीं हो पाया। हालांकि वर्ष 2014 में दिल्ली से अहमदाबाद तक रेलवे लाइन को विद्युतीकरण को मंजूरी मिल गई थी। काम को पूरा करने के लिए 593.97 करोड़ रुपए का टेंडर एक निजी कंपनी को दिया गया था। पहली बार परियोजना में ओएचई मास्ट निर्माण के लिए एक बेलनाकार प्रकार की नींव का उपयोग किया गया। उत्तर पश्चिम रेलवे की ओर से वर्ष 2017-18 में रेवाड़ी-कोसली 27 किमी. व रेवाड़ी-रिंगस-फुलेरा 214 किमी. रेललाइन पर विद्युतीकरण का कार्य पूरा करने के बाद रेलवे संरक्षा आयुक्त की ओर से इनके संचालन के लिए अनुमोदित किया जा चुका है। बता दें कि उत्तर-पश्चिम रेलवे लाइन पर 2080 किमी. लंबी लाइन पर कार्य चल रहा है। रेवाड़ी- अलवर के बीच यह कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। रेवाड़ी- रोहतक लाइन पर रेलवे सुरक्षा आयुक्त निरीक्षण कर जल्द विद्युत ट्रेन चलाने की बात कह चुके हैं।

25 किमी. प्रतिघंटा बढ़ जाएगी विद्युत चालित ट्रेन की औसत स्पीड : रेलवे लाइन का विद्युतीकरण होने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रेलगाड़ियों की औसत स्पीड बढ़ जाएगी। रेलवे के अनुसार डीजल इंजन पैसेंजर ट्रेन की औसतन स्पीड 40 किमी./घंटा रहती है। ट्रेनों का विद्युतीकरण होने से औसत स्पीड बढ़कर 65 किमी./घंटा पहुंच जाएगी। एक्सप्रेस ट्रेन की बात करें तो डीजल इंजन एक्सप्रेस ट्रेन की औसतन स्पीड 80 किमी./घंटा है। इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद औसत स्पीड 105 किमी./घंटा तक पहुंच जाएगी। जानकारों के अनुसार औसत स्पीड बढ़ने से यात्रियों का अाधा घंटा बच जाएगा।



जनवरी रखी है गई डेडलाइन : सीपीआरओ

रेवाड़ी-दिल्ली के बीच विद्युतीकरण कार्य तेजी से किया जा रहा है। दिल्ली में कैंट व पालम के बीच कुछ कार्य बचा हुआ है। दिसंबर के अंत तक उसे पूरा कर दिया जाएगा। इसके बाद रेलवे सुरक्षा आयुक्त लाइन का निरीक्षण करेंगे, जैसे यहां से हरी झंडी मिलेगी संचालन शुरू कर दिया जाएगा। रेलवे की ओर से इस मार्ग पर विद्युत चालित रेल संचालन की डेड लाइन जनवरी माह निर्धारित की गई है। -दीपक कुमार, सीपीआरओ, उत्तर रेलवे।

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