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हादसों में अपनों को खोया, दूसरों को बचाने के लिए भरने लगे गड्ढे

हादसों में होती मौतों ने इन्हें जीना सिखा दिया। वह भी खुद केे लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए।

अशोक तोमर | Last Modified - Jan 22, 2018, 07:22 AM IST

हादसों में अपनों को खोया, दूसरों को बचाने के लिए भरने लगे गड्ढे

कलानौर. हादसों में होती मौतों ने इन्हें जीना सिखा दिया। वह भी खुद केे लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए। ये कहानी है उन युवाओं की, जिन्होंने सड़क हादसों में अपने दोस्त, करीबी और रिश्तेदारों को खोया। उन हादसों से आहत होकर एक ऐसी मुहिम छेड़ी जो आज हर किसी के लिए नजीर बनती जा रही है।

इन युवाओं ने संकल्प लिया कि हम आए दिन हो रहे सड़क हादसों को रोकने का प्रयास करेंगे। कलानौर कस्बे के गांव गुढाण के कुछ युवाओं ने सड़क हादसों से हो रही दुर्घटनाओं से सबक लेकर एक युवा संगठन तैयार किया और आसपास के गांवों को जोड़ने वाले रास्तों का मैप तैयार किया। इसके बाद इन सड़कों पर हुए गहरे गड्ढों को भरना शुरू किया।

सड़कों के गड्ढों की अफसरों से शिकायत करते, सुनवाई नहीं होती तो खुद गिट्टी, रोड़ी और मिट्टी जुटाकर गड्ढे भर देते हैं। ये युवक अब तक तकरीबन 30 किलोमीटर सड़क को ठीक कर चुके हैं। इसमें अभी तक गांव गुढाण, कटेसरा, ऊण, गुढाण -निगाना, लाहली-बनियानी रोड आदि पर काम पूरा कर चुके हैं। ये सभी युवा पढ़े लिखे हैं। समय निकालकर इस तरह के काम कर रहे हैं। युवाओं के इस समूह को काम करते देखकर ग्रामीण क्षेत्र में ये चर्चा के विषय बने हुए हैं।

डॉ. राकेश ढाका

पेशे से बीएएमएस डॉक्टर हैं। कलानौर में ही क्लीनिक चलाते हैं। वह बताते हैं कि मैंने अपनी आंखों के सामने सड़क के एक गड्‌ढे के कारण हुए हादसे में अपने दोस्त बलराज को खो दिया था। वह घटना मुझे झकझोर गई। इसके बाद हमने सड़कों के गड्‌ढे भरने की यह शुरुआत की थी और इस मुहिम में सफल भी हुए हैं।

जगबीर तोमर

पेशे से बीएएमएस डॉक्टर हैं। कलानौर में ही क्लीनिक चलाते हैं। वह बताते हैं कि मैंने अपनी आंखों के सामने सड़क के एक गड्‌ढे के कारण हुए हादसे में अपने दोस्त बलराज को खो दिया था। वह घटना मुझे झकझोर गई। इसके बाद हमने सड़कों के गड्‌ढे भरने की यह शुरुआत की थी और इस मुहिम में सफल भी हुए हैं।

नरेश पूनिया

12वीं पास हैं और गुरुग्राम में बाउंसर का काम करते हैं। नरेश के अनुसार मैं अक्सर ड्यूटी जाते समय रोड पर हादसे देखता हूं। इस पर लोग एक-दूसरे के बीच बाते करते हैं अगर सड़क टूटी ना होती तो इसकी जान बच जाती। इसके बाद ही यह संकल्प लिया है। पहले लोग हंसते थे, लेकिन पीछे नहीं हटे।

रवींद्र कुमार : 12वीं पास कर चुका है और रिश्तेदार की सड़क हादसे में मौत हुई थी। इसके बाद जब गांव के युवा आगे आए तो खुद ने भी संगठन ने जुड़ने का संकल्प लिया।

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Web Title: haaDason mein apnon ko khoyaa, dusron ko bachaane ke liye bharne lgae gaddhe
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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