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रेवाड़ी में एक प्लाॅट को पांच बार बेचा, कागजों में 5 ही दावेदार, कब्जा लेने आए तो किया किडनैप का केस

गढ़ी बोलनी रोड पर गांव पैदयावास के पास जिस प्लाट पर कब्जा करने को लेकर घमासान मचा हुआ है और एक बुजुर्ग महिला के किडनैप के

Danik Bhaskar | Jan 01, 2018, 06:54 AM IST

रेवाड़ी | गढ़ी बोलनी रोड पर गांव पैदयावास के पास जिस प्लाट पर कब्जा करने को लेकर घमासान मचा हुआ है और एक बुजुर्ग महिला के किडनैप के आरोप लगे हैं, दरअसल इस प्लाट की पांच अलग अलग रजिस्ट्री हो चुकी हैं। कागजों में सभी दावेदार हैं, जिस धनपत सिंह पर यह मामला दर्ज हुआ है। उसके परिजन अब सभी सबूतों के साथ सामने आ गए हैं। उनका कहना है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। सच सामने आ जाएगा। उनका कहना है कि जिस बुजुर्ग महिला के अपहरण की बात की जा रही है वह वहां क्या कर रही थी। अगर यह उसका घर है तो सबूत दिखाए। धनपत पर यह मामला दर्ज हुआ है, जबकि वह उस समय गुड़गांव के सामान्य अस्पताल में भर्ती था। जिसने इस घर को बेचा था वह गायब क्यों हैं। उसे सामने लाया जाए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि घूमा-फिरा चालाकी से एक ही प्लाट की पांच अलग-अलग लोगों के नाम रजिस्ट्री कैसे हो गईं।

4 बार परिजनों के नाम रजिस्ट्री कराई, पांचवीं बार उन्हें बेचा
रविवार को धनपत सिंह के परिजन सामने आए। उसकी पत्नी राकेश देवी ने बताया कि इस प्लाट के मालिक ने चार बार इस प्लाट की अपने परिवार के सदस्यों के नाम रजिस्ट्री कराई। अंत में पांचवीं बार उसके पति धनपत सिंह के नाम पर रजिस्ट्री करा दी। 20 नवंबर 2015 को प्लाट मालिक विवेक ने 340 वर्ग गज यह प्लाट अपनी पत्नी अनिता के नाम कर दिया, जबकि इंतकाल 242 वर्ग गज का है। 17 अगस्त 2016 को उसने यह प्लाट वापस अपने नाम करा लिया। 19 अगस्त 2016 को उसने यह प्लाट अपनी बहन सीमा के नाम कर दिया। 23 दिसंबर 2016 को उसने अपनी पत्नी के नाम 424 वर्ग प्लाट की रजिस्ट्री करा दी और इंतकाल 346 वर्ग गज का कराया। अनिता ने 24 जनवरी 2017 को उसके पति धनपत के नाम पर 346 वर्ग गज की रजिस्ट्री करा दी।

कब्जा लेने आए तो सामने आए दावेदार
इसके बाद विवेक ने कुछ दिन इस प्लाट में बने घर में रहने की मोहलत मांगी। 3 दिसंबर 2017 को उसने मकान खाली करने को कहा। एक अन्य बाबूलाल भी खुद को मालिक बता रहा है। इसी बाबूलाल ने आगे चलकर अपनी बुजुर्ग पत्नी को आगे करके किडनैप की कहानी रच दी। उस समय उसके पति धनपत सिंह गुड़गांव के सिविल अस्पताल में भर्ती थे।