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निजी डॉक्टरों की हड़ताल से PGI और सिविल हॉस्पिटल में 25% ज्यादा पहुंचे मरीज, अब डॉक्टर 21 को बनाएंगे रणनीति

क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में शुक्रवार को निजी अस्पताल बंद रहे। इस कारण मरीजों को कुछ परेशानी उठानी पड़ी।

Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 07:22 AM IST

रोहतक. क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में शुक्रवार को निजी अस्पताल बंद रहे। इस कारण मरीजों को कुछ परेशानी उठानी पड़ी। कई मरीजों को निजी एंबुलेंस से पीजीआई लाया गया। पीजीआई और सिविल अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में लगभग 25 प्रतिशत मरीज ज्यादा आए, जिन्हें इलाज मुहैया करवाया गया। हड़ताल का पूर्व में ही प्रचार हो जाने के कारण केवल इमरजेंसी के मरीज ही घरों से बाहर निकले। अब आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) की राज्य कार्यकारिणी 21 दिसंबर को बैठक कर अपनी रणनीति तय करेगी। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि 40 संशोधन वाला एक्ट लागू नहीं किया गया तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।


डॉक्टर बोले-मांगें नहीं मानी तो अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे
क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में शुक्रवार को आईएमए के सदस्यों ने निजी अस्पताल बंद रखते हुए हड़ताल की। सभी आईएमए हाउस में एकजुट हुए। यहां सभी ने सरकार से संशोधित एक्ट लागू करने की अपील की। आईएमए के संरक्षक डॉ. एसएल वर्मा ने कहा कि यह डॉक्टरों की ही नहीं, जनता की भी लड़ाई है। एक्ट लागू होने से डॉक्टर बेरोजगार हो जाएंगे। मरीजों के लिए इलाज महंगा हो जाएगा। निजी डॉक्टर ही 75 प्रतिशत मरीजों का इलाज करते हैं। सरकारी अस्पतालों में तो केवल 25 प्रतिशत मरीज ही जाते हैं। सरकार ने संशोधित एक्ट लागू करने का आश्वासन दिया है। इस बारे में एसोसिएशन ने अधिकारिक बयान देने की मांग की है। यह हड़ताल सांकेतिक है। सरकार ने सुनवाई नहीं की तो 21 दिसंबर को राज्य कार्यकारिणी की बैठक में अगली रणनीति का फैसला लेंगे। डॉक्टर विरोधस्वरूप विधायकों,
सांसदों व मंत्रियों के अलावा अन्य अधिकारियों का घेराव करेंगे। कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

हड़ताल का असर आंशिक रहने के 3 कारण
1. निजी अस्पताल संचालकों ने अपने मरीजों को पहले ही हड़ताल के बारे में बता दिया था। इस वजह से केवल इमरजेंसी वाले मरीज ही पीजीआई और सिविल अस्पताल पहुंचे।
2. पीजीआई व सिविल अस्पताल प्रशासन पहले से अलर्ट पर रहा। पर्याप्त स्टाफ व दवा उपलब्ध रही।
3. चैरिटेबल नर्सिंग होम खुले रहे। बाबा बंदा बहादुर चेरिटेबल नर्सिंग होम, लैब एंड डिस्पेंसरी ने भी मरीजों को स्वास्थ्य लाभ दिया।


नीमा भी करेगा विरोध प्रदर्शन
नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के जिला सचिव डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि शुक्रवार को आईएमए की हड़ताल में बीएएमएस डॉक्टर भी शामिल रहे। बीएएमएस डॉक्टरों ने अपने क्लीनिक बंद रख कर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का विरोध किया। इससे बीएएमएस डॉक्टर भी प्रभावित होंगे। नीमा के सदस्य भी जल्दी ही एक्ट के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे।

3329 मरीज पीजीआई की ओपीडी में पहुंचे, आम दिनों में लगभग 2700 मरीज आते हैं
700

मरीज पीजीआई इमरजेंसी में आए, सामान्य दिनों में अब 550-600 मरीज आ रहे हैं
1300
मरीज सिविल अस्पताल की ओपीडी में आए, आम दिनों में 1000 मरीज आते हैं
100
मरीज सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में आए, आम तौर पर 50 ही मरीज आते हैं