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बिना सुविधा ट्रामा में भेजने पर रेजीडेंट डॉक्टरों ने जताया विरोध, बाेले-मरीज के परिजन तो हम पर गुस्सा उतारेंगे

पीजीआई के धनवन्तरी अपैक्स ट्रामा सेंटर को अधूरी तैयारियों के बीच शुरू करने को लेकर मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रह

Bhaskar news | Last Modified - Dec 30, 2017, 07:17 AM IST

बिना सुविधा ट्रामा में भेजने पर रेजीडेंट डॉक्टरों ने जताया विरोध, बाेले-मरीज के परिजन तो हम पर गुस्सा उतारेंगे

रोहतक.पीजीआई के धनवन्तरी अपैक्स ट्रामा सेंटर को अधूरी तैयारियों के बीच शुरू करने को लेकर मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। हेल्थ यूनिवर्सिटी प्रशासन जरूरी सुविधाएं जुटाए बिना ही इसे 1 जनवरी को शुरू करने पर आमदा है। सेंटर में सीटी स्कैन, ब्लड बैंक व फायर एनओसी नहीं होने के चलते आरडीए (रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन) ने यहां काम करने से मना करते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं।


शुक्रवार को आरडीए ने इस विषय में वीसी से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए नई जगह काम करने से इनकार
किया है। आरडीए ने सुविधा मिलने तक इमरजेंसी में ही काम करने की बात कही है। ऐसे में ट्रामा में आने वाले मरीजों काे इलाज व देखभाल का बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इसे लेकर प्रशासन भी सख्ती के मूड में है।

अधूरी सुविधाओं पर लोग भड़के तो डॉक्टर निशाने पर होंगे
आरडीए ने शुक्रवार को हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. ओपी कालरा से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें ट्रामा सेंटर में सर्जरी व हड्डी रोग विभाग के डॉक्टरों को इमरजेंसी से ट्रामा में शिफ्ट किए जाने पर आपत्ति जताई। रेजीडेंट डॉक्टरों का कहना है कि ट्रामा सेंटर में कई बड़ी खामियां हैं। इसमें सीटी स्कैन मशीन, ब्लड बैंक या स्टोरेज यूनिट व फायर एनओसी मुख्य है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, मेडिसन, शिशु रोग व गायनी विभाग के रेजीडेंट्स भी नहीं हैं। इस स्थिति में सेंटर शुरू करना मरीजों की जान को जोखिम में डालने जैसा है। मरीज के साथ अनहोनी होने पर डॉक्टरों को भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में झगड़ा होने या नौकरी छोड़ने के हालात बनेंगे। प्रशासन दूर बैठा रहेगा।

सर्जरी और हड्डी रोग विभाग के 89 रेजीडेंट होने हैं शिफ्ट
इमरजेंसी से सर्जरी व हड्डी रोग विभाग का पूरा स्टाफ ट्रामा सेंटर में शिफ्ट किया जाना है। यही ट्रामा की रीढ़ भी है। सर्जरी में 54 व हड्डी रोग विभाग में करीब 35 रेजीडेंट डॉक्टर्स हैं। मरीजों की देखभाल इन्हीं के जिम्मे होती है। इनमें से आधे से ज्यादा रोजाना ऑपरेशन थियेटर व वार्ड में ड्यूटी पर होते हैं। शेष इमरजेंसी में देखते हैं।


सीसीटीवी लगाने जरूरी
सुरक्षा उपायों के बगैर ट्रामा सेंटर शुरू करना प्रशासन को भारी पड़ सकता है। कैमरों के अभाव में मरीज के सहायकों से विवाद होने पर सच से पर्दा उठाना मुश्किल होगा।

एसोसिएशन ने वीसी को ट्रामा में जरूरी सुविधाएं मुहैया होने तक वहां शिफ्ट नहीं किए जाने का आग्रह किया है। उन्होंने आश्वासन दिया है। -डॉ. जंगवीर ग्रेवाल, अध्यक्ष, आरडीए।

ट्रामा सेंटर में नर्सों को भी डॉक्टरों की तरह सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएं। उन्हें अलग से चेंजिंग रूम दें। -अशोक कुमार, प्रधान, नर्सिंग एसोसिएशन

पीजीआई को चिट्ठी लिखी है। इसमें ट्रामा सेंटर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही है। काम शुरू हो गया है। -राकेश कुमार, प्रभारी, पीजीआईएमएस थाना।

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Web Title: binaa suvidhaa traamaa mein bhejne par rejident doktron ne jtaayaa virodh, baaele-mrij ke parijn to hm par gaussaa utaarengae
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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