--Advertisement--

गोअभ्यारणय के लिए मिले 4 करोड़ टेक्निकल अप्रूवल के लिए नक्शा तैयार

गोअभ्यारणय को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने 4 करोड़ की ग्रांट नगर निगम प्रशासन को जारी की है।

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 08:24 AM IST

हिसार. शहर में घूमने वाले पशुओं से निजात मिलने की उम्मीद जगी है। प्रदेश के सबसे बड़े गोअभ्यारणय को आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने 4 करोड़ की ग्रांट नगर निगम प्रशासन को जारी की है। यह ग्रांट गो-सेवा आयोग के माध्यम से नगर निगम प्रशासन को दी गई है। इसका प्रयोग गोअभ्यारणय को आधुनिक बनाने में किया जाएगा। इसके प्रयोग से गोअभयारण्य में पशुओं के बसेरे से लेकर चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था हो पाएगी। निगम कमिश्नर अशोक बंसल, टेक्निकल टीम व गो-सेवकों ने शनिवार को मौके का निरीक्षण किया।


नगर निगम प्रशासन को गो-अभ्यारणय के लिए एक रुपये प्रति एकड़ के हिसार से जीएलएफ की 50 एकड़ जमीन लीज पर मिली है। जहां करीब 10 करोड़ रुपए के अनुमानित खर्च से गो-अभयारण्य तैयार होगा। पहले चरण में साढ़े 12 एकड़ भूमि पर तैयारी की जा रही है। बात दें
कि साल 2014 में गो-अभ्यारणय के लिए 4 करोड़ का प्रोजेक्ट बना था जिसे भविष्य में जरूरत को ध्यान में रखते हुए 10 करोड़ रखा गया। साथ ही गो-गोअभ्यारणय के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारियों ने अपना एक दिन का वेतन दान किया था। इसके अलावा सांसद दुष्यंत चौटाला ने भी सांसद कोष सेे राशि दी थी। मौजूदा समय में गोअभ्यारण्य में 150 नंदी का बसेरा है।
नक्शे को अंतिम रूप देकर यूएलबी को भेजा जाएगा
नगर निगम की टेक्नीकल टीम ने गोअभ्यारणय का नया नक्शा तैयार किया है। नक्शा टेक्नीकल अप्रूवल के लिए शहरी स्थानीय निकाय हरियाणा को भेजना था उससे पहले निगम कमिश्नर गोसेवकों के साथ फील्ड में पहुंचे। उन्हें नक्शा दिखाया और उसके संबंध में उनकी भी राय मांगी। उनकी राय के साथ अब नक्शे को अंतिम रूप देकर यूएलबी को भेजा जाएगा।

सुस्त कार्यप्रणाली के कारण जाना पड़ा फील्ड में

प्रदेश के सबसे बड़े गोअभ्यारणय को आधुनिक बनाने के लिये स्वयं कमिश्नर अशोक बंसल फील्ड में पहुंचे। पूर्व में निगम की टेक्नीकल टीम ने नक्शा बनाया जिसमें काफी खामियां रहीं। बार-बार निगम के आला अधिकारियों को टेक्नीकल टीम की सुस्त कार्यप्रणाली का खामियाजा भुगताना पड़ा। उसी कारण आज तक प्रोजेक्ट सही से सिरे नहीं चढ़ पाया। ऐसे में 4 करोड़ की ग्रांट खर्च करने से पहले कमिश्नर ने हरियाणा कुरुक्षेत्र गोशाला में बन रहा आधुनिक पशु चिकित्सालय भी देखा और उसके प्रोजेक्ट को समझा। ताकि गोअभ्यारणय में पशुओं के चिकित्सा सुविधाओं का प्रबंध हो सके।

पांच सदस्यीय कमेटी गठित

ऋषि नगर स्थित देवी भवन गोशाला के पदाधिकारी अशोक बंसल ने कहा कि गोअभ्यारणय को पंजीकृत करवा दिया गया है। इसके उनके सहित 5 सदस्य भी चुने गए हैं जो गोअभ्यारणय की संभाल करेंगे। नक्शा तैयार हो गया है। अप्रूवल मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा।

अभियान फेल होने की वजह यह रही

शहर को पशु मुक्त करने की पहली डेडलाइन 15 जून 2017 रखी गई थी। अब तक 6 बार प्रशासन दावे की डेडलाइन में परिवर्तन कर चुका है। 15 जून के बाद, 30 जून, 31 जुलाई, 15 अगस्त, 31 अगस्त, 10 सितंबर डेडलाइन रखी गई। डेडलाइन में परिवर्तन का एक बड़ा कारण प्रशासन के पास पकड़े गए पशुओं के लिए बसेरे का प्रबंध न होना भी था।

ये बने हालात
- कई बार गोशालाओं के संचालकों ने पशुओं को जगह के अभाव में लेने से इनकार कर दिया। बार-बार इस मामले में उपायुक्त से लेकर कमिश्नर तक ने गोशाला संचालकों से बैठक की कुछ संचालकों ने पशु लिए।

- नगर निगम प्रशासन के पास पकड़े गए पशुओं के लिए जगह के अभाव में कई बार पशु पकड़ों अभियान बीच में रुका।

- सड़कों पर घूमते पालतु पशु पकड़े तो सुशासन सहयोगी तक को पशुपालकों ने घेर लिया। पुलिस को बचाव करना पड़ा। बाद में पड़ाव क्षेत्र व पशुपालकों के बीच बैठक हुई जो बेनतीजा रही।

- सितंबर 2017 में गोअभ्यारणय का शिलान्यास दो बार रखना चर्चाओं में रहा। एक बार हरियाणा के कृषि एवं पशुपालन मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और फिर विधायक व पूर्व सीपीएस डॉ. कमल गुप्ता ने गोअभ्यारणय का शिलान्यास किया।

- पकड़े गए नंदी धांसू रोड स्थित पशुबाड़े में रखे जहां पानी के अभाव में कई नंदी की मौत का मामला भी सामने आया था।

- निगम की तकनीकी स्टाफ की लापरवाही भी सामने आई। गोअभ्यारणय में नगर निगम की तकनीकी शाखा ने समय पर न तो नक्शा बनाने व अन्य कार्य नहीं किया।