Hindi News »Haryana »Rohtak» Not Work At Home By Mobile Addiction

पत्नी सारा दिन रहती मोबाइल पर, रिश्ता टूटने के कगार पर

बच्चों का ध्यान पढ़ाई पर है और घर के दूसरे कामों में। हाल यह है कि होनहार बच्चे भी क्लास में फेल होने लगे हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 22, 2017, 07:23 AM IST

पत्नी सारा दिन रहती मोबाइल पर, रिश्ता टूटने के कगार पर

रोहतक. मोबाइल और इंटरनेट की लत युवा पीढ़ी पर हावी है। इंटरनेट के जाल में फंस कर अपनी सुधबुध खोए बच्चों का ध्यान पढ़ाई पर है और घर के दूसरे कामों में। हाल यह है कि होनहार बच्चे भी क्लास में फेल होने लगे हैं। ऐसे में परेशान अभिभावक पीजीआईएमएस के मनोरोग विभाग में शुरू की गई बिहेवियर एडिक्शन क्लीनिक में आने लगे हैं। सप्ताह में गुरुवार को लगने वाले इस क्लीनिक में वे अपने बच्चों की मोबाइल लत छुड़ाने की राय ले रहे हैं। इस साप्ताहिक क्लीनिक में ऐसे पांच से दस लोग रहे हैं।

केस 1 : पहले वर्ष में ही शादी टूटने के कगार पर
अंबालासे आए एक व्यक्ति ने संस्थान के नशा मुक्ति केंद्र के कमरा नंबर नौ में चलाए गए क्लीनिक में चिकित्सक से संपर्क किया। उसका कहना है कि शादी को एक वर्ष हुआ है। सबकुछ ठीक है। इसके बावजूद शादी टूटने के कगार पर है। पत्नी सारा दिन मोबाइल फोन पर व्यस्त रहती है। पत्नी के मोबाइल इस्तेमाल का रिकॉर्ड दिखाते हुए कहा कि फोन पर बात करने के साथ इंटरनेट भी दिनभर चलता है। इससे घर का काम ही नहीं माहौल भी प्रभावित हो रहा है। घर में काम करना दूर सास ससुर से बात तक करने का समय नहीं है। इस कारण रिश्ते बिगड़ रहे हैं।

केस2 : मां के इकलौते सहारे ने छोड़ी पढ़ाई
शहरकी एक कॉलोनी में अपने इकलौते बेटे के साथ रह रही महिला पिछले काफी समय से परेशान है। पति के निधन के बाद बेटे के सहारे जी रहे महिला बिहेवियर क्लीनिक आई थी। यहां वह डॉक्टर से अपने होनहार बेटे के 11वीं कक्षा में फेल होने और पढ़ाई छोड़ने का कारण जानने आई थी। उसने कहा कि दसवीं तक पढ़ाई में ठीक था। वह 11वीं में हुआ तो अकेला रहने लगा। परीक्षा परिणाम आया तो वह फेल हो गया। अब पढ़ाई छोड़ दी है। उसका अकेला रहना कम नहीं हुआ है। मोबाइल मिलने के बाद से वह सारा दिन उसी पर व्यस्त रहता है। उसके नहीं पढ़ने से दोनों का भविष्य अंधेरे में नजर रहा है। कुछ कहने पर चिल्लाता है। कोई बात नहीं सुनता है।

ये करें मोबाइल एडिक्ट के साथ
-अभिभावक अपने बच्चों के साथ बात करें।
- समस्या का कारण जानने का प्रयास करें।
- बच्चों के साथ थोड़ा समय जरूर बिताएं।
- अकेले बैठे बच्चों को काम में व्यस्त रखें।
- बच्चों से शारीरिक गतिविधियां कराते रहें।
- मोबाइल इस्तेमाल की लिमिट तय करें।

एकमात्र इलाज
मोबाइलऔर इंटरनेट का लगातार इस्तेमाल खतरनाक है। अपना कीमती समय लोग जरूरत से ज्यादा मोबाइल पर बिता रहे हैं। इसका असर उनके जीवन पर पड़ने लगा है। वे तो अपने घर और परिवार पर ध्यान दे रहे हैं और ही अपना काम ठीक से कर पा रहे हैं। इस कारण केवल रिश्ते बिगड़ रहे हैं, बल्कि लोग मानसिक रोगी बनते जा रहे हैं। इसका इलाज दवा नहीं, काउंसलिंग है। इसके जरिए ऐसे लोगों को ठीक किया जा सकता है। -डाॅ.विनय कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर।

इंटरनेट और मोबाइल के जाल में युवा ज्यादा फंसे
व्यवहारिक चिकित्सा के जरिए लोगों को हेल्दी लाइफ स्टाइल ढालने का प्रयास बिहेवियर क्लीनिक में किया जा रहा है। इंटरनेट और मोबाइल के जाल में युवा ज्यादा फंसे हैं। ये गेम, चैटिंग, सोशल मीडिया, ऑन लाइन शॉपिंग में व्यस्त रहते हैं। -डॉ.सिद्धार्थ, मनोवैज्ञानिक, बिहेवियर एडिक्शन क्लीनिक।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Rohtak News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: patni saaraa din rhti mobile par, rishtaa tutne ke kgaaar par
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Rohtak

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×