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रेप की वजह से 13 साल की उम्र में बनी मां, इलाज कराने में पिता कर्जदार बना

करीब 25 साल का युवक उसे बहला-फुसलाकर बिहार ले गया और वहां धमकी देकर उसके साथ रेप किया।

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 07:32 AM IST
no help to minor girl became mother

रोहतक. मात्र 13 साल की उम्र में आठवीं की स्टूडेंट ने दुराचार का दर्द झेला। करीब 25 साल का युवक उसे बहला-फुसलाकर बिहार ले गया और वहां धमकी देकर उसके साथ रेप किया। लड़की की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई। पुलिस ने जब युवक को पकड़कर उसे उसके घर छोड़ा तो रेप की वजह से उसका गर्भ ठहर चुका था। इस नाजुक हालत में भी उसकी शासन और प्रशासन किसी ने सुध नहीं ली। मजदूर पिता ने सवा लाख रुपए कर्ज उठाकर किसी तरह उसका इलाज शुरू करवाया।

- पीड़ित बच्ची की हालत खराब हुई तो उसे पीजीआईएमएस में भर्ती करवाया गया। कुछ दिन बाद उसे घर ले आए।

- लड़की ने घर पर ही मृत बच्चे को जन्म दिया। परिजनों ने पुलिस की हेल्प से विक्टिम को दोबारा पीजीआई में भर्ती करवाया। पीड़िता करीब डेढ़ महीने तक जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही।

- इस दौरान किसी ने भी उनकी मदद नहीं की। कर्ज लेकर ही उसका इलाज चला। किसी तरह वह कुछ ठीक हुई तो उसे घर पर ले आए, लेकिन इसके बाद बच्ची इतना सहम गई कि उसने स्कूल जाना भी छोड़ दिया।

-डर व धमकियों के मारे मां ने मजदूरी छोड़कर घर पर रहना शुरू कर दिया। इस तरह 6 सदस्यों के पूरे परिवार का बोझ केवल पिता के कंधों पर आ गया। शासन और प्रशासन ने कोई मदद नहीं की।

पैसे नहीं होने पर ताकत की दवा भी छूटी, सवा लाख कर्ज चढ़ा
- लड़की के पिता ने बताया कि परिवार में छह सदस्य हैं अौर कमाने वाला अकेला हूं। तीन बच्चे पढ़ते हैं। उनका स्कूल व परिवार का खर्च। इसके अलावा उसकी बेटी का इलाज भी पिछले डेढ़ साल से चल रहा है। उसकी बेटी के शरीर में कमजोरी ज्यादा होने के चलते अब तक ताकत की दवा चल रही हैं।

- अब हालात ऐसे हैं कि कई बार मजदूरी के रुपये न मिले तो कई दिन बेटी की दवा नहीं खरीदी जाती। हालांकि बेटी का इलाज करवाने में करीब एक लाख 20 हजार रुपये का कर्ज भी उसके सिर पर है।

आज तक नहीं मिली कोई सहायता
विक्टिम परिवार का दावा है कि उनकी आज तक किसी सरकारी व गैर सरकारी संस्था ने कोई भी आर्थिक सहायता नहीं की है। वे सिर्फ कर्ज लेकर अपनी बेटी की जान बचा पाए हैं। अब सरकारी वकील की सहायता से ही उन्हें न्याय मिल पाएगा।

पीड़ित परिवार अपील करेगा तो मदद की कोशिश करूंगा
चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन राजसिंह सांगवान का कहना है कि पीड़ित परिवार की तरफ से उनको लिखित में शिकायत मिली तो वे जरूर आर्थिक सहायता दिलवाने का प्रयास करेंगे।

विक्टिम बोली- क्लास में दूसरे नंबर पर थी पढ़ाई में, अब उस स्कूल में नहीं जाऊंगी
- लड़की का कहना है कि वह अपनी कक्षा में पढ़ाई में दूसरे नंबर पर थी। जब से उसके साथ यह घटना घटित हुई है, उसने पढ़ाई छोड़ दी।

- अब उसका उस स्कूल में पढ़ने का मन भी नहीं करता। उसका पढ़ाई को मन तो करता है, लेकिन अब उसके परिवार के आर्थिक हालात भी ठीक नहीं है। यदि किसी दूसरे स्कूल में उसे पढ़ने का माैका मिले ताे वह जा सकती है।

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